अल-हिज्र · 81/99
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हिज्र
وَآتَيْنَاهُمْ آيَاتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ ۝٨١
Wa aatainaahum Aayaatinaa fakaanoo `anhaa mu`rideen
📖 हिंदी अर्थ
और (बावजूद कि) हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दी उस पर भी वह लोग उनसे रद गिरदानी करते रहे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آيَاتِنَا: हमारी निशानियाँ (चमत्कार और प्रमाण)
  • مُعْرِضِينَ: मुँह मोड़ने वाले, उपेक्षा करने वाले

व्याख्या:

इस आयत में अल्लाह तआला समूद क़ौम (सालिह अलैहिस्सलाम की क़ौम) का ज़िक्र कर रहे हैं। हमने उन्हें अपनी निशानियाँ और चमत्कार दिए, जो उनके नबी सालिह अलैहिस्सलाम की सच्चाई को साबित करने वाले थे। इन निशानियों में सबसे प्रमुख वह ऊँटनी थी जो चट्टान से निकाली गई थी, और यह उनके लिए एक बड़ा चमत्कार और स्पष्ट प्रमाण था। लेकिन उन्होंने इन निशानियों से कोई सबक़ नहीं लिया, न उन पर विचार किया और न ही उन्हें महत्व दिया। वे इनसे पूरी तरह मुँह मोड़ लिए और इन्हें अनदेखा कर दिया। उन्होंने इन निशानियों को देखकर भी उन पर ईमान नहीं लाया, बल्कि उन्हें जादू और झूठ कहा। यह उनकी हठधर्मिता और अहंकार का प्रमाण था कि उन्होंने स्पष्ट प्रमाणों के बावजूद सत्य को स्वीकार नहीं किया।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह तआला अपने नबियों को चमत्कारों से समर्थन देता है ताकि लोगों पर हुज्जत (प्रमाण) पूरी हो जाए, और यह अल्लाह की रहमत और न्याय का प्रदर्शन है।
  2. निशानियों और प्रमाणों का होना तब तक फ़ायदेमंद नहीं जब तक दिल उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार न हो। इसलिए हमें अपने दिलों को सत्य के प्रति खुला रखना चाहिए।
  3. अल्लाह की निशानियों से मुँह मोड़ना विनाश का कारण बनता है, जैसा कि समूद क़ौम के साथ हुआ। यह हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम अल्लाह के संकेतों को अनदेखा न करें।
  4. इस्लाम सिखाता है कि हर इंसान को अपने पास आए सत्य के प्रमाणों पर विचार करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह किसी पर ज़ुल्म नहीं करता, बल्कि लोग स्वयं अपने कर्मों से अपना अंजाम तय करते हैं।


📜 आयत 79-83 — सूरा अल-हिज्र

79فَانتَقَمْنَا مِنْهُمْ وَإِنَّهُمَا لَبِإِمَامٍ مُّبِينٍ
तो उन से भी हमने (नाफरमानी का) बदला लिया और ये दो बस्तियाँ (क़ौमे लूत व शुएब की) एक खुली हुई यह राह पर (अभी तक मौजूद) हैं
80وَلَقَدْ كَذَّبَ أَصْحَابُ الْحِجْرِ الْمُرْسَلِينَ
और इसी तरह हिज्र के रहने वालों (क़ौम सालेह ने भी) पैग़म्बरों को झुठलाया
81وَآتَيْنَاهُمْ آيَاتِنَا فَكَانُوا عَنْهَا مُعْرِضِينَ
और (बावजूद कि) हमने उन्हें अपनी निशानियाँ दी उस पर भी वह लोग उनसे रद गिरदानी करते रहे
82وَكَانُوا يَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا آمِنِينَ
और बहुत दिल जोई से पहाड़ों को तराश कर घर बनाते रहे
83فَأَخَذَتْهُمُ الصَّيْحَةُ مُصْبِحِينَ
आख़िर उनके सुबह होते होते एक बड़ी (जोरों की) चिंघाड़ ने ले डाला
अल-हिज्रकुरान सूची
99आयत
मक्कीअवतरण स्थान
81आयत

अनुवाद — अल-हिज्र 81

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Friday, October 2, 2026

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