अल-हिज्र · 88/99
अनुवाद उच्चारण — अल-हिज्र
لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِّنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِنِينَ ۝٨٨
Laa tamuddanna `ainaika ilaa maa matta `naa biheee azwaajam minhum wa laa tahzan `alaihim wakhfid janaahaka lilmu `mineen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने जो उन कुफ्फारों में से कुछ लोगों को (दुनिया की) माल व दौलत से निहाल कर दिया है तुम उसकी तरफ हरगिज़ नज़र भी न उठाना और न उनकी (बेदीनी) पर कुछ अफसोस करना और ईमानदारों से (अगरचे ग़रीब हो) झुककर मिला करो और कहा दो कि मै तो (अज़ाबे ख़ुदा से) सरीही तौर से डराने वाला हूँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ — अपनी आँखें मत लगाओ, अर्थात लालच भरी नज़र से मत देखो।
  • أَزْوَاجًا — यहाँ इसका अर्थ है 'किस्में' या 'समूह' (क़ुरैश के काफ़िरों के विभिन्न वर्ग)।
  • وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ — अपना पंख झुकाओ, अर्थात नम्रता और विनम्रता अपनाओ।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी (ﷺ)! तुम उस दुनियावी ठाठ-बाट और सुख-सामग्री की ओर लालच भरी नज़र से मत देखो जो हमने काफ़िरों के विभिन्न समूहों को दे रखी है। यह सब कुछ क्षणभंगुर है और उनके लिए एक अस्थायी साधन मात्र है। यह तुम्हारे लिए कोई महत्व की चीज़ नहीं है, क्योंकि तुम्हारे पास जो कुछ है — नबुव्वत, ईमान और आख़िरत की सफलता — वह इन सबसे कहीं बेहतर और स्थायी है।

और उन लोगों के इनकार और झुठलाने पर उदास मत होना, क्योंकि उनका ईमान न लाना तुम्हारी कोई कमी नहीं है। तुम्हारा काम केवल संदेश पहुँचाना है, हिदायत देना अल्लाह के हाथ में है।

बल्कि तुम उन मोमिनीन के साथ नम्रता और विनम्रता से पेश आओ, उनके साथ नरमी और मुहब्बत का व्यवहार करो, उनके लिए अपना दामन खोल दो और उन्हें अपने करीब लाओ। उनके साथ ऐसा सुलूक करो जैसे एक शफ़ीक़ (मेहरबान) पिता अपनी औलाद के साथ करता है।

फ़ायदे (शिक्षाएँ):

  1. इस आयत से हमें सबसे बड़ी शिक्षा मिलती है कि दुनिया की चमक-दमक और माल-दौलत को देखकर कभी रश्क (जलन) या लालच नहीं करना चाहिए। असली कामयाबी आख़िरत की सफलता है, न कि दुनिया के अस्थायी सुख।
  2. यह हमें सिखाती है कि जब हमारा कोई प्रिय व्यक्ति या समुदाय हिदायत न पाए, तो हमें उदास नहीं होना चाहिए। हमारा फ़र्ज़ सिर्फ अच्छी बात पहुँचाना है, नतीजा अल्लाह के हाथ में है। यह चीज़ हमें निराशा से बचाती है और हमारे कंधों से बोझ हल्का करती है।
  3. सबसे खूबसूरत शिक्षा यह है कि मोमिनीन के साथ हमारा रवैया नम्रता, नरमी और मुहब्बत का होना चाहिए। इस्लाम में तकब्बुर (घमंड) और सख़्ती की कोई गुंजाइश नहीं। जो लोग अल्लाह पर ईमान रखते हैं, उनके साथ हमें अपना दिल खोलकर पेश आना चाहिए, उनकी कमज़ोरियों पर शफ़क़त से पेश आना चाहिए और उन्हें अपनी दुआओं में शामिल रखना चाहिए। यही वह रास्ता है जो दिलों को जोड़ता है और समाज को मज़बूत बनाता है।


📜 आयत 86-90 — अल-हिज्र

86إِنَّ رَبَّكَ هُوَ الْخَلَّاقُ الْعَلِيمُ
इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बड़ा पैदा करने वाला है
87وَلَقَدْ آتَيْنَاكَ سَبْعًا مِّنَ الْمَثَانِي وَالْقُرْآنَ الْعَظِيمَ
(बड़ा दाना व बीना है) और हमने तुमको सबए मसानी (सूरे हम्द) और क़ुरान अज़ीम अता किया है
88لَا تَمُدَّنَّ عَيْنَيْكَ إِلَىٰ مَا مَتَّعْنَا بِهِ أَزْوَاجًا مِّنْهُمْ وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَاخْفِضْ جَنَاحَكَ لِلْمُؤْمِنِينَ
और हमने जो उन कुफ्फारों में से कुछ लोगों को (दुनिया की) माल व दौलत से निहाल कर दिया है तुम उसकी तरफ हरगिज़ नज़र भी न उठाना और न उनकी (बेदीनी) पर कुछ अफसोस करना और ईमानदारों से (अगरचे ग़रीब हो) झुककर मिला करो और कहा दो कि मै तो (अज़ाबे ख़ुदा से) सरीही तौर से डराने वाला हूँ
89وَقُلْ إِنِّي أَنَا النَّذِيرُ الْمُبِينُ
(ऐ रसूल) उन कुफ्फारों पर इस तरह अज़ाब नाज़िल करेगें जिस तरह हमने उन लोगों पर नाज़िल किया
90كَمَا أَنزَلْنَا عَلَى الْمُقْتَسِمِينَ
जिन्होंने क़ुरान को बॉट कर टुकडे टुकड़े कर डाला
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अनुवाद — अल-हिज्र 88

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Tuesday, August 18, 2026

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