अन-नहल · 38/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
وَأَقْسَمُوا بِاللَّهِ جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ ۙ لَا يَبْعَثُ اللَّهُ مَن يَمُوتُ ۚ بَلَىٰ وَعْدًا عَلَيْهِ حَقًّا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ ۝٣٨
Wa aqsamoo billaahi jahda aimaanihim laa yab`asul laahu mai yamoot; balaa wa`dan `alaihi haqqanw wa laakinna aksaran naasi laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
(कि अज़ाब से बचाए) और ये कुफ्फार ख़ुदा की जितनी क़समें उनके इमकान में तुम्हें खा (कर कहते) हैं कि जो शख़्श मर जाता है फिर उसको ख़ुदा दोबारा ज़िन्दा नहीं करेगा (ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ ज़रुर ऐसा करेगा इस पर अपने वायदे की (वफा) लाज़िम व ज़रुरी है मगर बहुतेरे आदमी नहीं जानते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ: अत्यधिक दृढ़ता और पूरी ताकत से की गई क़समें।
  • بَلَى: हाँ (इसका प्रयोग नकारात्मक वाक्य की पुष्टि के लिए होता है)।
  • وَعْدًا عَلَيْهِ حَقًّا: यह अल्लाह पर एक सत्य और अनिवार्य वादा है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये मुशरिकीन (बहुदेववादी) अल्लाह की क़समें खाकर दृढ़ता से कहते थे कि अल्लाह उन लोगों को दोबारा जीवित नहीं करेगा जो मर चुके हैं, जब उनके शरीर सड़-गलकर मिट्टी में मिल चुके होंगे। वे इस बात पर इतने अड़े हुए थे कि अपनी झूठी बात को सच साबित करने के लिए अल्लाह के नाम की सबसे बड़ी क़समें खाते थे, हालाँकि उनके पास इस दावे का कोई प्रमाण या तर्क नहीं था।

अल्लाह तआला उनके इस झूठे दावे का जवाब देते हुए फ़रमाता है: "हाँ, ज़रूर उठाए जाएँगे!" यह अल्लाह का एक सच्चा और पक्का वादा है जो उसने अपनी रहमत और अपने न्याय के कारण अपने ऊपर अनिवार्य कर लिया है। वह हर मरने वाले को दोबारा ज़िंदा करेगा, चाहे उसका शरीर कितना ही बिखर क्यों न गया हो। लेकिन अधिकतर लोग अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) को नहीं समझते, इसलिए वे पुनरुत्थान (आख़िरत में दोबारा जीवित होने) को असंभव मानते हैं और उसे झुठलाते हैं। उनकी यह नासमझी उन्हें अल्लाह की ताक़त और उसके वादे की सच्चाई से दूर रखती है।

फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की क़ुदरत असीमित है — वह मुर्दों को दोबारा ज़िंदा करने पर पूरी तरह क़ादिर है, और यह उसके लिए बिल्कुल आसान है।
  2. पुनरुत्थान (आख़िरत) का विश्वास ईमान का एक आवश्यक हिस्सा है; यही वह चीज़ है जो इंसान को अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करती है और बुराई से रोकती है।
  3. क़समें सिर्फ सच्ची बातों के लिए खानी चाहिए; झूठी बातों को सच साबित करने के लिए अल्लाह के नाम की क़समें खाना बहुत बड़ा पाप है।
  4. अल्लाह का वादा कभी नहीं टूटता — उसने जो वादा किया है, उसे पूरा करके ही रहेगा, चाहे लोग मानें या न मानें।
  5. अधिकतर लोगों का नासमझी में डूबा होना हमें सच्चाई की खोज और ज्ञान हासिल करने की ओर प्रेरित करता है, ताकि हम उन लोगों में से न हों जो अल्लाह की क़ुदरत से अनजान हैं।


📜 आयत 36-40 — सूरा अन-नहल

36وَلَقَدْ بَعَثْنَا فِي كُلِّ أُمَّةٍ رَّسُولًا أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ وَاجْتَنِبُوا الطَّاغُوتَ ۖ فَمِنْهُم مَّنْ هَدَى اللَّهُ وَمِنْهُم مَّنْ حَقَّتْ عَلَيْهِ الضَّلَالَةُ ۚ فَسِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُكَذِّبِينَ
और हमने तो हर उम्मत में एक (न एक) रसूल इस बात के लिए ज़रुर भेजा कि लोगों ख़ुदा की इबादत करो और बुतों (की इबादत) से बचे रहो ग़रज़ उनमें से बाज़ की तो ख़ुदा ने हिदायत की और बाज़ के (सर) पर गुमराही सवार हो गई तो ज़रा तुम लोग रुए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (पैग़म्बराने ख़ुदा के) झुठलाने वालों को क्या अन्जाम हुआ
37إِن تَحْرِصْ عَلَىٰ هُدَاهُمْ فَإِنَّ اللَّهَ لَا يَهْدِي مَن يُضِلُّ ۖ وَمَا لَهُم مِّن نَّاصِرِينَ
(ऐ रसूल) अगर तुमको इन लोगों के राहे रास्त पर जाने का हौका है (तो बे फायदा) क्योंकि ख़ुदा तो हरगिज़ उस शख़्श की हिदायत नहीं करेगा जिसको (नाज़िल होने की वजह से) गुमराही में छोड़ देता है और न उनका कोई मददगार है
38وَأَقْسَمُوا بِاللَّهِ جَهْدَ أَيْمَانِهِمْ ۙ لَا يَبْعَثُ اللَّهُ مَن يَمُوتُ ۚ بَلَىٰ وَعْدًا عَلَيْهِ حَقًّا وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَ النَّاسِ لَا يَعْلَمُونَ
(कि अज़ाब से बचाए) और ये कुफ्फार ख़ुदा की जितनी क़समें उनके इमकान में तुम्हें खा (कर कहते) हैं कि जो शख़्श मर जाता है फिर उसको ख़ुदा दोबारा ज़िन्दा नहीं करेगा (ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ ज़रुर ऐसा करेगा इस पर अपने वायदे की (वफा) लाज़िम व ज़रुरी है मगर बहुतेरे आदमी नहीं जानते हैं
39لِيُبَيِّنَ لَهُمُ الَّذِي يَخْتَلِفُونَ فِيهِ وَلِيَعْلَمَ الَّذِينَ كَفَرُوا أَنَّهُمْ كَانُوا كَاذِبِينَ
(दोबारा ज़िन्दा करना इसलिए ज़रुरी है) कि जिन बातों पर ये लोग झगड़ा करते हैं उन्हें उनके सामने साफ वाज़ेए कर देगा और ताकि कुफ्फार ये समझ लें कि ये लोग (दुनिया में) झूठे थे
40إِنَّمَا قَوْلُنَا لِشَيْءٍ إِذَا أَرَدْنَاهُ أَن نَّقُولَ لَهُ كُن فَيَكُونُ
हम जब किसी चीज़ (के पैदा करने) का इरादा करते हैं तो हमारा कहना उसके बारे में इतना ही होता है कि हम कह देते हैं कि 'हो जा' बस फौरन हो जाती है (तो फिर मुर्दों का जिलाना भी कोई बात है)
अन-नहलकुरान सूची
128आयत
मक्कीअवतरण स्थान
38आयत

अनुवाद — अन-नहल 38

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Thursday, October 1, 2026

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