अल-कहफ · 91/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
كَذَٰلِكَ وَقَدْ أَحَطْنَا بِمَا لَدَيْهِ خُبْرًا ۝٩١
Kazaalika wa qad ahatnaa bimaa ladaihi khubraa
📖 हिंदी अर्थ
और था भी ऐसा ही और जुलक़रनैन के पास वो कुछ भी था हमको उससे पूरी वाकफ़ियत थी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • كَذَٰلِكَ: इसी प्रकार, ऐसे ही।
  • أَحَطْنَا: हमने घेर लिया, पूरी तरह से जान लिया, हमारे ज्ञान ने सब कुछ अपने घेरे में ले लिया।
  • خُبْرًا: पूर्ण ज्ञान, खबर रखना, हर चीज़ से अवगत होना।

तफ़सीर (व्याख्या):

यानी जिस प्रकार ज़ुल-क़रनैन ने सूर्यास्त की ओर (पश्चिम) के लोगों के साथ न्याय और अदल का व्यवहार किया, उसी प्रकार उन्होंने सूर्योदय की ओर (पूर्व) के लोगों के साथ भी किया। अल्लाह तआला फ़रमा रहे हैं कि हमें उसके पास मौजूद हर चीज़ का पूरा-पूरा ज्ञान था — उसकी सेना, उसके साधन, उसकी ताक़त, उसके साम्राज्य के सारे सामान और उसे मिली हुई हर सुविधा और शक्ति का हमें पूर्ण और गहरा इल्म था। हमारा ज्ञान उसकी हर हालत और हर काम का अहाता किए हुए था। यह एक बहुत बड़ी नेमत थी कि अल्लाह ने उसे यह ताक़त दी और फिर उसके हर काम पर अपनी निगरानी और ज्ञान का इज़हार फ़रमाया।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की हर हालत से वाक़िफ है। जब कोई बंदा अल्लाह की राह में काम करता है, अदल और इंसाफ़ फैलाता है, तो अल्लाह उसकी मदद करता है और उसे ताक़त व इख़्तियार देता है। ज़ुल-क़रनैन की यह कामयाबी इसलिए थी कि उन्होंने अपनी ताक़त को अल्लाह की राह में इस्तेमाल किया। हमें भी चाहिए कि जो भी नेमतें और ताक़तें अल्लाह ने हमें दी हैं, उन्हें हम उसी की राह में लगाएँ। अल्लाह का ज्ञान हर चीज़ को घेरे हुए है — हमारे अच्छे काम और हमारी नीयतें सब उसके सामने हैं। यह सोच हमें अच्छे कामों की तरफ़ राग़िब करती है और बुराई से रोकती है। जब हमें यक़ीन हो कि अल्लाह सब कुछ देख रहा है और जान रहा है, तो हमारा दिल अच्छाई की तरफ़ माइल होता है और हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालने की कोशिश करते हैं। यही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 89-93 — अल-कहफ

89ثُمَّ أَتْبَعَ سَبَبًا
फिर उस ने एक दूसरी राह एख्तियार की
90حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ مَطْلِعَ الشَّمْسِ وَجَدَهَا تَطْلُعُ عَلَىٰ قَوْمٍ لَّمْ نَجْعَل لَّهُم مِّن دُونِهَا سِتْرًا
यहाँ तक कि जब चलते-चलते आफताब के तूलूउ होने की जगह पहुँचा तो (आफताब) से ऐसा ही दिखाई दिया (गोया) कुछ लोगों के सर पर उस तरह तुलूउ कर रहा है जिन के लिए हमने आफताब के सामने कोई आड़ नहीं बनाया था
91كَذَٰلِكَ وَقَدْ أَحَطْنَا بِمَا لَدَيْهِ خُبْرًا
और था भी ऐसा ही और जुलक़रनैन के पास वो कुछ भी था हमको उससे पूरी वाकफ़ियत थी
92ثُمَّ أَتْبَعَ سَبَبًا
(ग़रज़) उसने फिर एक और राह एख्तियार की
93حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ بَيْنَ السَّدَّيْنِ وَجَدَ مِن دُونِهِمَا قَوْمًا لَّا يَكَادُونَ يَفْقَهُونَ قَوْلًا
यहाँ तक कि जब चलते-चलते रोम में एक पहाड़ के (कंगुरों के) दीवारों के बीचो बीच पहुँच गया तो उन दोनों दीवारों के इस तरफ एक क़ौम को (आबाद) पाया तो बात चीत कुछ समझ ही नहीं सकती थी
अल-कहफकुरान सूची
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अनुवाद — अल-कहफ 91

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Tuesday, August 18, 2026

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