अल-कहफ · 90/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ مَطْلِعَ الشَّمْسِ وَجَدَهَا تَطْلُعُ عَلَىٰ قَوْمٍ لَّمْ نَجْعَل لَّهُم مِّن دُونِهَا سِتْرًا ۝٩٠
Hattaaa izaa balagha matli`ash shamsi wajdahaa tatlu`u alaa qawmil lam naj`al lahum min doonihaa sitraa
📖 हिंदी अर्थ
यहाँ तक कि जब चलते-चलते आफताब के तूलूउ होने की जगह पहुँचा तो (आफताब) से ऐसा ही दिखाई दिया (गोया) कुछ लोगों के सर पर उस तरह तुलूउ कर रहा है जिन के लिए हमने आफताब के सामने कोई आड़ नहीं बनाया था

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَطْلِعَ الشَّمْسِ: सूर्य के उदय होने का स्थान, अर्थात पूर्व दिशा का वह क्षेत्र।
  • سِتْرًا: आड़, ढकने वाली चीज़, जैसे छत, दीवार, या पेड़ों की छाया।

तफ़सीर (व्याख्या):

फिर वे (ज़ुल-क़रनैन) पूर्व की ओर चलते रहे, यहाँ तक कि जब वे सूर्य के उदय होने के स्थान पर पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि सूर्य ऐसे लोगों पर उदय होता है जिनके पास न कोई इमारत है जो उन्हें धूप से बचाए, और न ही पेड़ हैं जो उनकी छाया करें। ये लोग ऐसी खुली ज़मीन पर रहते थे जहाँ न मकान बनते थे और न दरख़्त उगते थे। वे सूर्य की तपिश से बचने के लिए ज़मीन में बने गड्ढों (सुरंगों) में छिप जाते थे, और जब सूर्य ढल जाता था तो बाहर निकल आते थे। यह अल्लाह की क़ुदरत का एक अजीब नज़ारा था कि उसने इन लोगों को ऐसी जगह बसाया जहाँ कोई प्राकृतिक या बनावटी आड़ नहीं थी, फिर भी वे उसकी रहमत से गुज़ारा कर लेते थे।

यहाँ से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह की तदबीर (योजना) और उसकी क़ुदरत के आगे इंसान की समझ बहुत छोटी है। जिस तरह उसने इन लोगों को बिना किसी आड़ के धूप सहने की ताक़त दी, उसी तरह वह हर मुश्किल में अपने बंदों के लिए रास्ता निकालता है। इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि दुनिया के हालात और लोगों की ज़िंदगी के तरीक़े अलग-अलग हैं, और अल्लाह हर इंसान को उसकी हैसियत के मुताबिक़ परखता है। हमें अपने पास मौजूद नेअमतों (आशीर्वादों) पर शुक्र करना चाहिए, चाहे वे कितनी भी छोटी क्यों न हों, क्योंकि अल्लाह ने हमें छत, साया, और आराम की चीज़ें दी हैं जो दुनिया के कई लोगों को नसीब नहीं।

यह क़िस्सा हमें यह भी बताता है कि ज़ुल-क़रनैन एक नेक और ताक़तवर बादशाह थे जिन्होंने अल्लाह की ज़मीन का सफ़र किया, ताकि लोगों की मदद कर सकें और अल्लाह का पैग़ाम पहुँचा सकें। उनका यह सफ़र हमें सिखाता है कि हमें भी अपने इल्म और ताक़त को दूसरों की भलाई के लिए इस्तेमाल करना चाहिए, और अल्लाह की बनाई हुई दुनिया में उसकी निशानियों पर ग़ौर करना चाहिए। जब हम सूरज, चाँद, ज़मीन और आसमान को देखते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह सब किसी खिलाड़ी ने नहीं बनाया, बल्कि अल्लाह ने बनाया है जो हर चीज़ पर क़ादिर है। यह ईमान की मज़बूती का ज़रिया है और हमें अल्लाह की इबादत में मशग़ूल रहना चाहिए, क्योंकि वही हमारा रब है और वही हमें रिज़्क़ देता है।



📜 आयत 88-92 — अल-कहफ

88وَأَمَّا مَنْ آمَنَ وَعَمِلَ صَالِحًا فَلَهُ جَزَاءً الْحُسْنَىٰ ۖ وَسَنَقُولُ لَهُ مِنْ أَمْرِنَا يُسْرًا
और जो शख्स ईमान कुबूल करेगा और अच्छे काम करेगा तो (वैसा ही) उसके लिए अच्छे से अच्छा बदला है और हम बहुत जल्द उसे अपने कामों में से आसान काम (करने) को कहेंगे
89ثُمَّ أَتْبَعَ سَبَبًا
फिर उस ने एक दूसरी राह एख्तियार की
90حَتَّىٰ إِذَا بَلَغَ مَطْلِعَ الشَّمْسِ وَجَدَهَا تَطْلُعُ عَلَىٰ قَوْمٍ لَّمْ نَجْعَل لَّهُم مِّن دُونِهَا سِتْرًا
यहाँ तक कि जब चलते-चलते आफताब के तूलूउ होने की जगह पहुँचा तो (आफताब) से ऐसा ही दिखाई दिया (गोया) कुछ लोगों के सर पर उस तरह तुलूउ कर रहा है जिन के लिए हमने आफताब के सामने कोई आड़ नहीं बनाया था
91كَذَٰلِكَ وَقَدْ أَحَطْنَا بِمَا لَدَيْهِ خُبْرًا
और था भी ऐसा ही और जुलक़रनैन के पास वो कुछ भी था हमको उससे पूरी वाकफ़ियत थी
92ثُمَّ أَتْبَعَ سَبَبًا
(ग़रज़) उसने फिर एक और राह एख्तियार की
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीRevelation
90आयत

अनुवाद — अल-कहफ 90

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Tuesday, August 18, 2026

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