मरियम · 77/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
أَفَرَأَيْتَ الَّذِي كَفَرَ بِآيَاتِنَا وَقَالَ لَأُوتَيَنَّ مَالًا وَوَلَدًا ۝٧٧
Afara`aytal lazee kafara bi Aayaatinaa wa qaala la oota yanna maalanw wa waladaa
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) क्या तुमने उस शख्स पर भी नज़र की जिसने हमारी आयतों से इन्कार किया और कहने लगा कि (अगर क़यामत हुईतो भी) मुझे माल और औलाद ज़रूर मिलेगी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَفَرَأَيْتَ – क्या आपने देखा / क्या आपको मालूम है?
  • كَفَرَ – इनकार किया, झुठलाया
  • بِآيَاتِنَا – हमारी आयतों (निशानियों और प्रमाणों) को
  • لَأُوتَيَنَّ – मुझे अवश्य दिया जाएगा (मैं ज़रूर पाऊँगा)
  • مَالًا – धन-दौलत
  • وَلَدًا – और संतान (बेटे)

विस्तृत तफ़सीर:

ऐ नबी! क्या आपने उस इंसान की हालत पर ग़ौर किया जो हमारी आयतों को झुठलाता है और हमारे दिए हुए सबूतों से इनकार करता है? ये वो शख्स है जो आख़िरत के अज़ाब को मज़ाक़ समझता है और बड़े घमंड के साथ कहता है कि "अगर मैं मरने के बाद दोबारा उठाया भी गया तो मुझे वहाँ भी खूब माल-दौलत और औलाद मिलेगी।"

ये आयत उस शख्स के बारे में नाज़िल हुई जो हँसी-मज़ाक़ करते हुए क़ियामत के दिन का इनकार करता था और कहता था कि अगर सच में मुझे दोबारा ज़िंदा किया गया तो मेरे पास वहाँ भी धन और बच्चे होंगे। उसका ख़याल था कि दुनिया में जैसे उसे माल और औलाद मिली हुई है, वैसे ही आख़िरत में भी उसे ये सब कुछ मिल जाएगा।

ये बड़ी अजीब बात है कि इंसान अपने रब की आयतों को झुठलाए, क़ियामत के दिन का इनकार करे, और फिर भी ये उम्मीद रखे कि उसे आख़िरत में इज़्ज़त और दौलत मिलेगी! ये कैसी मूर्खता है कि इंसान उस रब को न माने जो उसे पैदा करने वाला है, और फिर भी उससे अच्छी चीज़ों की उम्मीद रखे?

इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखा रहे हैं कि जो लोग हक़ को झुठलाते हैं और आख़िरत का इनकार करते हैं, उनकी ये उम्मीदें और ख़्वाब सिर्फ़ धोखा हैं। असल कामयाबी उसी को मिलेगी जो अल्लाह पर ईमान लाए, उसकी आयतों पर यक़ीन करे और अच्छे काम करे।

प्यारे भाइयों और बहनों! ये आयत हमें बताती है कि दुनिया की दौलत और औलाद कोई बड़ी चीज़ नहीं है। असली इज़्ज़त अल्लाह के पास है। जो इंसान अल्लाह की नाफ़रमानी करता है और उसकी आयतों को झुठलाता है, उसे चाहे दुनिया में कितना ही माल-दौलत मिल जाए, आख़िरत में उसका कोई हिस्सा नहीं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की आयतों पर ईमान लाएँ, उन पर अमल करें और उन्हें झुठलाने वालों के अंजाम से सबक़ सीखें। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 75-79 — मरियम

75قُلْ مَن كَانَ فِي الضَّلَالَةِ فَلْيَمْدُدْ لَهُ الرَّحْمَٰنُ مَدًّا ۚ حَتَّىٰ إِذَا رَأَوْا مَا يُوعَدُونَ إِمَّا الْعَذَابَ وَإِمَّا السَّاعَةَ فَسَيَعْلَمُونَ مَنْ هُوَ شَرٌّ مَّكَانًا وَأَضْعَفُ جُندًا
(ऐ रसूल) कह दो कि जो शख्स गुमराही में पड़ा है तो खुदा उसको ढ़ील ही देता चला जाता है यहाँ तक कि उस चीज़ को (अपनी ऑंखों से) देख लेंगे जिनका उनसे वायदा किया गया है या अज़ाब या क़यामत तो उस वक्त उन्हें मालूम हो जाएगा कि मरतबे में कौन बदतर है और लश्कर (जत्थे) में कौन कमज़ोर है (बेकस) है
76وَيَزِيدُ اللَّهُ الَّذِينَ اهْتَدَوْا هُدًى ۗ وَالْبَاقِيَاتُ الصَّالِحَاتُ خَيْرٌ عِندَ رَبِّكَ ثَوَابًا وَخَيْرٌ مَّرَدًّا
और जो लोग राहे रास्त पर हैं खुदा उनकी हिदायत और ज्यादा करता जाता है और बाक़ी रह जाने वाली नेकियाँ तुम्हारे परवरदिगार के नज़दीक सवाब की राह से भी बेहतर है और अन्जाम के ऐतबार से (भी) बेहतर है
77أَفَرَأَيْتَ الَّذِي كَفَرَ بِآيَاتِنَا وَقَالَ لَأُوتَيَنَّ مَالًا وَوَلَدًا
(ऐ रसूल) क्या तुमने उस शख्स पर भी नज़र की जिसने हमारी आयतों से इन्कार किया और कहने लगा कि (अगर क़यामत हुईतो भी) मुझे माल और औलाद ज़रूर मिलेगी
78أَطَّلَعَ الْغَيْبَ أَمِ اتَّخَذَ عِندَ الرَّحْمَٰنِ عَهْدًا
क्या उसे ग़ैब का हाल मालूम हो गया है या उसने खुदा से कोई अहद (व पैमान) ले रखा है हरग़िज नहीं
79كَلَّا ۚ سَنَكْتُبُ مَا يَقُولُ وَنَمُدُّ لَهُ مِنَ الْعَذَابِ مَدًّا
जो कुछ ये बकता है (सब) हम सभी से लिखे लेते हैं और उसके लिए और ज्यादा अज़ाब बढ़ाते हैं
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अनुवाद — मरियम 77

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सूरा आयत 77/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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