Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَفَرَأَيْتَ – क्या आपने देखा / क्या आपको मालूम है?
- كَفَرَ – इनकार किया, झुठलाया
- بِآيَاتِنَا – हमारी आयतों (निशानियों और प्रमाणों) को
- لَأُوتَيَنَّ – मुझे अवश्य दिया जाएगा (मैं ज़रूर पाऊँगा)
- مَالًا – धन-दौलत
- وَلَدًا – और संतान (बेटे)
विस्तृत तफ़सीर:
ऐ नबी! क्या आपने उस इंसान की हालत पर ग़ौर किया जो हमारी आयतों को झुठलाता है और हमारे दिए हुए सबूतों से इनकार करता है? ये वो शख्स है जो आख़िरत के अज़ाब को मज़ाक़ समझता है और बड़े घमंड के साथ कहता है कि "अगर मैं मरने के बाद दोबारा उठाया भी गया तो मुझे वहाँ भी खूब माल-दौलत और औलाद मिलेगी।"
ये आयत उस शख्स के बारे में नाज़िल हुई जो हँसी-मज़ाक़ करते हुए क़ियामत के दिन का इनकार करता था और कहता था कि अगर सच में मुझे दोबारा ज़िंदा किया गया तो मेरे पास वहाँ भी धन और बच्चे होंगे। उसका ख़याल था कि दुनिया में जैसे उसे माल और औलाद मिली हुई है, वैसे ही आख़िरत में भी उसे ये सब कुछ मिल जाएगा।
ये बड़ी अजीब बात है कि इंसान अपने रब की आयतों को झुठलाए, क़ियामत के दिन का इनकार करे, और फिर भी ये उम्मीद रखे कि उसे आख़िरत में इज़्ज़त और दौलत मिलेगी! ये कैसी मूर्खता है कि इंसान उस रब को न माने जो उसे पैदा करने वाला है, और फिर भी उससे अच्छी चीज़ों की उम्मीद रखे?
इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखा रहे हैं कि जो लोग हक़ को झुठलाते हैं और आख़िरत का इनकार करते हैं, उनकी ये उम्मीदें और ख़्वाब सिर्फ़ धोखा हैं। असल कामयाबी उसी को मिलेगी जो अल्लाह पर ईमान लाए, उसकी आयतों पर यक़ीन करे और अच्छे काम करे।
प्यारे भाइयों और बहनों! ये आयत हमें बताती है कि दुनिया की दौलत और औलाद कोई बड़ी चीज़ नहीं है। असली इज़्ज़त अल्लाह के पास है। जो इंसान अल्लाह की नाफ़रमानी करता है और उसकी आयतों को झुठलाता है, उसे चाहे दुनिया में कितना ही माल-दौलत मिल जाए, आख़िरत में उसका कोई हिस्सा नहीं। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की आयतों पर ईमान लाएँ, उन पर अमल करें और उन्हें झुठलाने वालों के अंजाम से सबक़ सीखें। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 75-79 — सूरा मरियम
अनुवाद — मरियम 77
सूरा मरियम आयत 77 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) क्या तुमने उस शख्स पर भी नज़र की…सूरा आयत 77/98 — सूरा मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा मरियम सुनें, सूरा मरियम अनुवाद, सूरा मरियम mp3, सूरा मरियम pdf. आयत 75–79. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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