मरियम · 87/98
अनुवाद उच्चारण — मरियम
لَّا يَمْلِكُونَ الشَّفَاعَةَ إِلَّا مَنِ اتَّخَذَ عِندَ الرَّحْمَٰنِ عَهْدًا ۝٨٧
Laa yamlikoonash shafaa`ta illaa manittakhaza `indar Rahmaani `ahdaa
📖 हिंदी अर्थ
(उस दिन) ये लोग सिफारिश पर भी क़ादिर न होंगे मगर (वहाँ) जिस शख्स ने ख़ुदा से (सिफारिश का) एक़रा ले लिया हो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَا يَمْلِكُونَ الشَّفَاعَةَ: वे (काफ़िर) किसी के लिए सिफ़ारिश करने का अधिकार नहीं रखते।
  • اتَّخَذَ عِندَ الرَّحْمَٰنِ عَهْدًا: जिसने रहमान (अल्लाह) के पास (ईमान और तौहीद का) वचन/अहद किया हो।

तफ़सीर:

यह आयत क़ियामत के दिन की एक अत्यंत महत्वपूर्ण हक़ीक़त बयान करती है। उस दिन कोई भी व्यक्ति किसी के लिए सिफ़ारिश (शफ़ाअत) करने का मालिक नहीं होगा, सिवाय उसके जिसने दुनिया में रहते हुए अल्लाह रहमान के साथ एक पक्का अहद किया हो—यानी ईमान लाया हो, उसकी वहदानिय्यत (एकता) को स्वीकार किया हो, और उसके रसूलों पर ईमान रखा हो। यह अहद सिर्फ़ ज़ुबानी नहीं, बल्कि दिल और अमल से होना चाहिए।

क़ुरआन करीम हमें बताता है कि क़ियामत के दिन काफ़िरों के पास कोई वसीला नहीं होगा, न उनकी कोई सिफ़ारिश क़ुबूल होगी और न ही उन्हें किसी की सिफ़ारिश का लाभ मिलेगा। लेकिन जो लोग दुनिया में अल्लाह से वादा करके गए—यानी ईमान, नेकी और अल्लाह के प्रति वफ़ादारी का अहद—उन्हीं के लिए उस दिन शफ़ाअत का दरवाज़ा खुलेगा, और वह भी सिर्फ़ अल्लाह की इजाज़त से, जैसा कि दूसरी आयतों में बताया गया है।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी देती है: अगर हम आज अल्लाह से सच्चा अहद कर लें—अपने ईमान को मज़बूत करें, अपने अमल को सुधारें, और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालें—तो यही अहद क़ियामत के दिन हमारे लिए सबसे बड़ा सहारा बनेगा। अल्लाह रहमान अपने बंदों पर इतना मेहरबान है कि उसने खुद ही यह रास्ता हमारे लिए आसान कर दिया है। वह चाहता है कि हम उसकी तरफ़ रुजू करें, उससे वादा करें और उस वादे पर क़ायम रहें।

तो आइए, हम आज ही अपने रहमान रब से यह अहद करें—सिर्फ़ उसी की इबादत करेंगे, सिर्फ़ उसी से मदद माँगेंगे, और अपनी पूरी ज़िंदगी उसकी रज़ा के लिए समर्पित कर देंगे। यही वह अहद है जो हमें उस महान दिन की मुश्किलों से बचाएगा और हमें उसकी रहमत के साये में ले जाएगा। अल्लाह हमें इस अहद पर साबित-क़दम रखे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 85-89 — मरियम

85يَوْمَ نَحْشُرُ الْمُتَّقِينَ إِلَى الرَّحْمَٰنِ وَفْدًا
कि जिस दिन परहेज़गारों को (खुदाए) रहमान के (अपने) सामने मेहमानों की तरह तरह जमा करेंगे
86وَنَسُوقُ الْمُجْرِمِينَ إِلَىٰ جَهَنَّمَ وِرْدًا
और गुनेहगारों को जहन्नुम की तरफ प्यासे (जानवरो की तरह हकाँएगे
87لَّا يَمْلِكُونَ الشَّفَاعَةَ إِلَّا مَنِ اتَّخَذَ عِندَ الرَّحْمَٰنِ عَهْدًا
(उस दिन) ये लोग सिफारिश पर भी क़ादिर न होंगे मगर (वहाँ) जिस शख्स ने ख़ुदा से (सिफारिश का) एक़रा ले लिया हो
88وَقَالُوا اتَّخَذَ الرَّحْمَٰنُ وَلَدًا
और (यहूदी) लोग कहते हैं कि खुदा ने (अज़ीज़ को) बेटा बना लिया है
89لَّقَدْ جِئْتُمْ شَيْئًا إِدًّا
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुमने इतनी बड़ी सख्त बात अपनी तरफ से गढ़ के की है
मरियमकुरान सूची
98आयत
मक्कीRevelation
87आयत

अनुवाद — मरियम 87

सूरा मरियम आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उस दिन) ये लोग सिफारिश पर भी क़ादिर न होंगे…

सूरा आयत 87/98 — मरियम مريم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: मरियम सुनें, मरियम अनुवाद, मरियम mp3, मरियम pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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