अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بَدِيعُ: रचयिता, ऐसा सृष्टिकर्ता जिसने बिना किसी पूर्व नमूने के सृष्टि का आविष्कार किया।
- السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ: आकाशों (आसमानों) और धरती।
- قَضَىٰ: आदेश दिया, निर्णय किया, तय कर दिया।
- أَمْرًا: कोई कार्य या वस्तु।
- كُن: हो जा।
- فَيَكُونُ: तो वह तुरंत हो जाती है।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ही आसमानों और ज़मीन का रचयिता है। उसने इन्हें इस तरह पैदा किया कि कोई पूर्व नमूना, कोई मिसाल या कोई सहायक मौजूद नहीं था। उसने हर चीज़ को अपनी कुदरत (शक्ति) से अद्भुत तरीके से अस्तित्व में लाया। जब वह किसी कार्य को करने का इरादा करता है, उसे तय कर लेता है, तो उसके लिए केवल इतना कहना काफी है: "हो जा" — और वह चीज़ तुरंत हो जाती है। उसके आदेश के आगे कोई रुकावट नहीं आती, न कोई देरी होती है, न किसी सहायता की जरूरत पड़ती है। यह अल्लाह की असीम शक्ति का प्रमाण है कि सृष्टि की हर चीज़ — चाहे वह आकाश हो, पृथ्वी हो, जीवन हो या मृत्यु — उसके एक शब्द "कुन" (हो जा) से पैदा हो जाती है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह की कुदरत पर विश्वास: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की शक्ति असीम है। वह जब चाहता है, जैसे चाहता है, पैदा कर देता है। उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है। यह विश्वास इंसान के दिल में अल्लाह के प्रति गहरा भरोसा पैदा करता है।
- सृष्टि की अद्भुत रचना पर चिंतन: आसमान और ज़मीन की रचना बिना किसी पूर्व नमूने के हुई है। यह हमें प्रकृति की ओर देखने, उस पर गौर करने और अल्लाह की बनाई हुई हर चीज़ में उसकी कारीगरी को पहचानने की प्रेरणा देती है।
- अल्लाह के आदेश के आगे सिर झुकाना: जब अल्लाह किसी चीज़ का फैसला कर लेता है, तो उसे कोई टाल नहीं सकता। यह हमें सिखाता है कि हमें अल्लाह के फैसलों पर संतुष्ट रहना चाहिए और उसके आदेशों का पालन करना चाहिए, क्योंकि उसका हर आदेश हिकमत (बुद्धिमत्ता) से भरा होता है।
- आशा और साहस: यह आयत मुसलमान को यह उम्मीद देती है कि जिस अल्लाह ने बिना किसी साधन के आसमान और ज़मीन पैदा कर दिए, वह उसकी हर मुश्किल को भी आसान कर सकता है। जब इंसान को यह यकीन हो जाए कि अल्लाह के लिए कुछ भी मुश्किल नहीं, तो उसके दिल से निराशा और हताशा दूर हो जाती है।
- तौहीद (एकेश्वरवाद) की पुष्टि: यह आयत साफ करती है कि सृष्टि का रचयिता, पालनहार और संचालक केवल अल्लाह है। उसके साथ किसी को साझीदार बनाना या किसी और से मदद माँगना बिल्कुल गलत है। यह हमें शिर्क (बहुदेववाद) से बचाकर खालिस अल्लाह की इबादत की ओर ले जाती है।
📜 आयत 115-119 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 117
सूरा अल-बकरा आयत 117 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (वही) आसमान व ज़मीन का मोजिद है और जब किसी…सूरा आयत 117/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 115–119. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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