अल-बकरा · 202/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
أُولَٰئِكَ لَهُمْ نَصِيبٌ مِّمَّا كَسَبُوا ۚ وَاللَّهُ سَرِيعُ الْحِسَابِ ۝٢٠٢
Ulaaa`ika lahum naseebum mimmaa kasaboo; wal laahu saree`ul hisaab
📖 हिंदी अर्थ
यही वह लोग हैं जिनके लिए अपनी कमाई का हिस्सा चैन है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَصِيبٌ: हिस्सा, भाग, प्रतिफल।
  • مِمَّا كَسَبُوا: उन कर्मों के कारण जो उन्होंने कमाए (अर्थात् अच्छे कर्म)।
  • سَرِيعُ الْحِسَابِ: हिसाब लेने में बहुत तेज़, जिसकी गति पलक झपकने से भी तेज़ है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन ईमानवालों के बारे में है जो दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई की दुआ माँगते हैं। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों के लिए उनके अच्छे कर्मों का बड़ा हिस्सा और प्रतिफल है। उन्होंने जो भी नेक काम किए—चाहे वह दुआ हो, इबादत हो, या कोई और अच्छा कर्म—उसका पूरा बदला उन्हें मिलेगा। दुआ को भी "कमाई" कहा गया है क्योंकि दुआ एक अच्छा कर्म है, और हर कर्म का फल उसी के अनुसार मिलता है। अल्लाह तआला हिसाब लेने में अत्यंत तेज़ है—वह किसी भी कर्म को भूलता नहीं, और उसका हिसाब इतनी जल्दी होता है कि पलक झपकने से भी पहले वह सब कुछ जान लेता है और बदला देने का फैसला कर लेता है। उसकी गिनती और हिसाब में कोई देरी नहीं होती, और वह हर बंदे के अच्छे और बुरे कर्मों को पूरी तरह से जानता है।

फ़ायदे (लाभ):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि अच्छे कर्म कभी बेकार नहीं जाते—चाहे वे छोटे हों या बड़े, अल्लाह उनका पूरा बदला देगा। इससे मुसलमान को अच्छे कर्म करने की प्रेरणा मिलती है।
  2. दुआ को भी एक कर्म और इबादत माना गया है, इसलिए हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई के लिए दुआ करनी चाहिए, और यह दुआ हमारे लिए नेकी का ज़रिया बनेगी।
  3. अल्लाह की "तेज़ हिसाब" वाली विशेषता हमें यह विश्वास दिलाती है कि अल्लाह न्याय करने में कभी देर नहीं करता—चाहे इंसाफ़ में देर लगे, लेकिन अल्लाह का इंसाफ़ तुरंत और पूर्ण होता है। इससे दिल को सुकून मिलता है कि कोई ज़ुल्म या अच्छाई अनदेखी नहीं रहेगी।
  4. यह आयत मुसलमान को यह भी सिखाती है कि वह अपने कर्मों का हिसाब खुद रखे, और हमेशा अच्छे कामों में लगा रहे, क्योंकि अल्लाह के पास हर चीज़ का हिसाब मौजूद है।
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📜 आयत 200-204 — अल-बकरा

200فَإِذَا قَضَيْتُم مَّنَاسِكَكُمْ فَاذْكُرُوا اللَّهَ كَذِكْرِكُمْ آبَاءَكُمْ أَوْ أَشَدَّ ذِكْرًا ۗ فَمِنَ النَّاسِ مَن يَقُولُ رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا وَمَا لَهُ فِي الْآخِرَةِ مِنْ خَلَاقٍ
फिर जब तुम अरक़ाने हज बजा ला चुको तो तुम इस तरह ज़िक्रे ख़ुदा करो जिस तरह तुम अपने बाप दादाओं का ज़िक्र करते हो बल्कि उससे बढ़ कर के फिर बाज़ लोग ऐसे हैं जो कहते हैं कि ऐ मेरे परवरदिगार हमको जो (देना है) दुनिया ही में दे दे हालाकि (फिर) आख़िरत में उनका कुछ हिस्सा नहीं
201وَمِنْهُم مَّن يَقُولُ رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الْآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ
और बाज़ बन्दे ऐसे हैं कि जो दुआ करते हैं कि ऐ मेरे पालने वाले मुझे दुनिया में नेअमत दे और आख़िरत में सवाब दे और दोज़ख़ की बाग से बचा
202أُولَٰئِكَ لَهُمْ نَصِيبٌ مِّمَّا كَسَبُوا ۚ وَاللَّهُ سَرِيعُ الْحِسَابِ
यही वह लोग हैं जिनके लिए अपनी कमाई का हिस्सा चैन है
203۞ وَاذْكُرُوا اللَّهَ فِي أَيَّامٍ مَّعْدُودَاتٍ ۚ فَمَن تَعَجَّلَ فِي يَوْمَيْنِ فَلَا إِثْمَ عَلَيْهِ وَمَن تَأَخَّرَ فَلَا إِثْمَ عَلَيْهِ ۚ لِمَنِ اتَّقَىٰ ۗ وَاتَّقُوا اللَّهَ وَاعْلَمُوا أَنَّكُمْ إِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
और ख़ुदा बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है (निस्फ़) और इन गिनती के चन्द दिनों तक (तो) ख़ुदा का ज़िक्र करो फिर जो शख्स जल्दी कर बैठै और (मिना) से और दो ही दिन में चल ख़ड़ा हो तो उस पर भी गुनाह नहीं है और जो (तीसरे दिन तक) ठहरा रहे उस पर भी कुछ गुनाह नही लेकिन यह रियायत उसके वास्ते है जो परहेज़गार हो, और खुदा से डरते रहो और यक़ीन जानो कि एक दिन तुम सब के सब उसकी तरफ क़ब्रों से उठाए जाओगे
204وَمِنَ النَّاسِ مَن يُعْجِبُكَ قَوْلُهُ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَيُشْهِدُ اللَّهَ عَلَىٰ مَا فِي قَلْبِهِ وَهُوَ أَلَدُّ الْخِصَامِ
ऐ रसूल बाज़ लोग मुनाफिक़ीन से ऐसे भी हैं जिनकी चिकनी चुपड़ी बातें (इस ज़रा सी) दुनयावी ज़िन्दगी में तुम्हें बहुत भाती है और वह अपनी दिली मोहब्बत पर ख़ुदा को गवाह मुक़र्रर करते हैं हालॉकि वह तुम्हारे दुश्मनों में सबसे ज्यादा झगड़ालू हैं
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अनुवाद — अल-बकरा 202

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Tuesday, August 18, 2026

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