अल-बकरा · 268/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
الشَّيْطَانُ يَعِدُكُمُ الْفَقْرَ وَيَأْمُرُكُم بِالْفَحْشَاءِ ۖ وَاللَّهُ يَعِدُكُم مَّغْفِرَةً مِّنْهُ وَفَضْلًا ۗ وَاللَّهُ وَاسِعٌ عَلِيمٌ ۝٢٦٨
Ash Shaitaanu ya`idukumul faqra wa yaamurukum bilfahshaaa`i wallaahu ya`idukum maghfiratam minhu wa fadlaa; wallaahu Waasi`un `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
शैतान तमुको तंगदस्ती से डराता है और बुरी बात (बुख्ल) का तुमको हुक्म करता है और ख़ुदा तुमसे अपनी बख्शिश और फ़ज़ल (व करम) का वायदा करता है और ख़ुदा बड़ी गुन्जाइश वाला और सब बातों का जानने वाला है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَعِدُكُمُ الْفَقْرَ: तुम्हें कंगाली (ग़रीबी) का डर दिखाता है।
  • بِالْفَحْشَاءِ: बुरे कामों की आज्ञा देता है, यहाँ अर्थ है कंजूसी और ख़ैरात (दान) रोकना।
  • مَغْفِرَةً: पापों की क्षमा।
  • فَضْلًا: अतिरिक्त रिज़्क़ और बरकत, ख़र्च किए हुए माल का बदला।
  • وَاسِعٌ: बहुत बड़ी क्षमता और दानशीलता वाला।
  • عَلِيمٌ: सब कुछ जानने वाला, हर नीयत और कर्म से अवगत।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मुसलमानों को दान (ख़ैरात) और अल्लाह के रास्ते में ख़र्च करने की प्रेरणा देती है, और उन्हें शैतान के वास्वसों से सावधान करती है। शैतान का काम है कि वह इंसान को ग़रीबी का डर दिखाए — वह कहता है कि अगर तुमने दान किया या ज़कात दी तो तुम कंगाल हो जाओगे, तुम्हारा माल ख़त्म हो जाएगा। इसी तरह वह इंसान को बुरे कामों की आज्ञा देता है, जैसे कंजूसी करना, अल्लाह के हुक्मों की अवहेलना करना, और गुनाह के कामों में लिप्त होना। यह सब शैतान की धोखेबाज़ी है।

इसके विपरीत, अल्लाह तआला अपने बंदों से वादा करता है कि जो लोग उसकी राह में ख़र्च करेंगे, उन्हें दो चीज़ें मिलेंगी: एक तो मग़फ़िरत — यानी उनके गुनाह माफ़ कर दिए जाएँगे, और दूसरी फ़ज़्ल — यानी अल्लाह उन्हें और भी ज़्यादा रिज़्क़ देगा, ख़र्च किए हुए माल की जगह और बेहतर चीज़ें अता करेगा। अल्लाह ने यह भी बताया कि वह वासेअ (बहुत बड़ी क्षमता वाला) है — उसके ख़ज़ाने कभी ख़त्म नहीं होते, और वह अलीम (सब कुछ जानने वाला) है — वह जानता है कि बंदा किस नीयत से ख़र्च करता है, क्या सच्चे दिल से करता है और क्या दिखावे के लिए। इसलिए उसका इनाम भी उसी के अनुसार मिलेगा।

फ़ायदे (सबक़):

  1. शैतान हमेशा इंसान को अल्लाह के रास्ते से रोकने की कोशिश करता है — वह डर और लालच दोनों का इस्तेमाल करता है। हमें उसके वास्वसों से बचना चाहिए और अल्लाह के वादे पर भरोसा करना चाहिए।
  2. दान करने से माल कम नहीं होता, बल्कि अल्लाह उसकी जगह और बरकत देता है। यह एक इलाही वादा है जो कभी नहीं टूटता।
  3. अल्लाह की रहमत बहुत विशाल है — वह चाहता है कि हमारे गुनाह माफ़ हों और हमें और ज़्यादा रिज़्क़ मिले। यह उसकी महान दानशीलता का सबूत है।
  4. हमें अपने ख़र्च और दान में सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा का ख़याल रखना चाहिए, क्योंकि वह हर नीयत को जानता है और उसी के अनुसार इनाम देता है।
  5. यह आयत हमें सिखाती है कि कंजूसी और बुरे कामों से दूर रहें, और अल्लाह पर भरोसा करके खुलकर ख़र्च करें — यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 266-270 — अल-बकरा

266أَيَوَدُّ أَحَدُكُمْ أَن تَكُونَ لَهُ جَنَّةٌ مِّن نَّخِيلٍ وَأَعْنَابٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ لَهُ فِيهَا مِن كُلِّ الثَّمَرَاتِ وَأَصَابَهُ الْكِبَرُ وَلَهُ ذُرِّيَّةٌ ضُعَفَاءُ فَأَصَابَهَا إِعْصَارٌ فِيهِ نَارٌ فَاحْتَرَقَتْ ۗ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآيَاتِ لَعَلَّكُمْ تَتَفَكَّرُونَ
भला तुम में कोई भी इसको पसन्द करेगा कि उसके लिए खजूरों और अंगूरों का एक बाग़ हो उसके नीचे नहरें जारी हों और उसके लिए उसमें तरह तरह के मेवे हों और (अब) उसको बुढ़ापे ने घेर लिया है और उसके (छोटे छोटे) नातवॉ कमज़ोर बच्चे हैं कि एकबारगी उस बाग़ पर ऐसा बगोला आ पड़ा जिसमें आग (भरी) थी कि वह बाग़ जल भुन कर रह गया ख़ुदा अपने एहकाम को तुम लोगों से साफ़ साफ़ बयान करता है ताकि तुम ग़ौर करो
267يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَنفِقُوا مِن طَيِّبَاتِ مَا كَسَبْتُمْ وَمِمَّا أَخْرَجْنَا لَكُم مِّنَ الْأَرْضِ ۖ وَلَا تَيَمَّمُوا الْخَبِيثَ مِنْهُ تُنفِقُونَ وَلَسْتُم بِآخِذِيهِ إِلَّا أَن تُغْمِضُوا فِيهِ ۚ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ حَمِيدٌ
ऐ ईमान वालों अपनी पाक कमाई और उन चीज़ों में से जो हमने तुम्हारे लिए ज़मीन से पैदा की हैं (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करो और बुरे माल को (ख़ुदा की राह में) देने का क़सद भी न करो हालॉकि अगर ऐसा माल कोई तुमको देना चाहे तो तुम अपनी ख़ुशी से उसके लेने वाले नहीं हो मगर ये कि उस (के लेने) में (अमदन) आंख चुराओ और जाने रहो कि ख़ुदा बेशक बेनियाज़ (और) सज़ावारे हम्द है
268الشَّيْطَانُ يَعِدُكُمُ الْفَقْرَ وَيَأْمُرُكُم بِالْفَحْشَاءِ ۖ وَاللَّهُ يَعِدُكُم مَّغْفِرَةً مِّنْهُ وَفَضْلًا ۗ وَاللَّهُ وَاسِعٌ عَلِيمٌ
शैतान तमुको तंगदस्ती से डराता है और बुरी बात (बुख्ल) का तुमको हुक्म करता है और ख़ुदा तुमसे अपनी बख्शिश और फ़ज़ल (व करम) का वायदा करता है और ख़ुदा बड़ी गुन्जाइश वाला और सब बातों का जानने वाला है
269يُؤْتِي الْحِكْمَةَ مَن يَشَاءُ ۚ وَمَن يُؤْتَ الْحِكْمَةَ فَقَدْ أُوتِيَ خَيْرًا كَثِيرًا ۗ وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّا أُولُو الْأَلْبَابِ
वह जिसको चाहता है हिकमत अता फ़रमाता है और जिसको (ख़ुदा की तरफ) से हिकमत अता की गई तो इसमें शक नहीं कि उसे ख़ूबियों से बड़ी दौलत हाथ लगी और अक्लमन्दों के सिवा कोई नसीहत मानता ही नहीं
270وَمَا أَنفَقْتُم مِّن نَّفَقَةٍ أَوْ نَذَرْتُم مِّن نَّذْرٍ فَإِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُهُ ۗ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
और तुम जो कुछ भी ख़र्च करो या कोई मन्नत मानो ख़ुदा उसको ज़रूर जानता है और (ये भी याद रहे) कि ज़ालिमों का (जो) ख़ुदा का हक़ मार कर औरों की नज़्र करते हैं (क़यामत में) कोई मददगार न होगा
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
268आयत

अनुवाद — अल-बकरा 268

सूरा अल-बकरा आयत 268 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : शैतान तमुको तंगदस्ती से डराता है और बुरी बात (बुख्ल)…

सूरा आयत 268/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 266–270. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए