अल-बकरा · 269/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
يُؤْتِي الْحِكْمَةَ مَن يَشَاءُ ۚ وَمَن يُؤْتَ الْحِكْمَةَ فَقَدْ أُوتِيَ خَيْرًا كَثِيرًا ۗ وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّا أُولُو الْأَلْبَابِ ۝٢٦٩
Yu`til Hikmata mai yashaaa`; wa mai yutal Hikmata faqad ootiya khairan kaseeraa; wa maa yazzakkaru illaaa ulul albaab
📖 हिंदी अर्थ
वह जिसको चाहता है हिकमत अता फ़रमाता है और जिसको (ख़ुदा की तरफ) से हिकमत अता की गई तो इसमें शक नहीं कि उसे ख़ूबियों से बड़ी दौलत हाथ लगी और अक्लमन्दों के सिवा कोई नसीहत मानता ही नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अल-हिक्मा (الحكمة): सही बात कहने और सही काम करने की समझ, उपयोगी ज्ञान, और दीन की गहरी समझ।
  • उलुल-अल्बाब (أولو الألباب): बुद्धिमान और समझदार लोग, जो अक्ल से काम लेते हैं और अल्लाह की निशानियों से सबक लेते हैं।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने बंदों में से जिसे चाहता है, हिक्मत (समझ और सही फैसले की क्षमता) अता करता है। यह हिक्मत सिर्फ दुनियावी ज्ञान नहीं है, बल्कि दीन की समझ, अच्छे और बुरे में फर्क करने की क्षमता, और हर मामले में सही रास्ता चुनने की तौफीक है। जिसे अल्लाह यह हिक्मत देता है, उसे बेशक बहुत बड़ी भलाई मिल जाती है—ऐसी भलाई जो दुनिया के सारे खज़ानों से बेहतर है। यह वह नेमत है जो इंसान को दुनिया और आखिरत दोनों में कामयाब बनाती है।

यहाँ अल्लाह तआला हमें बताता है कि हिक्मत उसके हाथ में है, वह जिसे चाहे देता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह से हिक्मत की दुआ करें और उसके दिए हुए ज्ञान को अपने अमल में लाएँ। जिसे यह नेमत मिली, उसने असल में सब कुछ पा लिया—चाहे उसके पास दुनिया का माल कम ही क्यों न हो। और जिसे यह नेमत नहीं मिली, वह दुनिया का सारा माल पाकर भी खाली हाथ है।

फिर अल्लाह फरमाता है कि इस बात से सबक सिर्फ वही लोग लेते हैं जो अक्लमंद हैं, जो अपनी बुद्धि को अल्लाह की रोशनी से रोशन करते हैं। यानी जिनके दिल खुले हैं और जो अल्लाह की आयतों पर गौर करते हैं। ऐसे लोग ही हिक्मत की कद्र करते हैं और उसे पाने की कोशिश करते हैं।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि असली कामयाबी दौलत या ओहदे में नहीं है, बल्कि अल्लाह की दी हुई समझ और हिक्मत में है। जब हम कुरान और सुन्नत की रोशनी में जीना सीख जाएँ, तो हमारे फैसले सही होंगे, हमारी ज़ुबान सच्ची होगी और हमारे काम नेक होंगे। यही वह चीज़ है जो हमें जन्नत तक पहुँचाती है। अल्लाह से दुआ करें कि वह हमें हिक्मत अता करे और हमें उन लोगों में शामिल करे जो सुनते हैं और सबक लेते हैं। याद रखें, जो लोग अक्ल से काम लेते हैं और अल्लाह की तरफ रुजू करते हैं, वही असल में दुनिया और आखिरत की भलाई पाते हैं।



📜 आयत 267-271 — अल-बकरा

267يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَنفِقُوا مِن طَيِّبَاتِ مَا كَسَبْتُمْ وَمِمَّا أَخْرَجْنَا لَكُم مِّنَ الْأَرْضِ ۖ وَلَا تَيَمَّمُوا الْخَبِيثَ مِنْهُ تُنفِقُونَ وَلَسْتُم بِآخِذِيهِ إِلَّا أَن تُغْمِضُوا فِيهِ ۚ وَاعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ غَنِيٌّ حَمِيدٌ
ऐ ईमान वालों अपनी पाक कमाई और उन चीज़ों में से जो हमने तुम्हारे लिए ज़मीन से पैदा की हैं (ख़ुदा की राह में) ख़र्च करो और बुरे माल को (ख़ुदा की राह में) देने का क़सद भी न करो हालॉकि अगर ऐसा माल कोई तुमको देना चाहे तो तुम अपनी ख़ुशी से उसके लेने वाले नहीं हो मगर ये कि उस (के लेने) में (अमदन) आंख चुराओ और जाने रहो कि ख़ुदा बेशक बेनियाज़ (और) सज़ावारे हम्द है
268الشَّيْطَانُ يَعِدُكُمُ الْفَقْرَ وَيَأْمُرُكُم بِالْفَحْشَاءِ ۖ وَاللَّهُ يَعِدُكُم مَّغْفِرَةً مِّنْهُ وَفَضْلًا ۗ وَاللَّهُ وَاسِعٌ عَلِيمٌ
शैतान तमुको तंगदस्ती से डराता है और बुरी बात (बुख्ल) का तुमको हुक्म करता है और ख़ुदा तुमसे अपनी बख्शिश और फ़ज़ल (व करम) का वायदा करता है और ख़ुदा बड़ी गुन्जाइश वाला और सब बातों का जानने वाला है
269يُؤْتِي الْحِكْمَةَ مَن يَشَاءُ ۚ وَمَن يُؤْتَ الْحِكْمَةَ فَقَدْ أُوتِيَ خَيْرًا كَثِيرًا ۗ وَمَا يَذَّكَّرُ إِلَّا أُولُو الْأَلْبَابِ
वह जिसको चाहता है हिकमत अता फ़रमाता है और जिसको (ख़ुदा की तरफ) से हिकमत अता की गई तो इसमें शक नहीं कि उसे ख़ूबियों से बड़ी दौलत हाथ लगी और अक्लमन्दों के सिवा कोई नसीहत मानता ही नहीं
270وَمَا أَنفَقْتُم مِّن نَّفَقَةٍ أَوْ نَذَرْتُم مِّن نَّذْرٍ فَإِنَّ اللَّهَ يَعْلَمُهُ ۗ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ
और तुम जो कुछ भी ख़र्च करो या कोई मन्नत मानो ख़ुदा उसको ज़रूर जानता है और (ये भी याद रहे) कि ज़ालिमों का (जो) ख़ुदा का हक़ मार कर औरों की नज़्र करते हैं (क़यामत में) कोई मददगार न होगा
271إِن تُبْدُوا الصَّدَقَاتِ فَنِعِمَّا هِيَ ۖ وَإِن تُخْفُوهَا وَتُؤْتُوهَا الْفُقَرَاءَ فَهُوَ خَيْرٌ لَّكُمْ ۚ وَيُكَفِّرُ عَنكُم مِّن سَيِّئَاتِكُمْ ۗ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرٌ
अगर ख़ैरात को ज़ाहिर में दो तो यह (ज़ाहिर करके देना) भी अच्छा है और अगर उसको छिपाओ और हाजतमन्दों को दो तो ये छिपा कर देना तुम्हारे हक़ में ज्यादा बेहतर है और ऐसे देने को ख़ुदा तुम्हारे गुनाहों का कफ्फ़ारा कर देगा और जो कुछ तुम करते हो ख़ुदा उससे ख़बरदार है
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अनुवाद — अल-बकरा 269

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Tuesday, August 18, 2026

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