अल-बकरा · 73/286
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-बकरा
فَقُلْنَا اضْرِبُوهُ بِبَعْضِهَا ۚ كَذَٰلِكَ يُحْيِي اللَّهُ الْمَوْتَىٰ وَيُرِيكُمْ آيَاتِهِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ ۝٧٣
Faqulnad riboohu biba`dihaa; kazaalika yuhyil laa hul mawtaa wa yureekum aayaatihee la`allakum ta`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
खुदा को उसका ज़ाहिर करना मंजूर था पस हमने कहा कि उस गाय को कोई टुकड़ा लेकर इस (की लाश) पर मारो यूँ खुदा मुर्दे को ज़िन्दा करता है और तुम को अपनी कुदरत की निशानियाँ दिखा देता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • اضْرِبُوهُ: उसे मारो (अर्थात उस मृत व्यक्ति के शरीर के किसी हिस्से पर मारो)
  • بِبَعْضِهَا: उस (गाय) के किसी हिस्से से
  • يُحْيِي: जीवित करता है
  • آيَاتِهِ: अपनी निशानियाँ (चमत्कार)
  • تَعْقِلُونَ: तुम समझो / बुद्धि से काम लो

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत बनी इसराईल के उस ऐतिहासिक वाक़िये की ओर इशारा करती है जब उनमें एक हत्या हो गई थी और हत्यारे का पता नहीं चल रहा था। अल्लाह ने उन्हें एक गाय ज़बह करने का हुक्म दिया, और जब उन्होंने वह गाय ज़बह की, तो अल्लाह ने फ़रमाया: "उस मृत व्यक्ति को गाय के किसी हिस्से से मारो।" जब उन्होंने ऐसा किया, तो अल्लाह की क़ुदरत से वह मुर्दा ज़िंदा हो गया और उसने अपने क़ातिल का नाम बता दिया। यह अल्लाह की ताक़त का एक ज़बरदस्त नमूना था।

इसी तरह, जिस तरह अल्लाह ने उस मुर्दे को ज़िंदा किया, उसी तरह वह क़ियामत के दिन सभी मुर्दों को ज़िंदा करेगा। अल्लाह तआला यह आयतें और निशानियाँ इसलिए दिखाता है ताकि लोग अपनी अक़्ल से सोचें, समझें और यक़ीन करें कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, और उसकी इबादत करें, उसकी नाफ़रमानी से बचें।


फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की क़ुदरत पर ईमान: यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के लिए मुर्दों को ज़िंदा करना बिल्कुल आसान है। जो अल्लाह किसी मुर्दे को दुनिया में ज़िंदा कर सकता है, वह क़ियामत के दिन सबको ज़िंदा करके ज़रूर हिसाब लेगा।
  2. अक़्ल और दिमाग़ का इस्तेमाल: अल्लाह ने इंसान को अक़्ल दी है ताकि वह अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करे। जो लोग अक़्ल से काम लेते हैं, वे सच्चाई तक पहुँचते हैं और ईमान की रोशनी पाते हैं।
  3. हक़ की तलाश: बनी इसराईल को हत्यारे का पता लगाने के लिए अल्लाह ने एक अजीब तरीक़ा दिखाया। इससे सबक मिलता है कि सच्चाई चाहे कितनी भी छिपी हो, अल्लाह उसे ज़ाहिर करने की तदबीर करता है। इंसान को चाहिए कि वह हक़ की तलाश में लगा रहे।
  4. आख़िरत पर यक़ीन: यह वाक़िया आख़िरत के दिन पर ईमान को मज़बूत करता है। जो लोग मरने के बाद जी उठने पर शक करते हैं, उनके लिए यह एक सबक़ है कि अल्लाह की क़ुदरत के आगे कुछ भी नामुमकिन नहीं।
  5. इस्लाम की पूर्णता: इस आयत से पता चलता है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि हर मामले में इंसान को रहनुमाई देता है — चाहे वह इंसानी ज़िंदगी के सबसे पेचीदा मसले ही क्यों न हों।


📜 आयत 71-75 — सूरा अल-बकरा

71قَالَ إِنَّهُ يَقُولُ إِنَّهَا بَقَرَةٌ لَّا ذَلُولٌ تُثِيرُ الْأَرْضَ وَلَا تَسْقِي الْحَرْثَ مُسَلَّمَةٌ لَّا شِيَةَ فِيهَا ۚ قَالُوا الْآنَ جِئْتَ بِالْحَقِّ ۚ فَذَبَحُوهَا وَمَا كَادُوا يَفْعَلُونَ
मूसा ने कहा खुदा ज़रूर फरमाता है कि वह गाय न तो इतनी सधाई हो कि ज़मीन जोते न खेती सीचें भली चंगी एक रंग की कि उसमें कोई धब्बा तक न हो, वह बोले अब (जा के) ठीक-ठीक बयान किया, ग़रज़ उन लोगों ने वह गाय हलाल की हालाँकि उनसे उम्मीद न थी वह कि वह ऐसा करेंगे
72وَإِذْ قَتَلْتُمْ نَفْسًا فَادَّارَأْتُمْ فِيهَا ۖ وَاللَّهُ مُخْرِجٌ مَّا كُنتُمْ تَكْتُمُونَ
और जब एक शख्स को मार डाला और तुममें उसकी बाबत फूट पड़ गई एक दूसरे को क़ातिल बताने लगा जो तुम छिपाते थे
73فَقُلْنَا اضْرِبُوهُ بِبَعْضِهَا ۚ كَذَٰلِكَ يُحْيِي اللَّهُ الْمَوْتَىٰ وَيُرِيكُمْ آيَاتِهِ لَعَلَّكُمْ تَعْقِلُونَ
खुदा को उसका ज़ाहिर करना मंजूर था पस हमने कहा कि उस गाय को कोई टुकड़ा लेकर इस (की लाश) पर मारो यूँ खुदा मुर्दे को ज़िन्दा करता है और तुम को अपनी कुदरत की निशानियाँ दिखा देता है
74ثُمَّ قَسَتْ قُلُوبُكُم مِّن بَعْدِ ذَٰلِكَ فَهِيَ كَالْحِجَارَةِ أَوْ أَشَدُّ قَسْوَةً ۚ وَإِنَّ مِنَ الْحِجَارَةِ لَمَا يَتَفَجَّرُ مِنْهُ الْأَنْهَارُ ۚ وَإِنَّ مِنْهَا لَمَا يَشَّقَّقُ فَيَخْرُجُ مِنْهُ الْمَاءُ ۚ وَإِنَّ مِنْهَا لَمَا يَهْبِطُ مِنْ خَشْيَةِ اللَّهِ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغَافِلٍ عَمَّا تَعْمَلُونَ
ताकि तुम समझो फिर उसके बाद तुम्हारे दिल सख्त हो गये पस वह मिसल पत्थर के (सख्त) थे या उससे भी ज्यादा करख्त क्योंकि पत्थरों में बाज़ तो ऐसे होते हैं कि उनसे नहरें जारी हो जाती हैं और बाज़ ऐसे होते हैं कि उनमें दरार पड़ जाती है और उनमें से पानी निकल पड़ता है और बाज़ पत्थर तो ऐसे होते हैं कि खुदा के ख़ौफ से गिर पड़ते हैं और जो कुछ तुम कर रहे हो उससे खुदा ग़ाफिल नहीं है
75۞ أَفَتَطْمَعُونَ أَن يُؤْمِنُوا لَكُمْ وَقَدْ كَانَ فَرِيقٌ مِّنْهُمْ يَسْمَعُونَ كَلَامَ اللَّهِ ثُمَّ يُحَرِّفُونَهُ مِن بَعْدِ مَا عَقَلُوهُ وَهُمْ يَعْلَمُونَ
(मुसलमानों) क्या तुम ये लालच रखते हो कि वह तुम्हारा (सा) ईमान लाएँगें हालाँकि उनमें का एक गिरोह (साबिक़ में) ऐसा था कि खुदा का कलाम सुनाता था और अच्छी तरह समझने के बाद उलट फेर कर देता था हालाँकि वह खूब जानते थे और जब उन लोगों से मुलाक़ात करते हैं
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीअवतरण स्थान
73आयत

अनुवाद — अल-बकरा 73

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Tuesday, September 29, 2026

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