अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا تَظْمَأُ – तुम्हें प्यास नहीं लगेगी।
- وَلَا تَضْحَى – और न ही तुम धूप की गर्मी से प्रभावित होगे (अर्थात् तुम्हें धूप की तपिश नहीं सताएगी)।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत जन्नत की उन नेअमतों (अनुग्रहों) का वर्णन कर रही है जो अल्लाह तआला ने हज़रत आदम (अलैहिस्सलाम) से वादा किया था, और यही वादा मोमिनों के लिए भी है। अल्लाह फ़रमाता है कि जन्नत में तुम्हें कभी प्यास नहीं लगेगी, न ही तुम्हें धूप की गर्मी का सामना करना पड़ेगा। यानी जन्नत की आबो-हवा इतनी खुशगवार और मुकम्मल होगी कि वहाँ न भूख होगी, न प्यास, न गर्मी की तकलीफ़, न सर्दी का अज़ाब। जन्नत के लोग हमेशा ठंडी छाँव में रहेंगे, जहाँ न सूरज की तपिश होगी और न ही कोई परेशानी। यह अल्लाह की उस महान नेअमत की तस्वीर है जो उसने अपने नेक बंदों के लिए तैयार की है — एक ऐसी जगह जहाँ हर किस्म की राहत और सुकून मिलेगा, और हर दुख-दर्द से पाक होगी।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें जन्नत की उस लज़्ज़त और सुकून की याद दिलाती है जो अल्लाह ने अपने वफ़ादार बंदों के लिए रखी है। जब हम दुनिया की गर्मी, प्यास, मेहनत और थकान से परेशान होते हैं, तो यह आयत हमें उम्मीद देती है कि अल्लाह की रहमत का खज़ाना बहुत बड़ा है। जो लोग अल्लाह की राह में सब्र करते हैं, उनके लिए ऐसी जगह है जहाँ हर तकलीफ़ खत्म हो जाएगी। यह हमें अपने रब की तरफ़ रुजू करने, उसकी इबादत करने और उसके दिए हुए हुक्मों पर चलने की तरग़ीब देती है, ताकि हम उस अनमोल इनाम के हक़दार बन सकें। जन्नत की यह नेअमत सिर्फ़ आदम (अलैहिस्सलाम) के लिए नहीं थी, बल्कि हर उस मोमिन के लिए है जो अल्लाह और उसके रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर ईमान रखता है और नेक अमल करता है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि उस दिन हम भी उन लोगों में शामिल हों जिन्हें यह हमेशा की राहत और सुकून नसीब होगा।
📜 आयत 117-121 — ताहा
अनुवाद — ताहा 119
सूरा ताहा आयत 119 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और न यहाँ प्यासे रहोगे और न धूप खाओगेसूरा आयत 119/135 — ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: ताहा सुनें, ताहा अनुवाद, ताहा mp3, ताहा pdf. आयत 117–121. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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