ताहा · 21/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
قَالَ خُذْهَا وَلَا تَخَفْ ۖ سَنُعِيدُهَا سِيرَتَهَا الْأُولَىٰ ۝٢١
Qaala khuzhaa wa laa ta khaf sanu`eeduhaa seeratahal oolaa
📖 हिंदी अर्थ
तो फ़रमाया कि तुम इसको पकड़ लो और डरो नहीं मैं अभी इसकी पहली सी सूरत फिर किए देता हूँ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • خُذْهَا: इसे पकड़ लो।
  • وَلَا تَخَفْ: और डरो मत।
  • سَنُعِيدُهَا: हम इसे वापस लौटा देंगे।
  • سِيرَتَهَا الْأُولَىٰ: अपनी पहली अवस्था (यानी लाठी) में।

तफ़सीर:

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी लाठी ज़मीन पर फेंकी, तो अल्लाह के इशारे से वह एक बड़ा साँप बन गई। यह देखकर मूसा (अलैहिस्सलाम) डर गए और पीछे हटने लगे। तब अल्लाह तआला ने उन्हें आश्वस्त करते हुए फ़रमाया: "इसे पकड़ लो और डरो मत।" यह अल्लाह की क़ुदरत का एक नमूना था, जो उन्हें दिखाया जा रहा था ताकि वे फ़िरऔन के सामने इस मो'जिज़े को पेश कर सकें। अल्लाह ने वादा किया कि जैसे ही वे इसे पकड़ेंगे, यह फिर से अपनी पहली हालत यानी लाठी में वापस आ जाएगी। यह एक बड़ी तसल्ली और निशानी थी कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, और उसके हुक्म से चीज़ें अपनी असल हालत में लौट आती हैं।

यहाँ अल्लाह ने मूसा (अलैहिस्सलाम) को सिखाया कि जब अल्लाह किसी काम का हुक्म देता है, तो उस पर भरोसा रखना चाहिए और डरना नहीं चाहिए। डर सिर्फ़ अल्लाह से होना चाहिए, और जब अल्लाह ख़ुद कहे कि "डरो मत", तो मोमिन का दिल पूरी तरह से सुकून पा जाता है। यह वाक़िया हमें सिखाता है कि अल्लाह पर भरोसा करने वाले को कभी निराश नहीं होना पड़ता, और अल्लाह अपने बंदों की हिफ़ाज़त करता है।

इस आयत में एक और बात सीखने को मिलती है कि अल्लाह के मो'जिज़े उसकी क़ुदरत के दिखावे होते हैं, और वे बंदे को उसकी ताक़त और रहमत का एहसास कराते हैं। मूसा (अलैहिस्सलाम) के लिए यह एक अज़ीम तरबियत थी कि वे फ़िरऔन के सामने जाने से पहले अल्लाह की क़ुदरत को अपनी आँखों से देख लें, ताकि उनका दिल मज़बूत हो जाए और वे किसी से न डरें। यही वजह है कि अल्लाह ने उन्हें यह मो'जिज़ा दिखाया और फिर फ़रमाया कि इसे पकड़ो, क्योंकि यह तुम्हारे लिए एक निशानी है।

हमें भी अपनी ज़िंदगी में यह सबक लेना चाहिए कि जब अल्लाह किसी मुश्किल काम के लिए हमें तैयार करता है, तो वह हमें ताक़त और हिम्मत भी देता है। हमें सिर्फ़ उस पर भरोसा रखना है और उसके हुक्म के आगे सर झुकाना है। अल्लाह अपने बंदों को कभी अकेला नहीं छोड़ता, और हर मुश्किल में उनके साथ होता है। यही ईमान की असली रूह है — कि अल्लाह पर पूरा यक़ीन रखो, और उसके वादों पर भरोसा करो।



📜 आयत 19-23 — सूरा ताहा

19قَالَ أَلْقِهَا يَا مُوسَىٰ
फ़रमाया ऐ मूसा उसको ज़रा ज़मीन पर डाल तो दो मूसा ने उसे डाल दिया
20فَأَلْقَاهَا فَإِذَا هِيَ حَيَّةٌ تَسْعَىٰ
तो फ़ौरन वह साँप बनकर दौड़ने लगा (ये देखकर मूसा भागे)
21قَالَ خُذْهَا وَلَا تَخَفْ ۖ سَنُعِيدُهَا سِيرَتَهَا الْأُولَىٰ
तो फ़रमाया कि तुम इसको पकड़ लो और डरो नहीं मैं अभी इसकी पहली सी सूरत फिर किए देता हूँ
22وَاضْمُمْ يَدَكَ إِلَىٰ جَنَاحِكَ تَخْرُجْ بَيْضَاءَ مِنْ غَيْرِ سُوءٍ آيَةً أُخْرَىٰ
और अपने हाथ को समेंट कर अपने बग़ल में तो कर लो (फिर देखो कि) वह बग़ैर किसी बीमारी के सफेद चमकता दमकता हुआ निकलेगा ये दूसरा मौजिज़ा है
23لِنُرِيَكَ مِنْ آيَاتِنَا الْكُبْرَى
(ये) ताकि हम तुमको अपनी (कुदरत की) बड़ी-बड़ी निशानियाँ दिखाएँ
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
21आयत

अनुवाद — ताहा 21

सूरा ताहा आयत 21 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो फ़रमाया कि तुम इसको पकड़ लो और डरो नहीं…

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Saturday, October 3, 2026

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