ताहा · 66/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
قَالَ بَلْ أَلْقُوا ۖ فَإِذَا حِبَالُهُمْ وَعِصِيُّهُمْ يُخَيَّلُ إِلَيْهِ مِن سِحْرِهِمْ أَنَّهَا تَسْعَىٰ ۝٦٦
Qaala bal alqoo fa izaa hibaaluhum wa `isiyyuhum yuhaiyalu ilaihi min sihrihim annahaa tas`aa
📖 हिंदी अर्थ
मूसा ने कहा (मैं नहीं डालूँगा) बल्कि तुम ही पहले डालो (ग़रज़ उन्होंने अपने करतब दिखाए) तो बस मूसा को उनके जादू (के ज़ोर से) ऐसा मालूम हुआ कि उनकी रस्सियाँ और उनकी छड़ियाँ दौड़ रही हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • حِبَال — रस्सियाँ (बहुवचन)
  • عِصِيّ — लाठियाँ (बहुवचन)
  • يُخَيَّلُ — ख़याल पैदा किया जाता है, भ्रम डाला जाता है
  • تَسْعَى — दौड़ती हैं, तेज़ी से चलती हैं

तफ़सीर:

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने जादूगरों से कहा कि "पहले तुम अपना जादू दिखाओ", तो उन्होंने अपनी रस्सियाँ और लाठियाँ मैदान में डाल दीं। उनके जादू के ज़ोर से मूसा (अलैहिस्सलाम) को ऐसा प्रतीत हुआ कि वे रस्सियाँ और लाठियाँ साँप बनकर तेज़ी से दौड़ रही हैं और इधर-उधर चल रही हैं। यह उनके जादू का ही असर था, क्योंकि असल में वे रस्सियाँ और लाठियाँ ही थीं, लेकिन जादू के ज़रिये उन्होंने लोगों की आँखों में ऐसा भ्रम पैदा कर दिया था कि वे जीवित साँपों की तरह दिखाई देने लगीं।

यहाँ अल्लाह तआला हमें बताते हैं कि जादूगरों ने अपनी पूरी ताक़त लगा दी थी, और उनका जादू इतना प्रभावशाली था कि मूसा (अलैहिस्सलाम) जैसे महान नबी को भी उसका ख़याल हुआ। लेकिन यह सिर्फ़ एक इम्तिहान था, ताकि सच और झूठ का फ़र्क़ साफ़ हो जाए और अल्लाह की क़ुदरत का जलवा सबके सामने आए।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि बातिल (झूठ) चाहे कितना ही तेज़ दिखाई दे, लेकिन वह हक़ (सच) के सामने टिक नहीं सकता। अल्लाह पर भरोसा रखने वालों को कभी निराश नहीं होना चाहिए, चाहे मुश्किलें कितनी ही बड़ी क्यों न हों। जादू और नुमाइश की चमक-दमक कुछ देर के लिए लोगों को धोखा दे सकती है, लेकिन अल्लाह की मदद और उसकी ताक़त हमेशा सच्चे लोगों के साथ होती है।

यह दृश्य हमें बताता है कि जब सच्चाई और ईमान की ताक़त सामने आती है, तो बातिल की सारी नुमाइश बेकार हो जाती है। मूसा (अलैहिस्सलाम) को भले ही पल भर के लिए ख़याल हुआ, लेकिन अल्लाह ने उन्हें सुकून दिया और उनके दिल को मज़बूत किया, क्योंकि उन्हें यक़ीन था कि अल्लाह की मदद ज़रूर आएगी।



📜 आयत 64-68 — सूरा ताहा

64فَأَجْمِعُوا كَيْدَكُمْ ثُمَّ ائْتُوا صَفًّا ۚ وَقَدْ أَفْلَحَ الْيَوْمَ مَنِ اسْتَعْلَىٰ
तो तुम भी खूब अपने चलत्तर (जादू वग़ैरह) दुरूस्त कर लो फिर परा (सफ़) बाँध के (उनके मुक़ाबले में) आ पड़ो और जो आज डर रहा हो वही फायज़ुलहराम रहा
65قَالُوا يَا مُوسَىٰ إِمَّا أَن تُلْقِيَ وَإِمَّا أَن نَّكُونَ أَوَّلَ مَنْ أَلْقَىٰ
ग़रज़ जादूगरों ने कहा (ऐ मूसा) या तो तुम ही (अपने जादू) फेंको और या ये कि पहले जो जादू फेंके वह हम ही हों
66قَالَ بَلْ أَلْقُوا ۖ فَإِذَا حِبَالُهُمْ وَعِصِيُّهُمْ يُخَيَّلُ إِلَيْهِ مِن سِحْرِهِمْ أَنَّهَا تَسْعَىٰ
मूसा ने कहा (मैं नहीं डालूँगा) बल्कि तुम ही पहले डालो (ग़रज़ उन्होंने अपने करतब दिखाए) तो बस मूसा को उनके जादू (के ज़ोर से) ऐसा मालूम हुआ कि उनकी रस्सियाँ और उनकी छड़ियाँ दौड़ रही हैं
67فَأَوْجَسَ فِي نَفْسِهِ خِيفَةً مُّوسَىٰ
तो मूसा ने अपने दिल में कुछ दहशत सी पाई
68قُلْنَا لَا تَخَفْ إِنَّكَ أَنتَ الْأَعْلَىٰ
हमने कहा (मूसा) इस से डरो नहीं यक़ीनन तुम ही वर रहोगे
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
66आयत

अनुवाद — ताहा 66

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Friday, October 2, 2026

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