अल-मोमिनुन · 113/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
قَالُوا لَبِثْنَا يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍ فَاسْأَلِ الْعَادِّينَ ۝١١٣
Qaaloo labisnaa yawman aw ba`da yawmin fas`alil `aaaddeen
📖 हिंदी अर्थ
वह कहेंगें (बरस कैसा) हम तो बस पूरा एक दिन रहे या एक दिन से भी कम
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَبِثْنَا: हम रुके / ठहरे।
  • يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍ: एक दिन या एक दिन का कुछ हिस्सा।
  • الْعَادِّينَ: गिनने वाले, हिसाब रखने वाले (फ़रिश्ते जो आयु और कर्मों का हिसाब रखते हैं)।

तफ़सीर:

जब अल्लाह तआला क़यामत के दिन काफ़िरों से पूछेगा कि तुम धरती पर कितने साल रहे, तो वे हौलनाक मंज़र और सख्त अज़ाब के सदमे में इतने घबराए हुए होंगे कि उन्हें अपनी पूरी ज़िंदगी की लंबाई याद नहीं रहेगी। वे जवाब देंगे: "हम सिर्फ एक दिन या उससे भी कम समय रहे।" यह जवाब उनकी उस हालत को बयान करता है जब इंसान सख्त मुसीबत में हो तो उसे वक़्त बहुत कम लगता है।

वे यह भी कहेंगे: "आप उन फ़रिश्तों से पूछ लीजिए जो हिसाब रखते हैं" — यानी वे खुद भी अपने ठहरने की मुद्दत के बारे में शक में होंगे, क्योंकि अज़ाब की शिद्दत ने उनकी समझ को मौहूश कर दिया होगा। यहाँ "आप पूछ लीजिए" कहने का मतलब यह नहीं कि अल्लाह को पता नहीं, बल्कि यह उनकी बेबसी और हैरानी का इज़हार है।

इस आयत से हमें सबक मिलता है कि दुनिया की ज़िंदगी चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, आख़िरत के सामने वह बिल्कुल मामूली और थोड़ी है। अल्लाह तआला ने कुरआन में कहीं और फ़रमाया: "जिस दिन वे इसे देखेंगे, ऐसा लगेगा कि वे दुनिया में सिर्फ एक शाम या एक सुबह रहे थे।" यह हमारे लिए चेतावनी है कि हम अपनी इस छोटी सी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत और नेक कामों में गुज़ारें, क्योंकि आख़िरत का हिसाब सख्त है और वहाँ हर पल हमारे सामने आएगा।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और इंसाफ़ पर भरोसा रखें, और याद रखें कि दुनिया की मुसीबतें और लज़्ज़तें दोनों फ़ानी हैं। जो लोग अल्लाह के हुक्मों पर चलेंगे, उनके लिए आख़िरत में ऐसी नेमतें हैं जो कभी ख़त्म नहीं होंगी, और जो ग़ाफ़िल रहे, उनके लिए पछतावे के सिवा कुछ नहीं। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 111-115 — अल-मोमिनुन

111إِنِّي جَزَيْتُهُمُ الْيَوْمَ بِمَا صَبَرُوا أَنَّهُمْ هُمُ الْفَائِزُونَ
मैने आज उनको उनके सब्र का अच्छा बदला दिया कि यही लोग अपनी (ख़ातिरख्वाह) मुराद को पहुँचने वाले हैं
112قَالَ كَمْ لَبِثْتُمْ فِي الْأَرْضِ عَدَدَ سِنِينَ
(फिर उनसे) ख़ुदा पूछेगा कि (आख़िर) तुम ज़मीन पर कितने बरस रहे
113قَالُوا لَبِثْنَا يَوْمًا أَوْ بَعْضَ يَوْمٍ فَاسْأَلِ الْعَادِّينَ
वह कहेंगें (बरस कैसा) हम तो बस पूरा एक दिन रहे या एक दिन से भी कम
114قَالَ إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا قَلِيلًا ۖ لَّوْ أَنَّكُمْ كُنتُمْ تَعْلَمُونَ
तो तुम शुमार करने वालों से पूछ लो ख़ुदा फरमाएगा बेशक तुम (ज़मीन में) बहुत ही कम ठहरे काश तुम (इतनी बात भी दुनिया में) समझे होते
115أَفَحَسِبْتُمْ أَنَّمَا خَلَقْنَاكُمْ عَبَثًا وَأَنَّكُمْ إِلَيْنَا لَا تُرْجَعُونَ
तो क्या तुम ये ख्याल करते हो कि हमने तुमको (यूँ ही) बेकार पैदा किया और ये कि तुम हमारे हुज़ूर में लौटा कर न लाए जाओगे
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
113आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 113

सूरा अल-मोमिनुन आयत 113 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह कहेंगें (बरस कैसा) हम तो बस पूरा एक दिन…

सूरा आयत 113/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 111–115. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए