अल-मोमिनुन · 59/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
وَالَّذِينَ هُم بِرَبِّهِمْ لَا يُشْرِكُونَ ۝٥٩
Wallazeena hum bi Rabbihim laa yushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
और अपने परवरदिगार का किसी को शरीक नही बनाते

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا يُشْرِكُونَ: वे शिर्क नहीं करते — अर्थात अल्लाह के साथ किसी को साझीदार नहीं बनाते, न प्रत्यक्ष (जाहिर) शिर्क और न ही छिपा हुआ (खुफिया) शिर्क।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन मोमिनों के गुणों का वर्णन कर रही है जो सच्चे ईमानवाले हैं और जिन्हें अल्लाह की ओर से सफलता और जन्नत का वादा मिला है। अल्लाह तआला फरमाता है कि ये लोग वे हैं जो अपने रब के साथ किसी को शिर्क नहीं करते। यानी वे अपनी इबादत, दुआ, उम्मीद, डर, और सारे कार्यों को सिर्फ अल्लाह के लिए खालिस करते हैं। वे न तो किसी मूर्ति की पूजा करते हैं, न किसी नबी, वली, फरिश्ते या किसी और को अल्लाह का साझीदार बनाते हैं।

यहाँ "शिर्क" से मुराद सिर्फ बड़ा और प्रत्यक्ष शिर्क ही नहीं है, बल्कि छिपा हुआ शिर्क (जैसे रिया — लोगों को दिखाने के लिए अच्छे काम करना) भी शामिल है। सच्चे मोमिन अपने दिलों को हर उस चीज़ से पाक रखते हैं जो अल्लाह की इबादत में किसी और को शामिल करे। वे जानते हैं कि अल्लाह ही असली मालिक है, सुनने वाला है, देखने वाला है, और सारी क़ुदरत उसी के हाथ में है। इसलिए वे अपनी हर ज़रूरत सिर्फ उसी से माँगते हैं और उसी के आगे सिर झुकाते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की असली मज़बूती तौहीद (अल्लाह की एकता) में है। जिस दिल में तौहीद की रोशनी होती है, वहाँ शिर्क का अंधेरा कभी नहीं आ सकता। अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी ﷺ को भी हिदायत दी कि वे कहें: "मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं अल्लाह की इबादत करूँ, उसके साथ किसी को शिर्क न करूँ।" (सूरह राद: 36)

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें भी अपने दिलों को शिर्क से पाक रखना चाहिए। शिर्क सिर्फ मूर्ति पूजा का नाम नहीं है, बल्कि किसी इंसान, रस्म, या दुनियावी चीज़ को अल्लाह के बराबर या उससे बढ़कर अहमियत देना भी शिर्क है। आइए हम अपनी नीयतों को सुधारें, अपने अमल को खालिस अल्लाह के लिए करें, और उससे वादा करें कि हम ज़िंदगी के हर मोड़ पर सिर्फ अल्लाह के बताए रास्ते पर चलेंगे। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा, जहाँ कोई दर्द, कोई ग़म और कोई खौफ़ नहीं होगा। अल्लाह हम सबको शिर्क से बचाए और तौहीद पर साबित क़दम रखे। आमीन।



📜 आयत 57-61 — सूरा अल-मोमिनुन

57إِنَّ الَّذِينَ هُم مِّنْ خَشْيَةِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَ
उसमें शक नहीं कि जो लोग अपने परवरदिगार की वहशत से लरज़ रहे है
58وَالَّذِينَ هُم بِآيَاتِ رَبِّهِمْ يُؤْمِنُونَ
और जो लोग अपने परवरदिगार की (क़ुदरत की) निशानियों पर ईमान रखते हैं
59وَالَّذِينَ هُم بِرَبِّهِمْ لَا يُشْرِكُونَ
और अपने परवरदिगार का किसी को शरीक नही बनाते
60وَالَّذِينَ يُؤْتُونَ مَا آتَوا وَّقُلُوبُهُمْ وَجِلَةٌ أَنَّهُمْ إِلَىٰ رَبِّهِمْ رَاجِعُونَ
और जो लोग (ख़ुदा की राह में) जो कुछ बन पड़ता है देते हैं और फिर उनके दिल को इस बात का खटका लगा हुआ है कि उन्हें अपने परवरदिगार के सामने लौट कर जाना है
61أُولَٰئِكَ يُسَارِعُونَ فِي الْخَيْرَاتِ وَهُمْ لَهَا سَابِقُونَ
(देखिये क्या होता है) यही लोग अलबत्ता नेकियों में जल्दी करते हैं और भलाई की तरफ (दूसरों से) लपक के आगे बढ़ जाते हैं
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
59आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 59

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Thursday, October 1, 2026

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