Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا يُشْرِكُونَ: वे शिर्क नहीं करते — अर्थात अल्लाह के साथ किसी को साझीदार नहीं बनाते, न प्रत्यक्ष (जाहिर) शिर्क और न ही छिपा हुआ (खुफिया) शिर्क।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन मोमिनों के गुणों का वर्णन कर रही है जो सच्चे ईमानवाले हैं और जिन्हें अल्लाह की ओर से सफलता और जन्नत का वादा मिला है। अल्लाह तआला फरमाता है कि ये लोग वे हैं जो अपने रब के साथ किसी को शिर्क नहीं करते। यानी वे अपनी इबादत, दुआ, उम्मीद, डर, और सारे कार्यों को सिर्फ अल्लाह के लिए खालिस करते हैं। वे न तो किसी मूर्ति की पूजा करते हैं, न किसी नबी, वली, फरिश्ते या किसी और को अल्लाह का साझीदार बनाते हैं।
यहाँ "शिर्क" से मुराद सिर्फ बड़ा और प्रत्यक्ष शिर्क ही नहीं है, बल्कि छिपा हुआ शिर्क (जैसे रिया — लोगों को दिखाने के लिए अच्छे काम करना) भी शामिल है। सच्चे मोमिन अपने दिलों को हर उस चीज़ से पाक रखते हैं जो अल्लाह की इबादत में किसी और को शामिल करे। वे जानते हैं कि अल्लाह ही असली मालिक है, सुनने वाला है, देखने वाला है, और सारी क़ुदरत उसी के हाथ में है। इसलिए वे अपनी हर ज़रूरत सिर्फ उसी से माँगते हैं और उसी के आगे सिर झुकाते हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान की असली मज़बूती तौहीद (अल्लाह की एकता) में है। जिस दिल में तौहीद की रोशनी होती है, वहाँ शिर्क का अंधेरा कभी नहीं आ सकता। अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी ﷺ को भी हिदायत दी कि वे कहें: "मुझे हुक्म दिया गया है कि मैं अल्लाह की इबादत करूँ, उसके साथ किसी को शिर्क न करूँ।" (सूरह राद: 36)
प्यारे भाइयों और बहनों! हमें भी अपने दिलों को शिर्क से पाक रखना चाहिए। शिर्क सिर्फ मूर्ति पूजा का नाम नहीं है, बल्कि किसी इंसान, रस्म, या दुनियावी चीज़ को अल्लाह के बराबर या उससे बढ़कर अहमियत देना भी शिर्क है। आइए हम अपनी नीयतों को सुधारें, अपने अमल को खालिस अल्लाह के लिए करें, और उससे वादा करें कि हम ज़िंदगी के हर मोड़ पर सिर्फ अल्लाह के बताए रास्ते पर चलेंगे। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाएगा, जहाँ कोई दर्द, कोई ग़म और कोई खौफ़ नहीं होगा। अल्लाह हम सबको शिर्क से बचाए और तौहीद पर साबित क़दम रखे। आमीन।
📜 आयत 57-61 — सूरा अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 59
सूरा अल-मोमिनुन आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अपने परवरदिगार का किसी को शरीक नही बनातेसूरा आयत 59/118 — सूरा अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मोमिनुन सुनें, सूरा अल-मोमिनुन अनुवाद, सूरा अल-मोमिनुन mp3, सूरा अल-मोमिनुन pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मोमिनुन
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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