अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَعُوذُ: मैं पनाह माँगता हूँ, शरण चाहता हूँ।
- يَحْضُرُونِ: वे मेरे पास आएँ, मेरे सामने उपस्थित हों (अर्थात् शैतान मेरे किसी काम में, किसी हालत में मेरे पास आएँ)।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! आप कहें: "ऐ मेरे रब! मैं तेरी पनाह चाहता हूँ कि शैतान मेरे किसी भी मामले में, किसी भी हालत में मेरे पास आएँ — चाहे वह मेरी इबादत में, मेरे कामों में, मेरे सोने-जागने में, यहाँ तक कि मेरी मृत्यु के समय भी मेरे पास न आएँ और मुझे बुराई की ओर न झुकाएँ।"
यह दुआ हमें सिखाती है कि शैतान का खतरा हर वक़्त और हर हालत में होता है। वह इंसान के पास आकर उसके दिल में बुरे ख़यालात डालता है, उसे ग़लत रास्ते पर ले जाने की कोशिश करता है, और उसे सच्चाई से दूर करने की फ़िराक़ में रहता है। इसलिए हमें हर वक़्त अल्लाह की पनाह माँगते रहना चाहिए।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह से सीधे माँगना चाहिए, क्योंकि वही सबसे बड़ा रक्षक है। जब हम उससे पनाह माँगते हैं, तो वह हमें शैतान के वस्वसों (बुरे ख़यालात) से बचाता है। यह दुआ हमारे लिए ढाल की तरह है — जो भी मुसलमान इसे पढ़ता है, वह शैतान के हमलों से महफ़ूज़ रहता है।
इसलिए हमें चाहिए कि हम इस दुआ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, ख़ासकर उन वक़्तों में जब हम कोई अहम काम करने वाले हों, या जब हमें लगे कि बुरे ख़यालात हमारे दिल में आ रहे हैं। अल्लाह से पनाह माँगना ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है, और यही वह रास्ता है जो हमें शैतान की बुराइयों से बचाकर अल्लाह की रहमत की तरफ़ ले जाता है।
📜 आयत 96-100 — सूरा अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 98
सूरा अल-मोमिनुन आयत 98 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ मेरे परवरदिगार इससे भी तेरी पनाह माँगता हूँ…सूरा आयत 98/118 — सूरा अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मोमिनुन सुनें, सूरा अल-मोमिनुन अनुवाद, सूरा अल-मोमिनुन mp3, सूरा अल-मोमिनुन pdf. आयत 96–100. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 7, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








