अल-मोमिनुन · 98/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ أَن يَحْضُرُونِ ۝٩٨
Wa a`oozu bika Rabbi ai-yahduroon
📖 हिंदी अर्थ
और ऐ मेरे परवरदिगार इससे भी तेरी पनाह माँगता हूँ कि शयातीन मेरे पास आएँ
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَعُوذُ: मैं पनाह माँगता हूँ, शरण चाहता हूँ।
  • يَحْضُرُونِ: वे मेरे पास आएँ, मेरे सामने उपस्थित हों (अर्थात् शैतान मेरे किसी काम में, किसी हालत में मेरे पास आएँ)।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे नबी! आप कहें: "ऐ मेरे रब! मैं तेरी पनाह चाहता हूँ कि शैतान मेरे किसी भी मामले में, किसी भी हालत में मेरे पास आएँ — चाहे वह मेरी इबादत में, मेरे कामों में, मेरे सोने-जागने में, यहाँ तक कि मेरी मृत्यु के समय भी मेरे पास न आएँ और मुझे बुराई की ओर न झुकाएँ।"

यह दुआ हमें सिखाती है कि शैतान का खतरा हर वक़्त और हर हालत में होता है। वह इंसान के पास आकर उसके दिल में बुरे ख़यालात डालता है, उसे ग़लत रास्ते पर ले जाने की कोशिश करता है, और उसे सच्चाई से दूर करने की फ़िराक़ में रहता है। इसलिए हमें हर वक़्त अल्लाह की पनाह माँगते रहना चाहिए।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह से सीधे माँगना चाहिए, क्योंकि वही सबसे बड़ा रक्षक है। जब हम उससे पनाह माँगते हैं, तो वह हमें शैतान के वस्वसों (बुरे ख़यालात) से बचाता है। यह दुआ हमारे लिए ढाल की तरह है — जो भी मुसलमान इसे पढ़ता है, वह शैतान के हमलों से महफ़ूज़ रहता है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम इस दुआ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, ख़ासकर उन वक़्तों में जब हम कोई अहम काम करने वाले हों, या जब हमें लगे कि बुरे ख़यालात हमारे दिल में आ रहे हैं। अल्लाह से पनाह माँगना ही हमारी सबसे बड़ी ताक़त है, और यही वह रास्ता है जो हमें शैतान की बुराइयों से बचाकर अल्लाह की रहमत की तरफ़ ले जाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 96-100 — अल-मोमिनुन

96ادْفَعْ بِالَّتِي هِيَ أَحْسَنُ السَّيِّئَةَ ۚ نَحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَصِفُونَ
और बुरी बात के जवाब में ऐसी बात कहो जो निहायत अच्छी हो जो कुछ ये लोग (तुम्हारी निस्बत) बयान करते हैं उससे हम ख़ूब वाक़िफ हैं
97وَقُل رَّبِّ أَعُوذُ بِكَ مِنْ هَمَزَاتِ الشَّيَاطِينِ
और (ये भी) दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले मै शैतान के वसवसों से तेरी पनाह माँगता हूँ
98وَأَعُوذُ بِكَ رَبِّ أَن يَحْضُرُونِ
और ऐ मेरे परवरदिगार इससे भी तेरी पनाह माँगता हूँ कि शयातीन मेरे पास आएँ
99حَتَّىٰ إِذَا جَاءَ أَحَدَهُمُ الْمَوْتُ قَالَ رَبِّ ارْجِعُونِ
(और कुफ्फ़ार तो मानेगें नहीं) यहाँ तक कि जब उनमें से किसी को मौत आयी तो कहने लगे परवरदिगार तू मुझे (एक बार) उस मुक़ाम (दुनिया) में छोड़ आया हूँ फिर वापस कर दे ताकि मै (अपकी दफ़ा) अच्छे अच्छे काम करूं
100لَعَلِّي أَعْمَلُ صَالِحًا فِيمَا تَرَكْتُ ۚ كَلَّا ۚ إِنَّهَا كَلِمَةٌ هُوَ قَائِلُهَا ۖ وَمِن وَرَائِهِم بَرْزَخٌ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ
(जवाब दिया जाएगा) हरगिज़ नहीं ये एक लग़ो बात है- जिसे वह बक रहा और उनके (मरने के) बाद (आलमे) बरज़ख़ है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
98आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 98

सूरा अल-मोमिनुन आयत 98 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ऐ मेरे परवरदिगार इससे भी तेरी पनाह माँगता हूँ…

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Tuesday, August 18, 2026

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