अश-शुआरा · 148/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
وَزُرُوعٍ وَنَخْلٍ طَلْعُهَا هَضِيمٌ ۝١٤٨
Wa zuroo inw wa nakhlin tal `uhaa hadeem
📖 हिंदी अर्थ
उन्हीं मे तुम लोग इतमिनान से (हमेशा के लिए) छोड़ दिए जाओगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • तल्अ (طَلْع): खजूर के पेड़ में निकलने वाला पहला फल या उसका गुच्छा।
  • हदीम (هَضِيم): नरम, लचीला, पका हुआ और तोड़ने में आसान।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने अपने नबी शुऐब अलैहिस्सलाम की क़ौम को उनकी उन नेअमतों की याद दिलाई जो उन्हें दी गई थीं, ताकि वे शुक्र अदा करें और अल्लाह की इबादत पर क़ायम रहें। उन नेअमतों में से एक यह थी कि उन्हें हरे-भरे खेत, लहलहाती फ़सलें और खजूर के ऐसे बाग़ दिए गए जिनके फल नरम, पके हुए, लचीले और तोड़ने में आसान होते थे। यह उनके लिए रिज़्क़ और आराम का सामान था।

यह आयत उस महान कृपा को बयान करती है जो अल्लाह ने अपने बंदों पर की — उन्हें ज़मीन से अनाज, फल और खजूर जैसी चीज़ें उगाकर दीं, जो उनकी ज़िंदगी की बुनियादी ज़रूरतें पूरी करती हैं। खजूर का ज़िक्र ख़ास तौर पर इसलिए किया गया क्योंकि यह अरब के लोगों का मुख्य भोजन था और उनकी आर्थिक स्थिति का आधार था। "तल्अ" से मुराद खजूर का वह हिस्सा है जो सबसे पहले निकलता है, और उसे "हदीम" कहा गया यानी वह इतना नरम और लचीला होता है कि आसानी से तोड़ा जा सकता है और खाने में बेहद लज़ीज़ होता है।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह की नेअमतों को पहचानना चाहिए और उनका सही इस्तेमाल करना चाहिए। जब अल्लाह किसी को खेत, फसलें, बाग़ और अच्छा रिज़्क़ देता है, तो उसे चाहिए कि वह अल्लाह का शुक्र अदा करे, उसकी इबादत करे और अपनी नेअमतों में ग़रीबों और ज़रूरतमंदों का हक़ अदा करे। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि दुनिया की ये नेअमतें हमेशा रहने वाली नहीं हैं — ये आज़माइश का ज़रिया हैं, इसलिए इन पर घमंड न करें और न ही इन्हें ही सब कुछ समझ लें। अल्लाह की रहमत और उसकी मग़फिरत ही असली कामयाबी है। जो लोग इन नेअमतों को पाकर अल्लाह से ग़ाफ़िल हो जाते हैं, वे बड़े नुक़सान में हैं। हमें चाहिए कि हर नेअमत पर अल्लाह का शुक्र अदा करें और उसकी तरफ़ रुजू करें, क्योंकि अल्लाह ही है जो रिज़्क़ देता है और वही उसे रोकने पर भी क़ादिर है।



📜 आयत 146-150 — सूरा अश-शुआरा

146أَتُتْرَكُونَ فِي مَا هَاهُنَا آمِنِينَ
क्या जो चीजें यहाँ (दुनिया में) मौजूद है
147فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ
बाग़ और चश्में और खेतिया और छुहारे जिनकी कलियाँ लतीफ़ व नाज़ुक होती है
148وَزُرُوعٍ وَنَخْلٍ طَلْعُهَا هَضِيمٌ
उन्हीं मे तुम लोग इतमिनान से (हमेशा के लिए) छोड़ दिए जाओगे
149وَتَنْحِتُونَ مِنَ الْجِبَالِ بُيُوتًا فَارِهِينَ
और (इस वजह से) पूरी महारत और तकलीफ के साथ पहाड़ों को काट काट कर घर बनाते हो
150فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
तो ख़ुदा से डरो और मेरी इताअत करो
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
148आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 148

सूरा अश-शुआरा आयत 148 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उन्हीं मे तुम लोग इतमिनान से (हमेशा के लिए) छोड़…

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Friday, October 2, 2026

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