अश-शुआरा · 207/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
مَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يُمَتَّعُونَ ۝٢٠٧
Maaa aghnaaa `anhum maa kaanoo yumaatoo`oon
📖 हिंदी अर्थ
तो जिन चीज़ों से ये लोग चैन किया करते थे कुछ भी काम न आएँगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا أَغْنَى: क्या फायदा पहुँचाया, क्या काम आया।
  • يُمَتَّعُونَ: वे आनंद उठाते थे, सुख-सुविधाएँ प्राप्त करते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने सच्चाई को ठुकराया और अपनी दुनियावी खुशियों में मग्न रहे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जब उनका अंजाम आएगा, तो वे दुनिया में जो लंबी उम्र पाते रहे, जो आराम और सुख-सुविधाएँ उठाते रहे, वह सब कुछ उनके किसी काम न आएगा। न वह उन्हें अल्लाह के अज़ाब से बचा सकेगा, न उनकी मुश्किलें हल कर सकेगा।

दुनिया की ये नेमतें और ऐश-ओ-आराम की ज़िंदगी, जिस पर वे इतना नाज़ करते थे, जब अल्लाह का फैसला आएगा तो वह सब बेकार हो जाएगी। यानी उनका वह सारा माल-ओ-दौलत, उनकी औलाद, उनकी ताकत और उनके सुख के साधन — कुछ भी उन्हें अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकते।

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी सीख देती है कि यह दुनिया की ज़िंदगी और इसके सुख-साधन क्षणभंगुर हैं। इन पर भरोसा करके अल्लाह की नाफ़रमानी करना और उसके हुक्मों से मुँह मोड़ना सबसे बड़ी नादानी है। जो लोग सिर्फ दुनिया की चमक-दमक में खोए रहते हैं, वे भूल जाते हैं कि एक दिन उन्हें अपने किए का हिसाब देना है।

इसलिए हमें चाहिए कि हम दुनिया की नेमतों का सही इस्तेमाल करें, अल्लाह का शुक्र अदा करें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक बनाएँ। याद रखें, अल्लाह की रहमत और उसकी मग़फिरत ही असली कामयाबी है, न कि दुनिया के अस्थायी सुख। जो लोग इस हकीकत को समझ जाएँ और अपनी ज़िंदगी को सुधार लें, वही सच्चे कामयाब हैं। अल्लाह तआला हम सबको यह समझ और अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 205-209 — अश-शुआरा

205أَفَرَأَيْتَ إِن مَّتَّعْنَاهُمْ سِنِينَ
तो क्या तुमने ग़ौर किया कि अगर हम उनको सालो साल चैन करने दे
206ثُمَّ جَاءَهُم مَّا كَانُوا يُوعَدُونَ
उसके बाद जिस (अज़ाब) का उनसे वायदा किया जाता है उनके पास आ पहुँचे
207مَا أَغْنَىٰ عَنْهُم مَّا كَانُوا يُمَتَّعُونَ
तो जिन चीज़ों से ये लोग चैन किया करते थे कुछ भी काम न आएँगी
208وَمَا أَهْلَكْنَا مِن قَرْيَةٍ إِلَّا لَهَا مُنذِرُونَ
और हमने किसी बस्ती को बग़ैर उसके हलाक़ नहीं किया कि उसके समझाने को (पहले से) डराने वाले (पैग़म्बर भेज दिए) थे
209ذِكْرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَالِمِينَ
और हम ज़ालिम नहीं है
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अनुवाद — अश-शुआरा 207

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Tuesday, August 18, 2026

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