अश-शुआरा · 211/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
وَمَا يَنبَغِي لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ ۝٢١١
Wa maa yambaghee lahum wa maa yastatee`oon
📖 हिंदी अर्थ
और ये काम न तो उनके लिए मुनासिब था और न वह कर सकते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مَا يَنبَغِي لَهُمْ: उनके लिए उचित नहीं है, उनके शान के खिलाफ है।
  • مَا يَسْتَطِيعُونَ: वे इसकी सामर्थ्य नहीं रखते, वे ऐसा करने पर क़ादिर नहीं हैं।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उन मुशरिकीन के झूठे दावे का खंडन कर रहे हैं जो कहते थे कि यह क़ुरआन शैतानों द्वारा लाया गया है। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि यह क़ुरआन शैतानों के लिए न तो उचित है और न ही वे इसे ला सकते हैं।

शैतानों का काम तो बुराई, फ़साद और गुमराही फैलाना है, जबकि क़ुरआन हिदायत, रहमत और नूर का खज़ाना है। यह किताब इतनी पाक और बुलंद है कि शैतानों की गिरती हुई हस्ती इसके पास भी नहीं फटक सकती। अल्लाह ने शैतानों को आसमान की तरफ़ सुनने से रोक दिया है, उन पर शहाब (आग के गोले) फेंके जाते हैं, इसलिए वे फ़रिश्तों की बातचीत सुन ही नहीं सकते। जब वे आसमानी खबरें ही नहीं सुन सकते, तो फिर वे ऐसी किताब कैसे ला सकते हैं जो सबसे बड़ी आसमानी खबर है?

यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन अल्लाह की ओर से उतरी हुई सबसे सच्ची और पाक किताब है। जिस तरह शैतान इसके पास नहीं आ सकते, उसी तरह यह किताब हर उस इंसान के लिए रहनुमा है जो सच्चाई की तलाश में है। अल्लाह ने इस किताब को अपनी हिफ़ाज़त में रखा है, और इसकी हर आयत सच्चाई का सबूत है।

हमें चाहिए कि इस किताब को पढ़ें, समझें और अपनी ज़िंदगी में लागू करें। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुंचाता है और शैतान के वसवसों से बचाता है। अल्लाह तआला ने इस किताब को हमारी हिदायत के लिए उतारा है, और इसमें हर उस सवाल का जवाब है जो इंसान की ज़िंदगी से जुड़ा है। आओ, हम इस किताब को अपना साथी बनाएं और इसे अपने दिलों में बसाएं।



📜 आयत 209-213 — अश-शुआरा

209ذِكْرَىٰ وَمَا كُنَّا ظَالِمِينَ
और हम ज़ालिम नहीं है
210وَمَا تَنَزَّلَتْ بِهِ الشَّيَاطِينُ
और इस क़ुरान को शयातीन लेकर नाज़िल नही हुए
211وَمَا يَنبَغِي لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ
और ये काम न तो उनके लिए मुनासिब था और न वह कर सकते थे
212إِنَّهُمْ عَنِ السَّمْعِ لَمَعْزُولُونَ
बल्कि वह तो (वही के) सुनने से महरुम हैं
213فَلَا تَدْعُ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ فَتَكُونَ مِنَ الْمُعَذَّبِينَ
(ऐ रसूल) तुम ख़ुदा के साथ किसी दूसरे माबूद की इबादत न करो वरना तुम भी मुबतिलाए अज़ाब किए जाओगे
अश-शुआराकुरान सूची
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अनुवाद — अश-शुआरा 211

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Tuesday, August 18, 2026

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