अश-शुआरा · 212/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
إِنَّهُمْ عَنِ السَّمْعِ لَمَعْزُولُونَ ۝٢١٢
Innahum `anis sam`i lama`zooloon
📖 हिंदी अर्थ
बल्कि वह तो (वही के) सुनने से महरुम हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّمْعِ: आकाश से (फ़रिश्तों की बातचीत) सुनने का प्रयास करना, यानी चोरी-छिपे कान लगाना।
  • لَمَعْزُولُونَ: अलग कर दिए गए हैं, दूर हटा दिए गए हैं, हर तरफ से रोक दिए गए हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के झूठे दावे का खंडन करती है जो कहते थे कि यह क़ुरआन शैतानों द्वारा लाया गया है। अल्लाह तआला स्पष्ट कर रहे हैं कि यह बात बिल्कुल गलत और असंभव है। शैतानों का क़ुरआन लाना या उस तक पहुँचना कतई मुमकिन नहीं, क्योंकि वे आसमान की तरफ कान लगाकर फ़रिश्तों की बातें सुनने की कोशिश भी नहीं कर सकते। उन्हें हर तरफ से इस काम से अलग और दूर कर दिया गया है। आसमान में उनके लिए उल्कापिंड (शहाब) हैं जो उन्हें जलाते और भगाते हैं, इसलिए वे वहाँ तक पहुँच ही नहीं सकते, फिर वे क़ुरआन जैसी पवित्र चीज़ कैसे ला सकते हैं?

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह का कलाम (क़ुरआन) इतना पाक और महान है कि शैतान जैसी नापाक हस्तियाँ उसके पास भी नहीं भटक सकतीं। यह सिर्फ़ अल्लाह के चुने हुए फ़रिश्तों (जिब्रील अलैहिस्सलाम) के ज़रिए उनके प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर उतारा गया है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि जो लोग क़ुरआन को जादू या शैतानी काम कहते थे, उनकी बातें पूरी तरह झूठी हैं। अल्लाह ने अपने कलाम को हर नुक़्स और हर बुराई से महफ़ूज़ रखा है। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन को पूरे एहतराम और प्यार के साथ पढ़ें, क्योंकि यही हमारी हिदायत और कामयाबी का ज़रिया है। जो लोग क़ुरआन से जुड़ते हैं, वे अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त में आ जाते हैं, और जो लोग इससे मुँह मोड़ते हैं, वे शैतान के करीब हो जाते हैं। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 210-214 — अश-शुआरा

210وَمَا تَنَزَّلَتْ بِهِ الشَّيَاطِينُ
और इस क़ुरान को शयातीन लेकर नाज़िल नही हुए
211وَمَا يَنبَغِي لَهُمْ وَمَا يَسْتَطِيعُونَ
और ये काम न तो उनके लिए मुनासिब था और न वह कर सकते थे
212إِنَّهُمْ عَنِ السَّمْعِ لَمَعْزُولُونَ
बल्कि वह तो (वही के) सुनने से महरुम हैं
213فَلَا تَدْعُ مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ فَتَكُونَ مِنَ الْمُعَذَّبِينَ
(ऐ रसूल) तुम ख़ुदा के साथ किसी दूसरे माबूद की इबादत न करो वरना तुम भी मुबतिलाए अज़ाब किए जाओगे
214وَأَنذِرْ عَشِيرَتَكَ الْأَقْرَبِينَ
और (ऐ रसूल) तुम अपने क़रीबी रिश्तेदारों को (अज़ाबे ख़ुदा से) डराओ
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अनुवाद — अश-शुआरा 212

सूरा अश-शुआरा आयत 212 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बल्कि वह तो (वही के) सुनने से महरुम हैं

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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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