अश-शुआरा · 221/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
هَلْ أُنَبِّئُكُمْ عَلَىٰ مَن تَنَزَّلُ الشَّيَاطِينُ ۝٢٢١
Hal unabbi`ukum `alaa man tanazzalush Shayaateen
📖 हिंदी अर्थ
बेशक वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है क्या मै तुम्हें बता दूँ कि शयातीन किन लोगों पर नाज़िल हुआ करते हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أُنَبِّئُكُمْ: क्या मैं तुम्हें बताऊँ / सूचित करूँ
  • تَنَزَّلُ: उतरती हैं / नाज़िल होती हैं
  • الشَّيَاطِين: शैतान (बहुवचन)

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में मक्का के मुशरिकीन को संबोधित करते हुए फ़रमाता है: "क्या मैं तुम्हें बताऊँ कि शैतान किस पर उतरते हैं?" यह प्रश्न उन लोगों के उत्तर में है जिन्होंने यह झूठा आरोप लगाया था कि शैतान हज़रत मुहम्मद ﷺ पर वह्य लेकर आता है। अल्लाह तआला उनकी इस बात का खंडन करते हुए स्पष्ट करते हैं कि शैतान कभी भी अल्लाह के नबियों और रसूलों पर नहीं उतरते।

शैतान तो केवल उन लोगों पर उतरते हैं जो झूठे और अत्यधिक पापी होते हैं — जैसे काहिन (ज्योतिषी) और झूठे नबी। ये शैतान आसमान की बातें चुराकर (चोरी से सुनकर) उन झूठे लोगों तक पहुँचाते हैं, और वे लोग उसमें सैकड़ों झूठ मिला देते हैं। कभी-कभी एक सच्ची बात भी उनकी ज़ुबान पर आ जाती है, लेकिन उसके साथ वे सौ से अधिक झूठ जोड़ देते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के नबी और रसूल शैतान के प्रभाव से पूर्ण रूप से सुरक्षित होते हैं। कुरआन मजीद अल्लाह का कलाम है, जो फ़रिश्ते जिब्रील अमीन के माध्यम से नाज़िल हुआ है — यह शैतान का काम नहीं है और न ही शैतान इसके पास आ सकते हैं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सत्य और असत्य में अंतर करने की शिक्षा देती है। जो लोग झूठ और पाप में डूबे होते हैं, वे शैतान के साथी बन जाते हैं। लेकिन जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं, वे अल्लाह की हिफ़ाज़त में होते हैं। कुरआन जैसी पाक किताब कभी शैतान का काम नहीं हो सकती — यह तो रहमतों का ख़ज़ाना है, जो अल्लाह की ओर से उसके प्यारे नबी ﷺ पर उतारा गया। हमें चाहिए कि हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, क्योंकि यही हमारी सच्ची रहनुमाई कर सकता है और हमें शैतान के वसवसों से बचा सकता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 219-223 — अश-शुआरा

219وَتَقَلُّبَكَ فِي السَّاجِدِينَ
और सजदा
220إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
करने वालों (की जमाअत) में तुम्हारा फिरना (उठना बैठना सजदा रुकूउ वगैरह सब) देखता है
221هَلْ أُنَبِّئُكُمْ عَلَىٰ مَن تَنَزَّلُ الشَّيَاطِينُ
बेशक वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है क्या मै तुम्हें बता दूँ कि शयातीन किन लोगों पर नाज़िल हुआ करते हैं
222تَنَزَّلُ عَلَىٰ كُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍ
(लो सुनो) ये लोग झूठे बद किरदार पर नाज़िल हुआ करते हैं
223يُلْقُونَ السَّمْعَ وَأَكْثَرُهُمْ كَاذِبُونَ
जो (फ़रिश्तों की बातों पर कान लगाए रहते हैं) कि कुछ सुन पाएँ
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अनुवाद — अश-शुआरा 221

सूरा अश-शुआरा आयत 221 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है क्या मै तुम्हें…

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Tuesday, August 18, 2026

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