Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- السَّمِيعُ (अस-समीउ): सब कुछ सुनने वाला, जिसकी सुनने की शक्ति से कोई बात छिपी नहीं, न आवाज़ें, न दिलों के राज़।
- الْعَلِيمُ (अल-अलीम): सब कुछ जानने वाला, जिसके ज्ञान में आकाश और धरती का कोई कण, कोई गुप्त बात, कोई इरादा शामिल नहीं जो उससे छिपा हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत एक बहुत ही प्यारी और दिल को सुकून देने वाली बात बयान करती है। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और उनके ज़रिए हम सबको बता रहा है कि जब तुम रात के सन्नाटे में अकेले खड़े होकर नमाज़ पढ़ते हो, तुम्हारी तिलावत सुनता है। जब तुम दूसरे नमाज़ियों के साथ क़ियाम, रुकू, सजदा और जलूस में होते हो, तुम्हारी हर हरकत को देखता है। वह तुम्हारी दुआओं को, तुम्हारे ज़िक्र को, तुम्हारी तिलावत की आवाज़ को सुनता है — बल्कि उससे भी बढ़कर, वह तुम्हारे दिल की नीयत और इरादे को जानता है। वह जानता है कि तुम सच्चे दिल से उसकी इबादत कर रहे हो या सिर्फ़ दिखावे के लिए।
यह आयत हमें बहुत बड़ी खुशखबरी देती है। जब हम जानते हैं कि अल्लाह हमारी हर बात सुनता है और हमारे हर इरादे को जानता है, तो हमारा दिल कितना प्रसन्न होता है! हमारी नमाज़, हमारी दुआ, हमारी तिलावत — कोई भी चीज़ बेकार नहीं जाती। अल्लाह उसे सुनता है और उसका अज्र देता है। यही वह चीज़ है जो हमें नमाज़ में खुशू और खुज़ू (एकाग्रता और विनम्रता) पैदा करती है। जब हमें यक़ीन हो कि हमारा रब हमें देख और सुन रहा है, तो हमारी इबादत में लज़्ज़त आती है, हमारा दिल उसकी तरफ़ लग जाता है।
यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपनी ज़बान और अपने दिल दोनों को साफ़ रखना चाहिए। क्योंकि अल्लाह सुनता ही नहीं, बल्कि हमारे दिल के भेदों को भी जानता है। इसलिए हमें सिर्फ़ ज़बान से नहीं, बल्कि दिल से सच्चे होकर अल्लाह से बात करनी चाहिए, उससे दुआ माँगनी चाहिए, और उसकी इबादत में सच्ची नीयत रखनी चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह के करीब लाता है, और यही वह चीज़ है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देती है।
📜 आयत 218-222 — सूरा अश-शुआरा
अनुवाद — अश-शुआरा 220
सूरा अश-शुआरा आयत 220 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : करने वालों (की जमाअत) में तुम्हारा फिरना (उठना बैठना सजदा…सूरा आयत 220/227 — सूरा अश-शुआरा الشعراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शुआरा सुनें, सूरा अश-शुआरा अनुवाद, सूरा अश-शुआरा mp3, सूरा अश-शुआरा pdf. आयत 218–222. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अश-शुआरा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


