अश-शुआरा · 220/227
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शुआरा
إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ ۝٢٢٠
Innahoo Huwas Samee`ul `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
करने वालों (की जमाअत) में तुम्हारा फिरना (उठना बैठना सजदा रुकूउ वगैरह सब) देखता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّمِيعُ (अस-समीउ): सब कुछ सुनने वाला, जिसकी सुनने की शक्ति से कोई बात छिपी नहीं, न आवाज़ें, न दिलों के राज़।
  • الْعَلِيمُ (अल-अलीम): सब कुछ जानने वाला, जिसके ज्ञान में आकाश और धरती का कोई कण, कोई गुप्त बात, कोई इरादा शामिल नहीं जो उससे छिपा हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत एक बहुत ही प्यारी और दिल को सुकून देने वाली बात बयान करती है। अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और उनके ज़रिए हम सबको बता रहा है कि जब तुम रात के सन्नाटे में अकेले खड़े होकर नमाज़ पढ़ते हो, तुम्हारी तिलावत सुनता है। जब तुम दूसरे नमाज़ियों के साथ क़ियाम, रुकू, सजदा और जलूस में होते हो, तुम्हारी हर हरकत को देखता है। वह तुम्हारी दुआओं को, तुम्हारे ज़िक्र को, तुम्हारी तिलावत की आवाज़ को सुनता है — बल्कि उससे भी बढ़कर, वह तुम्हारे दिल की नीयत और इरादे को जानता है। वह जानता है कि तुम सच्चे दिल से उसकी इबादत कर रहे हो या सिर्फ़ दिखावे के लिए।

यह आयत हमें बहुत बड़ी खुशखबरी देती है। जब हम जानते हैं कि अल्लाह हमारी हर बात सुनता है और हमारे हर इरादे को जानता है, तो हमारा दिल कितना प्रसन्न होता है! हमारी नमाज़, हमारी दुआ, हमारी तिलावत — कोई भी चीज़ बेकार नहीं जाती। अल्लाह उसे सुनता है और उसका अज्र देता है। यही वह चीज़ है जो हमें नमाज़ में खुशू और खुज़ू (एकाग्रता और विनम्रता) पैदा करती है। जब हमें यक़ीन हो कि हमारा रब हमें देख और सुन रहा है, तो हमारी इबादत में लज़्ज़त आती है, हमारा दिल उसकी तरफ़ लग जाता है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपनी ज़बान और अपने दिल दोनों को साफ़ रखना चाहिए। क्योंकि अल्लाह सुनता ही नहीं, बल्कि हमारे दिल के भेदों को भी जानता है। इसलिए हमें सिर्फ़ ज़बान से नहीं, बल्कि दिल से सच्चे होकर अल्लाह से बात करनी चाहिए, उससे दुआ माँगनी चाहिए, और उसकी इबादत में सच्ची नीयत रखनी चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह के करीब लाता है, और यही वह चीज़ है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी देती है।



📜 आयत 218-222 — सूरा अश-शुआरा

218الَّذِي يَرَاكَ حِينَ تَقُومُ
भरोसा रखो कि जब तुम (नमाजे तहज्जुद में) खड़े होते हो
219وَتَقَلُّبَكَ فِي السَّاجِدِينَ
और सजदा
220إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
करने वालों (की जमाअत) में तुम्हारा फिरना (उठना बैठना सजदा रुकूउ वगैरह सब) देखता है
221هَلْ أُنَبِّئُكُمْ عَلَىٰ مَن تَنَزَّلُ الشَّيَاطِينُ
बेशक वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है क्या मै तुम्हें बता दूँ कि शयातीन किन लोगों पर नाज़िल हुआ करते हैं
222تَنَزَّلُ عَلَىٰ كُلِّ أَفَّاكٍ أَثِيمٍ
(लो सुनो) ये लोग झूठे बद किरदार पर नाज़िल हुआ करते हैं
अश-शुआराकुरान सूची
227आयत
मक्कीअवतरण स्थान
220आयत

अनुवाद — अश-शुआरा 220

सूरा अश-शुआरा आयत 220 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : करने वालों (की जमाअत) में तुम्हारा फिरना (उठना बैठना सजदा…

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Saturday, October 3, 2026

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