अन-नमल · 72/93
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नमल
قُلْ عَسَىٰ أَن يَكُونَ رَدِفَ لَكُم بَعْضُ الَّذِي تَسْتَعْجِلُونَ ۝٧٢
Qul `asaaa any-yakoona radifa lakum ba`dul lazee tasta`jiloon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि जिस (अज़ाब) की तुम लोग जल्दी मचा रहे हो क्या अजब है इसमे से कुछ करीब आ गया हो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • رَدِفَ لَكُم — तुम्हारे निकट आ गया, तुम्हारे पास आ लगा, या तुम्हारे साथ जुड़ गया।
  • تَسْتَعْجِلُونَ — जिसे तुम जल्दी माँग रहे हो (अज़ाब/यातना)।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि जिस अज़ाब (यातना) को तुम जल्दी-जल्दी माँग रहे हो और उसका मज़ाक उड़ा रहे हो, उसका कुछ हिस्सा तो अब तुम्हारे बहुत करीब आ चुका है। यानी अल्लाह की यातना का वह समय नज़दीक आ गया है जिसे तुम अपनी नादानी में दूर समझ रहे थे।

यह आयत उस समय नाज़िल हुई जब काफ़िर मक्का वाले नबी करीम ﷺ से मज़ाक़िया अंदाज़ में कहते थे: "यदि तुम सच्चे हो तो वह अज़ाब ले आओ जिससे तुम हमें डराते हो।" तो अल्लाह ने अपने नबी को हुक्म दिया कि उन्हें बता दो: "यह अज़ाब तुमसे दूर नहीं, बल्कि तुम्हारे सिर पर मंडरा रहा है। इसका कुछ हिस्सा तो अब तुम्हारे पास आ ही चुका है।"

और ऐसा ही हुआ — बद्र की जंग में उनमें से कई सरदार मारे गए और उन्होंने उस अज़ाब का वह हिस्सा देख लिया जिसे वे जल्दी माँग रहे थे। यह अल्लाह की सुन्नत (रीति) है कि जब बंदे हद से गुज़र जाते हैं और नबियों का मज़ाक उड़ाते हैं, तो अल्लाह उन्हें उनकी शरारत का मज़ा चखाता है।


दावत और नसीहत:

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह की यातना और उसकी पकड़ को कभी दूर नहीं समझना चाहिए। इंसान कितना ही ग़ाफ़िल (बेख़बर) हो जाए, अल्लाह की पकड़ बहुत करीब है। जो लोग नबियों और अल्लाह के दीन का मज़ाक उड़ाते हैं, वे अक्सर देखते हैं कि अज़ाब उन पर इस तरह आ पड़ता है जिसका उन्हें गुमान भी नहीं होता।

मोमिन की शान यह है कि वह अल्लाह के अज़ाब से डरे, अपने गुनाहों से तौबा करे, और नबी ﷺ की बताई हुई बातों को सच माने। अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है, लेकिन उसका अज़ाब भी बहुत सख्त है। आओ हम अपनी ज़िंदगी को सुधारें, नबी ﷺ के बताए रास्ते पर चलें, और अल्लाह से उसकी रहमत और माफ़ी की दुआ करें। याद रखिए, अल्लाह तौबा करने वालों से बहुत प्यार करता है और उन्हें माफ़ कर देता है।



📜 आयत 70-74 — सूरा अन-नमल

70وَلَا تَحْزَنْ عَلَيْهِمْ وَلَا تَكُن فِي ضَيْقٍ مِّمَّا يَمْكُرُونَ
(ऐ रसूल) तुम उनके हाल पर कुछ अफ़सोस न करो और जो चालें ये लोग (तुम्हारे ख़िलाफ) चल रहे हैं उससे तंग दिल न हो
71وَيَقُولُونَ مَتَىٰ هَٰذَا الْوَعْدُ إِن كُنتُمْ صَادِقِينَ
और ये (कुफ्फ़ार मुसलमानों से) पूछते हैं कि अगर तुम सच्चे हो तो (आख़िर) ये (क़यामत या अज़ाब का) वायदा कब पूरा होगा
72قُلْ عَسَىٰ أَن يَكُونَ رَدِفَ لَكُم بَعْضُ الَّذِي تَسْتَعْجِلُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि जिस (अज़ाब) की तुम लोग जल्दी मचा रहे हो क्या अजब है इसमे से कुछ करीब आ गया हो
73وَإِنَّ رَبَّكَ لَذُو فَضْلٍ عَلَى النَّاسِ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَشْكُرُونَ
और इसमें तो शक ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार लोगों पर बड़ा फज़ल व करम करने वाला है मगर बहुतेरे लोग (उसका) शुक्र नहीं करते
74وَإِنَّ رَبَّكَ لَيَعْلَمُ مَا تُكِنُّ صُدُورُهُمْ وَمَا يُعْلِنُونَ
और इसमें तो शक नहीं जो बातें उनके दिलों में पोशीदा हैं और जो कुछ ये एलानिया करते हैं तुम्हारा परवरदिगार यक़ीनी जानता है
अन-नमलकुरान सूची
93आयत
मक्कीअवतरण स्थान
72आयत

अनुवाद — अन-नमल 72

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Wednesday, September 30, 2026

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