आल-इमरान · 108/200
अनुवाद उच्चारण — आल-इमरान
تِلْكَ آيَاتُ اللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّ ۗ وَمَا اللَّهُ يُرِيدُ ظُلْمًا لِّلْعَالَمِينَ ۝١٠٨
Tilka Aayaatul laahi natloohaa `alaika bilhaqq; wa mal laahu yureedu zulmallil `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ये ख़ुदा की आयतें हैं जो हम तुमको ठीक (ठीक) पढ़ के सुनाते हैं और ख़ुदा सारे जहॉन के लोगों (से किसी) पर जुल्म करना नहीं चाहता

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آيَاتُ اللَّهِ: अल्लाह की निशानियाँ और स्पष्ट प्रमाण।
  • نَتْلُوهَا: हम इसे पढ़कर सुनाते हैं।
  • بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, पूरी सच्चाई और न्याय के साथ।
  • ظُلْمًا: किसी पर ज़ुल्म करना, उसका हक़ मारना या उसे नुक़सान पहुँचाना।
  • لِلْعَالَمِينَ: सारे संसार वालों (समस्त मनुष्यों और जिन्नों) पर।

तफ़सीर (व्याख्या):

ये आयतें अल्लाह की हैं, जिन्हें वह अपने पैग़म्बर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर सत्य और न्याय के साथ उतारता और पढ़कर सुनाता है। ये आयतें केवल कहानियाँ या किस्से नहीं हैं, बल्कि इनमें अल्लाह के वादे, चेतावनियाँ, आदेश और निषेध शामिल हैं — सब कुछ सच्चाई पर आधारित है। अल्लाह ने इन आयतों में जो कुछ भी बताया है, वह हर पहलू से सत्य है — ख़बरों में सच्चा और फ़ैसलों में न्यायपूर्ण।

अल्लाह अपने बन्दों पर ज़ुल्म करने से बिल्कुल पाक है। वह किसी पर बिना अपराध के अज़ाब नहीं भेजता, न ही किसी के अच्छे कर्मों को घटाता है, और न ही किसी को उसकी मेहनत के बिना सज़ा देता है। वह पूर्ण न्यायकारी है — जो जैसा करेगा, उसे वैसा ही बदला मिलेगा। अगर किसी को सज़ा मिलती है, तो वह उसके अपने कर्मों का परिणाम है, और अगर किसी को इनाम मिलता है, तो वह अल्लाह का फ़ज़ल और करम है।


फ़ायदे (सबक़):

  1. अल्लाह की हर बात सत्य है — क़ुरआन की हर आयत, हर ख़बर और हर फ़ैसला सत्य पर आधारित है। इसमें कोई झूठ या धोखा नहीं हो सकता, इसलिए हमें पूरे भरोसे के साथ इसे मानना चाहिए।
  2. अल्लाह पूर्ण न्यायकारी है — यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह कभी किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। यह बात हमारे दिलों को सुकून देती है कि इस दुनिया में चाहे जो भी हो, अल्लाह के यहाँ हर किसी को उसके कर्मों का पूरा और न्यायपूर्ण बदला मिलेगा।
  3. ज़िम्मेदारी का एहसास — जब हमें पता चलता है कि अल्लाह ज़ुल्म नहीं करता, तो हमें यह भी समझना चाहिए कि हमारे अच्छे और बुरे कर्मों का नतीजा हमें खुद भुगतना होगा। यह हमें अच्छे काम करने और बुराइयों से बचने की प्रेरणा देता है।
  4. अल्लाह पर भरोसा — यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के फ़ैसलों पर पूरा भरोसा रखें। चाहे हालात कैसे भी हों, अल्लाह का फ़ैसला हमेशा हमारे भले के लिए होता है, क्योंकि वह कभी ज़ुल्म नहीं करता।
  5. क़ुरआन की अहमियत — यह आयत क़ुरआन की अज़मत को बयान करती है कि यह अल्लाह की आयतें हैं, जो सत्य के साथ उतारी गई हैं। इसलिए हमें क़ुरआन को पढ़ना, समझना और उस पर अमल करना चाहिए।


📜 आयत 106-110 — आल-इमरान

106يَوْمَ تَبْيَضُّ وُجُوهٌ وَتَسْوَدُّ وُجُوهٌ ۚ فَأَمَّا الَّذِينَ اسْوَدَّتْ وُجُوهُهُمْ أَكَفَرْتُم بَعْدَ إِيمَانِكُمْ فَذُوقُوا الْعَذَابَ بِمَا كُنتُمْ تَكْفُرُونَ
(उस दिन से डरो) जिस दिन कुछ लोगों के चेहरे तो सफैद नूरानी होंगे और कुछ (लोगो) के चेहरे सियाह जिन लोगों के मुहॅ में कालिक होगी (उनसे कहा जायेगा) हाए क्यों तुम तो ईमान लाने के बाद काफ़िर हो गए थे अच्छा तो (लो) (अब) अपने कुफ़्र की सज़ा में अज़ाब (के मजे) चखो
107وَأَمَّا الَّذِينَ ابْيَضَّتْ وُجُوهُهُمْ فَفِي رَحْمَةِ اللَّهِ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
और जिनके चेहरे पर नूर बरसता होगा वह तो ख़ुदा की रहमत(बहिश्त) में होंगे (और) उसी में सदा रहेंगे
108تِلْكَ آيَاتُ اللَّهِ نَتْلُوهَا عَلَيْكَ بِالْحَقِّ ۗ وَمَا اللَّهُ يُرِيدُ ظُلْمًا لِّلْعَالَمِينَ
(ऐ रसूल) ये ख़ुदा की आयतें हैं जो हम तुमको ठीक (ठीक) पढ़ के सुनाते हैं और ख़ुदा सारे जहॉन के लोगों (से किसी) पर जुल्म करना नहीं चाहता
109وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ وَإِلَى اللَّهِ تُرْجَعُ الْأُمُورُ
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (सब) ख़ुदा ही का है और (आख़िर) सब कामों की रूज़ु ख़ुदा ही की तरफ़ है
110كُنتُمْ خَيْرَ أُمَّةٍ أُخْرِجَتْ لِلنَّاسِ تَأْمُرُونَ بِالْمَعْرُوفِ وَتَنْهَوْنَ عَنِ الْمُنكَرِ وَتُؤْمِنُونَ بِاللَّهِ ۗ وَلَوْ آمَنَ أَهْلُ الْكِتَابِ لَكَانَ خَيْرًا لَّهُم ۚ مِّنْهُمُ الْمُؤْمِنُونَ وَأَكْثَرُهُمُ الْفَاسِقُونَ
तुम क्या अच्छे गिरोह हो कि (लोगों की) हिदायत के वास्ते पैदा किये गए हो तुम (लोगों को) अच्छे काम का हुक्म करते हो और बुरे कामों से रोकते हो और ख़ुदा पर ईमान रखते हो और अगर अहले किताब भी (इसी तरह) ईमान लाते तो उनके हक़ में बहुत अच्छा होता उनमें से कुछ ही तो ईमानदार हैं और अक्सर बदकार
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अनुवाद — आल-इमरान 108

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सूरा आयत 108/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 106–110. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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