अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- آيَاتُ اللَّهِ: अल्लाह की निशानियाँ और स्पष्ट प्रमाण।
- نَتْلُوهَا: हम इसे पढ़कर सुनाते हैं।
- بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, पूरी सच्चाई और न्याय के साथ।
- ظُلْمًا: किसी पर ज़ुल्म करना, उसका हक़ मारना या उसे नुक़सान पहुँचाना।
- لِلْعَالَمِينَ: सारे संसार वालों (समस्त मनुष्यों और जिन्नों) पर।
तफ़सीर (व्याख्या):
ये आयतें अल्लाह की हैं, जिन्हें वह अपने पैग़म्बर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर सत्य और न्याय के साथ उतारता और पढ़कर सुनाता है। ये आयतें केवल कहानियाँ या किस्से नहीं हैं, बल्कि इनमें अल्लाह के वादे, चेतावनियाँ, आदेश और निषेध शामिल हैं — सब कुछ सच्चाई पर आधारित है। अल्लाह ने इन आयतों में जो कुछ भी बताया है, वह हर पहलू से सत्य है — ख़बरों में सच्चा और फ़ैसलों में न्यायपूर्ण।
अल्लाह अपने बन्दों पर ज़ुल्म करने से बिल्कुल पाक है। वह किसी पर बिना अपराध के अज़ाब नहीं भेजता, न ही किसी के अच्छे कर्मों को घटाता है, और न ही किसी को उसकी मेहनत के बिना सज़ा देता है। वह पूर्ण न्यायकारी है — जो जैसा करेगा, उसे वैसा ही बदला मिलेगा। अगर किसी को सज़ा मिलती है, तो वह उसके अपने कर्मों का परिणाम है, और अगर किसी को इनाम मिलता है, तो वह अल्लाह का फ़ज़ल और करम है।
फ़ायदे (सबक़):
- अल्लाह की हर बात सत्य है — क़ुरआन की हर आयत, हर ख़बर और हर फ़ैसला सत्य पर आधारित है। इसमें कोई झूठ या धोखा नहीं हो सकता, इसलिए हमें पूरे भरोसे के साथ इसे मानना चाहिए।
- अल्लाह पूर्ण न्यायकारी है — यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह कभी किसी पर ज़ुल्म नहीं करता। यह बात हमारे दिलों को सुकून देती है कि इस दुनिया में चाहे जो भी हो, अल्लाह के यहाँ हर किसी को उसके कर्मों का पूरा और न्यायपूर्ण बदला मिलेगा।
- ज़िम्मेदारी का एहसास — जब हमें पता चलता है कि अल्लाह ज़ुल्म नहीं करता, तो हमें यह भी समझना चाहिए कि हमारे अच्छे और बुरे कर्मों का नतीजा हमें खुद भुगतना होगा। यह हमें अच्छे काम करने और बुराइयों से बचने की प्रेरणा देता है।
- अल्लाह पर भरोसा — यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के फ़ैसलों पर पूरा भरोसा रखें। चाहे हालात कैसे भी हों, अल्लाह का फ़ैसला हमेशा हमारे भले के लिए होता है, क्योंकि वह कभी ज़ुल्म नहीं करता।
- क़ुरआन की अहमियत — यह आयत क़ुरआन की अज़मत को बयान करती है कि यह अल्लाह की आयतें हैं, जो सत्य के साथ उतारी गई हैं। इसलिए हमें क़ुरआन को पढ़ना, समझना और उस पर अमल करना चाहिए।
📜 आयत 106-110 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 108
सूरा आल-इमरान आयत 108 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) ये ख़ुदा की आयतें हैं जो हम तुमको…सूरा आयत 108/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 106–110. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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