अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- افترى: झूठ गढ़ना, बदनामी करना, झूठ बाँधना।
- الظالمون: अत्याचारी, जो अपनी जगह से हटकर दूसरे का हक़ मारें या खुद पर ज़ुल्म करें।
विस्तृत तफ़सीर:
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस किसी ने भी इस स्पष्ट सच्चाई और हुज्जत (प्रमाण) के आने के बाद अल्लाह पर झूठ बोला — यानी यह दावा किया कि अल्लाह ने यहूदियों के लिए कुछ चीज़ें हराम की हैं, जबकि हक़ीक़त यह है कि यहूदियों के बुज़ुर्ग हज़रत याक़ूब (अलैहिस्सलाम) ने अपनी नफ़्सी ख़्वाहिश की वजह से कुछ चीज़ें खुद पर हराम कर ली थीं, अल्लाह की तरफ़ से कोई हुक्म नहीं था — तो ऐसे लोग ही सच्चे अत्याचारी हैं। यह ज़ुल्म दो तरह का है: एक तो यह कि उन्होंने अल्लाह पर झूठ बोलकर उसकी शान में बड़ी बदतमीज़ी की, और दूसरे यह कि उन्होंने खुद अपने ऊपर ज़ुल्म किया, क्योंकि उन्होंने हक़ को छोड़ दिया जबकि हक़ उनके सामने साफ़ और रौशन हो चुका था। यह वह लोग हैं जो इंसाफ़ नहीं करते, न अल्लाह के साथ इंसाफ़ करते हैं और न अपनी रूह के साथ।
फ़ायदे:
- सच्चाई सामने आने के बाद उसे छुपाना या उसके खिलाफ़ झूठ फैलाना सबसे बड़ा ज़ुल्म है, और अल्लाह के नाम पर झूठ बोलना सबसे गंभीर गुनाह है।
- इस आयत से हमें सीख मिलती है कि हमें कभी भी अल्लाह के नाम पर कोई बात नहीं कहनी चाहिए जब तक कि हमें पक्का इल्म न हो। दीन के मामले में अटकल और अफ़वाहों पर भरोसा करना ज़ुल्म है।
- अल्लाह का दीन आसान और फ़ितरत के मुताबिक़ है; इसमें कोई ऐसी बात नहीं जो इंसान अपनी तरफ़ से जोड़ ले। इसलिए हमें सिर्फ़ क़ुरआन और सही सुन्नत को ही अपना रहनुमा बनाना चाहिए।
- यह आयत हमें बताती है कि हक़ के सामने आने के बाद उसका इंकार करना इंसान को अल्लाह की रहमत से दूर कर देता है, और इंसाफ़ वाला रास्ता अपनाना ही कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 92-96 — आल-इमरान
अनुवाद — आल-इमरान 94
सूरा आल-इमरान आयत 94 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसको (हमारे सामने) पढ़ो फिर उसके बाद भी जो…सूरा आयत 94/200 — आल-इमरान آل عمران (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: आल-इमरान सुनें, आल-इमरान अनुवाद, आल-इमरान mp3, आल-इमरान pdf. आयत 92–96. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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