अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْفَتْحُ: यहाँ इसका अर्थ है निर्णय, फ़ैसला या विजय। अर्थात् वह दिन जब अल्लाह सत्य और असत्य के बीच अंतिम निर्णय करेगा।
तफ़सीर:
ये मुशरिकीन (बहुदेववादी) जो क़ियामत और हिसाब-किताब को झुठलाते थे, वे मज़ाक़ और उपहास के तौर पर कहते थे: "वह फ़तह (निर्णय/विजय) कब आएगी जिसकी तुम हमें धमकी देते हो? अगर तुम सच्चे हो तो बताओ, वह दिन कब है?"
वे इस तरह से रसूलुल्लाह ﷺ और मुसलमानों का मज़ाक़ उड़ाते थे और जल्दबाज़ी में अज़ाब (यातना) की माँग करते थे। उनका कहना था: "अगर तुम सच्चे हो कि हम पर अल्लाह का अज़ाब आएगा और हमारा अंजाम बुरा होगा, तो वह समय कब है? हमें दिखाओ!"
अल्लाह तआला ने इस आयत में उनकी इसी जल्दबाज़ी और उपहास का ज़िक्र किया है। यह उनकी नादानी और सरकशी की सबसे बड़ी निशानी थी कि वे उस चीज़ को मज़ाक़ में माँग रहे थे जो उनके लिए बहुत भयानक और विनाशकारी थी।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है कि हमें अल्लाह के वादों पर पूरा यक़ीन रखना चाहिए। अल्लाह का वादा सच्चा है, चाहे वह कितना ही देर से क्यों न पूरा हो। जिस तरह ये लोग मज़ाक़ उड़ाते थे और जल्दबाज़ी करते थे, उसी तरह आज भी कुछ लोग क़ियामत और अल्लाह के अज़ाब का मज़ाक़ उड़ाते हैं। लेकिन अल्लाह ने क़ुरआन में साफ़ कहा है कि वह दिन ज़रूर आएगा, और जब आएगा तो कोई उसे टाल नहीं सकेगा।
एक मोमिन के लिए यह बात बहुत अहम है कि वह अल्लाह के वादों पर भरोसा रखे और उन लोगों की बातों से विचलित न हो जो मज़ाक़ उड़ाते हैं। अल्लाह का फ़ैसला बिल्कुल सही और न्यायपूर्ण होगा, और वह दिन हर उस चीज़ से बेहतर होगा जो हम इस दुनिया में हासिल कर सकते हैं।
📜 आयत 26-30 — अस-सजदा
अनुवाद — अस-सजदा 28
सूरा अस-सजदा आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये लोग कहते है कि अगर तुम लोग सच्चे…सूरा आयत 28/30 — अस-सजदा السجدة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-सजदा सुनें, अस-सजदा अनुवाद, अस-सजदा mp3, अस-सजदा pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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