अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- مِن مِّثْلِهِ: अर्थात नूह (अलैहिस्सलाम) की नौका के समान।
- مَا يَرْكَبُونَ: जिसे वे सवारी के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी बेपनाह रहमत और क़ुदरत का ज़िक्र फ़रमाया है। उसने इंसानों पर एहसान किया कि उन्हें सवारी के ज़रिए अता किए। जिस तरह हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) के ज़माने में तूफ़ान से बचने के लिए कश्ती बनाई गई, उसी तरह अल्लाह ने इस उम्मत के लिए भी कश्तियाँ और जहाज़ पैदा किए, जिन पर सवार होकर लोग समंदरों को पार करते हैं और अपनी मंज़िलों तक पहुँचते हैं।
साथ ही, अल्लाह ने ज़मीन पर चलने के लिए जानवरों को भी बनाया, जैसे ऊँट, घोड़े, गधे आदि, जिन्हें "सफ़ीना-ए-बर्र" (ज़मीन की कश्ती) कहा गया है। ये सब अल्लाह की नेअमतें हैं जो उसने अपने बंदों पर इनाम की हैं।
यह आयत हमें अल्लाह की तौहीद (एकता) और उसकी क़ुदरत पर ग़ौर करने की तरफ़ बुलाती है। जब हम देखते हैं कि कैसे अल्लाह ने पानी और ज़मीन दोनों में सफ़र के ज़रिए मुहैया किए, तो हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी इबादत में मशगूल होना चाहिए।
यह भी याद रखना चाहिए कि ये सारी सवारियाँ और साधन अल्लाह की दी हुई हैं, और इनका असली मक़सद इंसान को अपने रब की याद दिलाना है। जब हम कश्ती में सवार होते हैं या किसी जानवर पर सफ़र करते हैं, तो हमें अल्लाह का ज़िक्र करना चाहिए और उससे हिफ़ाज़त की दुआ माँगनी चाहिए।
अल्लाह तआला ने यह नेअमतें सिर्फ़ इसलिए नहीं दीं कि हम उन्हें भूल जाएँ, बल्कि इसलिए दीं कि हम उसकी क़ुदरत को पहचानें और उसके सामने सर झुकाएँ। यही इंसान की कामयाबी है कि वह अल्लाह की नेअमतों को पहचाने और उनका सही इस्तेमाल करे।
आइए, हम अल्लाह के इन एहसानों पर ग़ौर करें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढालें। यही हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।
📜 आयत 40-44 — यासीन
अनुवाद — यासीन 42
सूरा यासीन आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उस कशती के मिसल उन लोगों के वास्ते भी…सूरा आयत 42/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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