यासीन · 42/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
وَخَلَقْنَا لَهُم مِّن مِّثْلِهِ مَا يَرْكَبُونَ ۝٤٢
Wa khalaqnaa lahum mim-mislihee maa yarkaboon
📖 हिंदी अर्थ
और उस कशती के मिसल उन लोगों के वास्ते भी वह चीज़े (कशतियाँ) जहाज़ पैदा कर दी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • مِن مِّثْلِهِ: अर्थात नूह (अलैहिस्सलाम) की नौका के समान।
  • مَا يَرْكَبُونَ: जिसे वे सवारी के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी बेपनाह रहमत और क़ुदरत का ज़िक्र फ़रमाया है। उसने इंसानों पर एहसान किया कि उन्हें सवारी के ज़रिए अता किए। जिस तरह हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) के ज़माने में तूफ़ान से बचने के लिए कश्ती बनाई गई, उसी तरह अल्लाह ने इस उम्मत के लिए भी कश्तियाँ और जहाज़ पैदा किए, जिन पर सवार होकर लोग समंदरों को पार करते हैं और अपनी मंज़िलों तक पहुँचते हैं।

साथ ही, अल्लाह ने ज़मीन पर चलने के लिए जानवरों को भी बनाया, जैसे ऊँट, घोड़े, गधे आदि, जिन्हें "सफ़ीना-ए-बर्र" (ज़मीन की कश्ती) कहा गया है। ये सब अल्लाह की नेअमतें हैं जो उसने अपने बंदों पर इनाम की हैं।

यह आयत हमें अल्लाह की तौहीद (एकता) और उसकी क़ुदरत पर ग़ौर करने की तरफ़ बुलाती है। जब हम देखते हैं कि कैसे अल्लाह ने पानी और ज़मीन दोनों में सफ़र के ज़रिए मुहैया किए, तो हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी इबादत में मशगूल होना चाहिए।

यह भी याद रखना चाहिए कि ये सारी सवारियाँ और साधन अल्लाह की दी हुई हैं, और इनका असली मक़सद इंसान को अपने रब की याद दिलाना है। जब हम कश्ती में सवार होते हैं या किसी जानवर पर सफ़र करते हैं, तो हमें अल्लाह का ज़िक्र करना चाहिए और उससे हिफ़ाज़त की दुआ माँगनी चाहिए।

अल्लाह तआला ने यह नेअमतें सिर्फ़ इसलिए नहीं दीं कि हम उन्हें भूल जाएँ, बल्कि इसलिए दीं कि हम उसकी क़ुदरत को पहचानें और उसके सामने सर झुकाएँ। यही इंसान की कामयाबी है कि वह अल्लाह की नेअमतों को पहचाने और उनका सही इस्तेमाल करे।

आइए, हम अल्लाह के इन एहसानों पर ग़ौर करें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ ढालें। यही हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।

🎧 सुनें

📜 आयत 40-44 — यासीन

40لَا الشَّمْسُ يَنبَغِي لَهَا أَن تُدْرِكَ الْقَمَرَ وَلَا اللَّيْلُ سَابِقُ النَّهَارِ ۚ وَكُلٌّ فِي فَلَكٍ يَسْبَحُونَ
न तो आफताब ही से ये बन पड़ता है कि वह माहताब को जा ले और न रात ही दिन से आगे बढ़ सकती है (चाँद, सूरज, सितारे) हर एक अपने-अपने आसमान (मदार) में चक्कर लगा रहें हैं
41وَآيَةٌ لَّهُمْ أَنَّا حَمَلْنَا ذُرِّيَّتَهُمْ فِي الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ
और उनके लिए (मेरी कुदरत) की एक निशानी ये है कि उनके बुर्ज़ुगों को (नूह की) भरी हुई कश्ती में सवार किया
42وَخَلَقْنَا لَهُم مِّن مِّثْلِهِ مَا يَرْكَبُونَ
और उस कशती के मिसल उन लोगों के वास्ते भी वह चीज़े (कशतियाँ) जहाज़ पैदा कर दी
43وَإِن نَّشَأْ نُغْرِقْهُمْ فَلَا صَرِيخَ لَهُمْ وَلَا هُمْ يُنقَذُونَ
जिन पर ये लोग सवार हुआ करते हैं और अगर हम चाहें तो उन सब लोगों को डुबा मारें फिर न कोई उन का फरियाद रस होगा और न वह लोग छुटकारा ही पा सकते हैं
44إِلَّا رَحْمَةً مِّنَّا وَمَتَاعًا إِلَىٰ حِينٍ
मगर हमारी मेहरबानी से और चूँकि एक (ख़ास) वक्त तक (उनको) चैन करने देना (मंज़ूर) है
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अनुवाद — यासीन 42

सूरा यासीन आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उस कशती के मिसल उन लोगों के वास्ते भी…

सूरा आयत 42/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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