यासीन · 43/83
अनुवाद उच्चारण — यासीन
وَإِن نَّشَأْ نُغْرِقْهُمْ فَلَا صَرِيخَ لَهُمْ وَلَا هُمْ يُنقَذُونَ ۝٤٣
Wa in nashaa nughriqhum falaa sareekha lahum wa laa hum yunqazoon
📖 हिंदी अर्थ
जिन पर ये लोग सवार हुआ करते हैं और अगर हम चाहें तो उन सब लोगों को डुबा मारें फिर न कोई उन का फरियाद रस होगा और न वह लोग छुटकारा ही पा सकते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • نُغْرِقْهُمْ – हम उन्हें डुबो दें
  • صَرِيخ – चिल्लाने वाला, मदद के लिए पुकारने वाला, कोई बचाने वाला
  • يُنقَذُونَ – बचाए जाएँ, छुड़ाए जाएँ

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में अपनी क़ुदरत का एक और अज़ीम नमूना पेश कर रहे हैं। वह फ़रमा रहे हैं कि जिस तरह हमने क़ुरैश के काफ़िरों को सफ़ीना (जहाज़) में सवार होकर समुद्र पार करने की नेमत दी, उसी तरह अगर हम चाहें तो उन्हीं जहाज़ों में सवार होने के बावजूद उन्हें डुबो सकते हैं। यानी जब हम चाहें, उन्हें पानी में ग़र्क़ कर दें, तो उस वक़्त न कोई उनकी फ़रियाद सुनने वाला होगा, न कोई उन्हें बचाने के लिए दौड़ेगा। न उनके पास कोई मददगार आएगा और न ही वे ख़ुद किसी तरह अपनी जान बचा सकेंगे। अल्लाह के फ़ैसले के आगे कोई ताक़त नहीं चल सकती।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त तनबीह (चेतावनी) है जो अल्लाह की नेमतों को देखकर भी उसका शुक्र अदा नहीं करते और उसकी क़ुदरत को भूल जाते हैं। इंसान जहाज़ में सवार होकर समंदर पार करता है तो उसे लगता है कि उसने यह काम अपनी तदबीर से कर लिया, लेकिन वह भूल जाता है कि असल क़ाबिज़ अल्लाह ही है। अल्लाह चाहे तो एक लहर ही काफ़ी है उसे डुबो देने के लिए।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें। जब हम किसी सफ़र पर निकलें, समुंदर हो या ज़मीन, तो दिल से यह यक़ीन रखें कि हमारी हिफ़ाज़त अल्लाह के हाथ में है। वही हमें बचाता है, वही डुबोता है। यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की तरफ़ भी इशारा करती है कि उसने अपनी रहमत से हमें यह नेमत दी कि हम जहाज़ों में सवार होकर सफ़र करते हैं, वरना वह चाहता तो हमें डुबो देता। इसलिए हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह का शुक्रिया अदा करें और उसकी नाफ़रमानी से बचें, क्योंकि उसकी पकड़ बहुत सख़्त है और उसके आगे कोई पनाह देने वाला नहीं।



📜 आयत 41-45 — यासीन

41وَآيَةٌ لَّهُمْ أَنَّا حَمَلْنَا ذُرِّيَّتَهُمْ فِي الْفُلْكِ الْمَشْحُونِ
और उनके लिए (मेरी कुदरत) की एक निशानी ये है कि उनके बुर्ज़ुगों को (नूह की) भरी हुई कश्ती में सवार किया
42وَخَلَقْنَا لَهُم مِّن مِّثْلِهِ مَا يَرْكَبُونَ
और उस कशती के मिसल उन लोगों के वास्ते भी वह चीज़े (कशतियाँ) जहाज़ पैदा कर दी
43وَإِن نَّشَأْ نُغْرِقْهُمْ فَلَا صَرِيخَ لَهُمْ وَلَا هُمْ يُنقَذُونَ
जिन पर ये लोग सवार हुआ करते हैं और अगर हम चाहें तो उन सब लोगों को डुबा मारें फिर न कोई उन का फरियाद रस होगा और न वह लोग छुटकारा ही पा सकते हैं
44إِلَّا رَحْمَةً مِّنَّا وَمَتَاعًا إِلَىٰ حِينٍ
मगर हमारी मेहरबानी से और चूँकि एक (ख़ास) वक्त तक (उनको) चैन करने देना (मंज़ूर) है
45وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ اتَّقُوا مَا بَيْنَ أَيْدِيكُمْ وَمَا خَلْفَكُمْ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और जब उन कुफ्फ़ार से कहा जाता है कि इस (अज़ाब से) बचो (हर वक्त तुम्हारे साथ-साथ) तुम्हारे सामने और तुम्हारे पीछे (मौजूद) है ताकि तुम पर रहम किया जाए
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अनुवाद — यासीन 43

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सूरा आयत 43/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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