अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- نُغْرِقْهُمْ – हम उन्हें डुबो दें
- صَرِيخ – चिल्लाने वाला, मदद के लिए पुकारने वाला, कोई बचाने वाला
- يُنقَذُونَ – बचाए जाएँ, छुड़ाए जाएँ
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में अपनी क़ुदरत का एक और अज़ीम नमूना पेश कर रहे हैं। वह फ़रमा रहे हैं कि जिस तरह हमने क़ुरैश के काफ़िरों को सफ़ीना (जहाज़) में सवार होकर समुद्र पार करने की नेमत दी, उसी तरह अगर हम चाहें तो उन्हीं जहाज़ों में सवार होने के बावजूद उन्हें डुबो सकते हैं। यानी जब हम चाहें, उन्हें पानी में ग़र्क़ कर दें, तो उस वक़्त न कोई उनकी फ़रियाद सुनने वाला होगा, न कोई उन्हें बचाने के लिए दौड़ेगा। न उनके पास कोई मददगार आएगा और न ही वे ख़ुद किसी तरह अपनी जान बचा सकेंगे। अल्लाह के फ़ैसले के आगे कोई ताक़त नहीं चल सकती।
यह आयत उन लोगों के लिए एक सख़्त तनबीह (चेतावनी) है जो अल्लाह की नेमतों को देखकर भी उसका शुक्र अदा नहीं करते और उसकी क़ुदरत को भूल जाते हैं। इंसान जहाज़ में सवार होकर समंदर पार करता है तो उसे लगता है कि उसने यह काम अपनी तदबीर से कर लिया, लेकिन वह भूल जाता है कि असल क़ाबिज़ अल्लाह ही है। अल्लाह चाहे तो एक लहर ही काफ़ी है उसे डुबो देने के लिए।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमेशा अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी नेमतों का शुक्र अदा करें। जब हम किसी सफ़र पर निकलें, समुंदर हो या ज़मीन, तो दिल से यह यक़ीन रखें कि हमारी हिफ़ाज़त अल्लाह के हाथ में है। वही हमें बचाता है, वही डुबोता है। यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की तरफ़ भी इशारा करती है कि उसने अपनी रहमत से हमें यह नेमत दी कि हम जहाज़ों में सवार होकर सफ़र करते हैं, वरना वह चाहता तो हमें डुबो देता। इसलिए हमें चाहिए कि हर हाल में अल्लाह का शुक्रिया अदा करें और उसकी नाफ़रमानी से बचें, क्योंकि उसकी पकड़ बहुत सख़्त है और उसके आगे कोई पनाह देने वाला नहीं।
📜 आयत 41-45 — यासीन
अनुवाद — यासीन 43
सूरा यासीन आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिन पर ये लोग सवार हुआ करते हैं और अगर…सूरा आयत 43/83 — यासीन يس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: यासीन सुनें, यासीन अनुवाद, यासीन mp3, यासीन pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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