अस-साफ्फात · 116/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَنَصَرْنَاهُمْ فَكَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ ۝١١٦
Wa nasarnaahum fakaanoo humul ghaalibeen
📖 हिंदी अर्थ
और (फिरऔन के मुक़ाबले में) हमने उनकी मदद की तो (आख़िर) यही लोग ग़ालिब रहे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَنَصَرْنَاهُمْ: और हमने उनकी सहायता की।
  • فَكَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ: तो वे ही विजयी रहे।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हमें हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम), हारून (अलैहिस्सलाम) और उनकी क़ौम की उस महान विजय की याद दिलाते हैं, जब अल्लाह ने उन्हें फ़िरऔन और उसकी सेना के मुक़ाबले में नुसरत (सहायता) अता फ़रमाई। यह वही मौक़ा था जब बनी इसराईल को समुद्र पार कराकर फ़िरऔन और उसके लश्कर को ग़रक़ कर दिया गया। अल्लाह ने अपने नबी और उनके साथियों की दुआ क़बूल की और उन्हें वह ग़लबा अता किया जिसका वादा किया गया था।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह पर भरोसा और उसकी राह में सब्र करने वालों का अंजाम कभी नाकामी नहीं होता। चाहे दुश्मन कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, अल्लाह की मदद उसके मोमिन बंदों के साथ होती है। फ़िरऔन जैसा ज़ालिम, जो खुद को भगवान कहता था, अल्लाह की क़ुदरत के आगे बेबस हो गया, और मूसा (अलैहिस्सलाम) जैसे नबी की उम्मत को ज़ालिमों पर ग़लबा मिला।

इससे हमें यह सबक़ मिलता है कि हक़ (सत्य) की ताक़त कभी बातिल (असत्य) से कम नहीं होती, बशर्ते हम अल्लाह पर पूरा यक़ीन रखें और उसकी इबादत में सच्चे दिल से जुड़े रहें। अल्लाह का वादा है कि वह अपने नेक बंदों की मदद करता है और उन्हें izzat (सम्मान) देता है। यही वजह है कि आज भी जब हम इस आयत को पढ़ते हैं, तो हमें यक़ीन होता है कि अल्लाह की राह में किए गए हर क़दम पर उसकी नुसरत हमारे साथ है।

आओ, हम इस आयत से सीख लें कि अपनी ज़िंदगी में भी हक़ के साथ खड़े रहें, चाहे हालात कितने भी मुश्किल हों, क्योंकि अल्लाह की मदद का वादा सच्चा है और उसकी मदद ही असली कामयाबी है।



📜 आयत 114-118 — सूरा अस-साफ्फात

114وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَارُونَ
और हमने मूसा और हारून पर बहुत से एहसानात किए हैं
115وَنَجَّيْنَاهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ الْكَرْبِ الْعَظِيمِ
और खुद दोनों को और इनकी क़ौम को बड़ी (सख्त) मुसीबत से नजात दी
116وَنَصَرْنَاهُمْ فَكَانُوا هُمُ الْغَالِبِينَ
और (फिरऔन के मुक़ाबले में) हमने उनकी मदद की तो (आख़िर) यही लोग ग़ालिब रहे
117وَآتَيْنَاهُمَا الْكِتَابَ الْمُسْتَبِينَ
और हमने उन दोनों को एक वाज़ेए उलम तालिब किताब (तौरेत) अता की
118وَهَدَيْنَاهُمَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
और दोनों को सीधी राह की हिदायत फ़रमाई
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
116आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 116

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Saturday, October 3, 2026

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