अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अला तत्तक़ून: क्या तुम (अल्लाह से) डरते नहीं? अर्थात् क्या तुम्हें अल्लाह का भय नहीं है?
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हज़रत इलियास (अलैहिस्सलाम) के उस समय का उल्लेख करती है जब उन्होंने अपनी क़ौम (बनी इसराईल) को सम्बोधित करते हुए कहा: "क्या तुम अल्लाह से नहीं डरते?" यह एक प्रश्न के रूप में एक गहरी नसीहत और प्रेरणा थी, जिसका उद्देश्य उन्हें जागरूक करना था। हज़रत इलियास (अलैहिस्सलाम) उन लोगों में से थे जिन्हें अल्लाह ने नबुव्वत और रिसालत से सम्मानित किया था। उन्होंने अपनी क़ौम को अल्लाह के भय की याद दिलाई, क्योंकि वे एक मूर्ति "बअ्ल" की पूजा करते थे और अल्लाह की इबादत छोड़ चुके थे।
उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: क्या तुम उस अल्लाह से नहीं डरते जिसने तुम्हें पैदा किया, तुम्हारा पालन-पोषण किया और तुम्हें सबसे अच्छी शक्ल दी? क्या तुम उसकी इबादत छोड़कर एक मूर्ति की पूजा करते हो? क्या तुम्हें उस अल्लाह का भय नहीं जो सबसे अच्छा सृष्टिकर्ता है, जो तुम्हारा रब है और तुम्हारे पूर्वजों का भी रब रहा है?
यह प्रश्न केवल डराने के लिए नहीं था, बल्कि उनके दिलों को जगाने और उन्हें सच्चाई की ओर लौटाने के लिए था। हज़रत इलियास (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें समझाया कि अल्लाह ही सच्चा माबूद (पूज्य) है, और उसके सिवा कोई इबादत के योग्य नहीं। उन्होंने उन्हें अल्लाह के आदेशों का पालन करने और उसकी मनाही से बचने की नसीहत दी, विशेष रूप से शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को साझी ठहराने) से बचने की।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि एक सच्चा दावत देने वाला (प्रचारक) किस तरह अपनी क़ौम को नर्मी और हिकमत से सच्चाई की ओर बुलाता है। हज़रत इलियास (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें डांटा नहीं, बल्कि प्रश्न के रूप में उनके दिलों को झकझोरा। यह हमारे लिए भी एक सबक है कि हमें अपने परिवार और समाज को अल्लाह की याद दिलानी चाहिए, उन्हें अल्लाह के भय की नसीहत करनी चाहिए, और उन्हें सीधे रास्ते पर लाने की कोशिश करनी चाहिए। अल्लाह का भय ही वह चीज़ है जो इंसान को गुनाहों से रोकती है और उसे नेक कामों की ओर प्रेरित करती है। आज भी हमें चाहिए कि हम अपने समाज में इसी तरह की नसीहत करें, प्यार और हिकमत से, ताकि लोग सच्चाई को समझें और अल्लाह की इबादत की ओर लौटें।
📜 आयत 122-126 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 124
सूरा अस-साफ्फात आयत 124 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग (ख़ुदा…सूरा आयत 124/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 122–126. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








