अस-साफ्फात · 125/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
أَتَدْعُونَ بَعْلًا وَتَذَرُونَ أَحْسَنَ الْخَالِقِينَ ۝١٢٥
Atad`oona Ba`lanw wa tazaroona ahsanal khaaliqeen
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुम लोग बाल (बुत) की परसतिश करते हो और खुदा को छोड़े बैठे हो जो सबसे बेहतर पैदा करने वाला है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • बअ्ल (بَعْلًا): यह उनके एक बुत (मूर्ति) का नाम था, जिसे वे पूजते थे।
  • तज़रून (تَذَرُونَ): छोड़ देते हो, त्याग देते हो।
  • अह़सनुल ख़ालिक़ीन (أَحْسَنَ الْخَالِقِينَ): सबसे अच्छा पैदा करने वाला, यानी अल्लाह तआला।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत इलियास (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाते हैं कि उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: “क्या तुम बअ्ल नाम के बुत की इबादत करते हो और अल्लाह तआला की इबादत छोड़ देते हो, जो सबसे अच्छा पैदा करने वाला है?”

यह आयत उस वक़्त के बनी इसराईल के हालात को बयान करती है, जब उन्होंने अल्लाह तआला की इबादत छोड़कर मूर्तियों की पूजा शुरू कर दी थी। हज़रत इलियास (अलैहिस्सलाम) ने उन्हें समझाया कि यह कितनी बड़ी भूल है कि इंसान उस बुत को पुकारे जो न कुछ सुन सकता है, न देख सकता है, न फ़ायदा पहुँचा सकता है और न नुक़सान। और उसे छोड़ दे जो असल ख़ालिक़ (पैदा करने वाला) है, जिसने आसमान और ज़मीन, इंसानों और जानवरों, सबको पैदा किया।

अल्लाह तआला “अह़सनुल ख़ालिक़ीन” (सबसे अच्छा पैदा करने वाला) है — उसकी पैदा की हुई हर चीज़ में बेहतरीन निज़ाम, हिक़मत और खूबसूरती है। वही रिज़्क़ देने वाला है, वही ज़िंदगी और मौत का मालिक है। उसकी इबादत ही सच्ची इबादत है, और उसी से मदद माँगनी चाहिए।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि इंसान को चाहिए कि वह अपनी फ़ितरत को समझे — फ़ितरत यही कहती है कि इबादत के लायक़ सिर्फ़ अल्लाह है। जो लोग अल्लाह को छोड़कर दूसरी चीज़ों को पुकारते हैं, वह अपनी ज़िंदगी को ख़तरे में डालते हैं। अल्लाह तआला अपने बंदों से बेहद मुहब्बत करता है और चाहता है कि वे सीधे रास्ते पर चलें। जो लोग अपनी ग़लतियों से तौबा करके उसकी तरफ़ लौट आते हैं, अल्लाह उन्हें माफ़ कर देता है और उन्हें जन्नत की खुशख़बरी देता है।

आज भी बहुत से लोग अल्लाह के सिवा दूसरी चीज़ों — मशहूरियत, दौलत, ताक़त, या किसी इंसान — को अपनी ज़िंदगी का मरकज़ बना लेते हैं। यह आयत हमें आगाह करती है कि सच्ची कामयाबी सिर्फ़ उसी को मिलती है जो अल्लाह की इबादत करता है और उसी से जुड़ा रहता है। अल्लाह तआला अपने बंदों के लिए रहमत और हिदायत का दरवाज़ा हमेशा खुला रखता है — बस ज़रूरत है दिल से उसकी तरफ़ मुड़ने की।

🎧 सुनें

📜 आयत 123-127 — अस-साफ्फात

123وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ الْمُرْسَلِينَ
और इसमें शक नहीं कि इलियास यक़ीनन पैग़म्बरों में से थे
124إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِ أَلَا تَتَّقُونَ
जब उन्होंने अपनी क़ौम से कहा कि तुम लोग (ख़ुदा से) क्यों नहीं डरते
125أَتَدْعُونَ بَعْلًا وَتَذَرُونَ أَحْسَنَ الْخَالِقِينَ
क्या तुम लोग बाल (बुत) की परसतिश करते हो और खुदा को छोड़े बैठे हो जो सबसे बेहतर पैदा करने वाला है
126اللَّهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ آبَائِكُمُ الْأَوَّلِينَ
और (जो) तुम्हारा परवरदिगार और तुम्हारे अगले बाप दादाओं का (भी) परवरदिगार है
127فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ
तो उसे लोगों ने झुठला दिया तो ये लोग यक़ीनन (जहन्नुम) में गिरफ्तार किए जाएँगे
अस-साफ्फातकुरान सूची
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अनुवाद — अस-साफ्फात 125

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Tuesday, August 18, 2026

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