Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, अर्थात् सच्चा दीन (धर्म) और सच्ची शिक्षा।
- صَدَّقَ الْمُرْسَلِينَ: पिछले सभी नबियों और रसूलों की पुष्टि की, उनके लाए हुए संदेश को सच माना।
तफसीर (व्याख्या):
काफिरों ने नबी करीम ﷺ पर झूठा आरोप लगाया था कि वे जादूगर, शायर या दीवाने हैं। अल्लाह तआला ने उनके इस झूठे इल्ज़ाम का जवाब देते हुए फ़रमाया कि हक़ीक़त इसके उलट है। आप ﷺ कोई झूठे दावेदार नहीं, बल्कि सच्चाई लेकर आए हैं। आप ﷺ कुरआन लेकर आए, जो सच्चाई और सच्चे दीन पर आधारित है। आपने लोगों को अल्लाह की वहदानियत (एकता) की ओर बुलाया और उसी तौहीद की दावत दी जो पिछले सभी नबियों की दावत थी। आप ﷺ ने उन सभी रसूलों की तस्दीक़ की, जो आपसे पहले आए, और उनके लाए हुए पैग़ाम को सच माना। आप ﷺ ने उनकी शिक्षाओं में कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसी सच्चाई को पेश किया जो हज़रत आदम से लेकर हज़रत ईसा तक सभी नबियों का पैग़ाम रही है।
यानी आप ﷺ का मिशन कोई नया और अलग नहीं था, बल्कि यह वही सच्चा मार्ग था जो अल्लाह ने हर ज़माने में अपने नबियों के ज़रिए भेजा। आप ﷺ ने उसी एक अल्लाह की इबादत की दावत दी, उसी के अहकाम (आदेशों) को पेश किया और आख़िरत (क़यामत के दिन) की सच्चाई की गवाही दी। यही वह सच्चाई है जिसे काफिरों ने झुठलाया, लेकिन हक़ तो हक़ है, चाहे उसे झुठलाने वाले कितने ही क्यों न हों।
दावती पहलू:
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि सच्चाई हमेशा स्पष्ट और स्थिर होती है। इस्लाम कोई नया दीन नहीं, बल्कि उन्हीं सच्चाइयों का नाम है जो अल्लाह ने हर नबी पर उतारीं। इसलिए जब हम इस्लाम की दावत देते हैं, तो हम दुनिया को उसी सच्चाई की तरफ बुलाते हैं जिसकी तरफ सभी नबियों ने बुलाया। यह एक बहुत बड़ी खुशखबरी है कि हमारा दीन अल्लाह का पसंदीदा दीन है, और जो कोई इसे अपनाए, वह उसी राह पर चलता है जिस पर सभी नबी और सिद्दीक़ीन चले। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने नबी ﷺ पर पूरा यक़ीन रखना चाहिए और उनकी लाई हुई सच्चाई पर अटल रहना चाहिए, क्योंकि यही कामयाबी की राह है।
📜 आयत 35-39 — सूरा अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 37
सूरा अस-साफ्फात आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बल्कि ये तो हक़ बात लेकर आया है और (अगले)…सूरा आयत 37/182 — सूरा अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अस-साफ्फात सुनें, सूरा अस-साफ्फात अनुवाद, सूरा अस-साफ्फात mp3, सूरा अस-साफ्फात pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अस-साफ्फात
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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