अस-साफ्फात · 37/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
بَلْ جَاءَ بِالْحَقِّ وَصَدَّقَ الْمُرْسَلِينَ ۝٣٧
bal jaaa`a bilhaqqi wa saddaqal mursaleen
📖 हिंदी अर्थ
बल्कि ये तो हक़ बात लेकर आया है और (अगले) पैग़म्बरों की तसदीक़ करता है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, अर्थात् सच्चा दीन (धर्म) और सच्ची शिक्षा।
  • صَدَّقَ الْمُرْسَلِينَ: पिछले सभी नबियों और रसूलों की पुष्टि की, उनके लाए हुए संदेश को सच माना।

तफसीर (व्याख्या):

काफिरों ने नबी करीम ﷺ पर झूठा आरोप लगाया था कि वे जादूगर, शायर या दीवाने हैं। अल्लाह तआला ने उनके इस झूठे इल्ज़ाम का जवाब देते हुए फ़रमाया कि हक़ीक़त इसके उलट है। आप ﷺ कोई झूठे दावेदार नहीं, बल्कि सच्चाई लेकर आए हैं। आप ﷺ कुरआन लेकर आए, जो सच्चाई और सच्चे दीन पर आधारित है। आपने लोगों को अल्लाह की वहदानियत (एकता) की ओर बुलाया और उसी तौहीद की दावत दी जो पिछले सभी नबियों की दावत थी। आप ﷺ ने उन सभी रसूलों की तस्दीक़ की, जो आपसे पहले आए, और उनके लाए हुए पैग़ाम को सच माना। आप ﷺ ने उनकी शिक्षाओं में कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसी सच्चाई को पेश किया जो हज़रत आदम से लेकर हज़रत ईसा तक सभी नबियों का पैग़ाम रही है।

यानी आप ﷺ का मिशन कोई नया और अलग नहीं था, बल्कि यह वही सच्चा मार्ग था जो अल्लाह ने हर ज़माने में अपने नबियों के ज़रिए भेजा। आप ﷺ ने उसी एक अल्लाह की इबादत की दावत दी, उसी के अहकाम (आदेशों) को पेश किया और आख़िरत (क़यामत के दिन) की सच्चाई की गवाही दी। यही वह सच्चाई है जिसे काफिरों ने झुठलाया, लेकिन हक़ तो हक़ है, चाहे उसे झुठलाने वाले कितने ही क्यों न हों।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि सच्चाई हमेशा स्पष्ट और स्थिर होती है। इस्लाम कोई नया दीन नहीं, बल्कि उन्हीं सच्चाइयों का नाम है जो अल्लाह ने हर नबी पर उतारीं। इसलिए जब हम इस्लाम की दावत देते हैं, तो हम दुनिया को उसी सच्चाई की तरफ बुलाते हैं जिसकी तरफ सभी नबियों ने बुलाया। यह एक बहुत बड़ी खुशखबरी है कि हमारा दीन अल्लाह का पसंदीदा दीन है, और जो कोई इसे अपनाए, वह उसी राह पर चलता है जिस पर सभी नबी और सिद्दीक़ीन चले। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने नबी ﷺ पर पूरा यक़ीन रखना चाहिए और उनकी लाई हुई सच्चाई पर अटल रहना चाहिए, क्योंकि यही कामयाबी की राह है।



📜 आयत 35-39 — अस-साफ्फात

35إِنَّهُمْ كَانُوا إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ
कि जब उनसे कहा जाता था कि खुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो अकड़ा करते थे
36وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُو آلِهَتِنَا لِشَاعِرٍ مَّجْنُونٍ
और ये लोग कहते थे कि क्या एक पागल शायर के लिए हम अपने माबूदों को छोड़ बैठें (अरे कम्बख्तों ये शायर या पागल नहीं)
37بَلْ جَاءَ بِالْحَقِّ وَصَدَّقَ الْمُرْسَلِينَ
बल्कि ये तो हक़ बात लेकर आया है और (अगले) पैग़म्बरों की तसदीक़ करता है
38إِنَّكُمْ لَذَائِقُو الْعَذَابِ الْأَلِيمِ
तुम लोग (अगर न मानोगे) तो ज़रूर दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखोगे
39وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और तुम्हें तो उसके किये का बदला दिया जाएगा जो (जो दुनिया में) करते रहे
अस-साफ्फातकुरान सूची
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37आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 37

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Tuesday, August 18, 2026

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