अस-साफ्फात · 36/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُو آلِهَتِنَا لِشَاعِرٍ مَّجْنُونٍ ۝٣٦
Wa yaqooloona a`innaa lataarikooo aalihatinaa lishaa`irim majnoon
📖 हिंदी अर्थ
और ये लोग कहते थे कि क्या एक पागल शायर के लिए हम अपने माबूदों को छोड़ बैठें (अरे कम्बख्तों ये शायर या पागल नहीं)
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • آلِهَتِنَا – हमारे पूज्य (देवता/मूर्तियाँ)
  • لِشَاعِرٍ مَّجْنُونٍ – एक कवि (शायर) और पागल (दीवाने) के लिए

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस समय के काफ़िरों (मक्का के मुशरिकों) के उस कथन को बयान करती है जो वे पैगंबर मुहम्मद ﷺ के बारे में कहा करते थे। जब रसूलुल्लाह ﷺ ने उन्हें एक ईश्वर (अल्लाह) की इबादत की ओर बुलाया और उनके बुतों (मूर्तियों) की पूजा से रोका, तो वे हैरान और क्रोधित होकर कहते थे: "क्या हम अपने पूज्य देवताओं को छोड़ दें, सिर्फ एक कवि और पागल आदमी की बात पर?" — उनका इशारा पैगंबर ﷺ की ओर था। वे आपको शायर और दीवाना कहकर बदनाम करना चाहते थे, ताकि लोग आपकी बात न सुनें।

यह उनकी अज्ञानता और हठधर्मिता की पराकाष्ठा थी कि उन्होंने सबसे सच्चे और सबसे समझदार इंसान को पागल कहा। उन्होंने यह नहीं सोचा कि जो व्यक्ति इतनी पवित्र और सच्ची बात कह रहा है, वह कैसे पागल हो सकता है? उनके पास कोई तर्क नहीं था, इसलिए वे झूठे आरोप लगाते थे।

यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य के मार्ग पर चलने वालों को हमेशा विरोध और तानों का सामना करना पड़ता है। लेकिन जो लोग अल्लाह की राह पर स्थिर रहते हैं, अल्लाह उन्हें कभी अकेला नहीं छोड़ता। पैगंबर ﷺ ने इन तानों की परवाह नहीं की और अपना संदेश पूरे धैर्य और हिम्मत से पहुँचाया। आज पूरी दुनिया उन्हीं की दी हुई रोशनी में चल रही है, और वे काफ़िरों के नाम इतिहास के पन्नों में मिट चुके हैं।

यह हमारे लिए सबक है कि हम सत्य की राह पर चलते समय लोगों के तानों, उपहास और आरोपों से विचलित न हों। अल्लाह का वादा है कि वह अपने सच्चे बंदों की मदद करता है और उन्हें कामयाबी देता है। जैसे पैगंबर ﷺ को अंततः पूरी अरब की जीत मिली, वैसे ही हर सच्चे मुसलमान को दुनिया और आख़िरत में कामयाबी मिलेगी। अल्लाह हमें सच्चाई पर स्थिर रहने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 34-38 — अस-साफ्फात

34إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِالْمُجْرِمِينَ
और हम तो गुनाहगारों के साथ यूँ ही किया करते हैं ये लोग ऐसे (शरीर) थे
35إِنَّهُمْ كَانُوا إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ
कि जब उनसे कहा जाता था कि खुदा के सिवा कोई माबूद नहीं तो अकड़ा करते थे
36وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُو آلِهَتِنَا لِشَاعِرٍ مَّجْنُونٍ
और ये लोग कहते थे कि क्या एक पागल शायर के लिए हम अपने माबूदों को छोड़ बैठें (अरे कम्बख्तों ये शायर या पागल नहीं)
37بَلْ جَاءَ بِالْحَقِّ وَصَدَّقَ الْمُرْسَلِينَ
बल्कि ये तो हक़ बात लेकर आया है और (अगले) पैग़म्बरों की तसदीक़ करता है
38إِنَّكُمْ لَذَائِقُو الْعَذَابِ الْأَلِيمِ
तुम लोग (अगर न मानोगे) तो ज़रूर दर्दनाक अज़ाब का मज़ा चखोगे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीRevelation
36आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 36

सूरा अस-साफ्फात आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये लोग कहते थे कि क्या एक पागल शायर…

सूरा आयत 36/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए