अस-साफ्फात · 54/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
قَالَ هَلْ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ ۝٥٤
Qaala hal antum muttali`oon
📖 हिंदी अर्थ
(फिर अपने बेहश्त के साथियों से कहेगा)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُطَّلِعُونَ — देखने वाले, झाँकने वाले, जानने के लिए देखने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वही मोमिन (ईमानवाला) है जो दुनिया में अपने काफ़िर साथी को आख़िरत के दिनों की याद दिलाता था और उसे अल्लाह के रसूलों पर ईमान लाने की दावत देता था। अब वही मोमिन जन्नत की नेअमतों (आशीर्वादों) में है, और अल्लाह तआला ने उसे अपने उस पुराने साथी का हाल जानने की तौफ़ीक़ दी। वह अपने जन्नती साथियों से कहता है: "क्या तुम भी मेरे साथ चलकर देखना चाहते हो कि मेरा वह दोस्त, जो आख़िरत का इनकार करता था, आज किस हाल में है?"

यह एक ऐसा दृश्य है जो ईमानवालों के लिए सबक़ और इबरत (शिक्षा) से भरा है। जब वह झाँकता है तो अपने उस साथी को जहन्नुम (नरक) के बीचों-बीच देखता है — वही साथी जो दुनिया में उसे बहकाने की कोशिश करता था, जो कहता था कि "क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ बन जाएँगे तो क्या हमें सज़ा दी जाएगी?" आज वह सच्चाई को अपनी आँखों से देख रहा है, लेकिन अब पछतावे का कोई फ़ायदा नहीं।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें बताते हैं कि जन्नत और जहन्नुम दोनों हक़ीक़त हैं। जो लोग दुनिया में ईमान लाए और नेक अमल किए, वे जन्नत में होंगे, और जिन्होंने इनकार किया और गुनाह किए, वे जहन्नुम में होंगे। यह अल्लाह का न्याय है जो कभी ग़लत नहीं होता।

दावती पहलू (प्रचार पहलू):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारा आज का हर अमल हमारे कल के ठिकाने को तय कर रहा है। जिस तरह उस मोमिन ने दुनिया में अपने दोस्त को सच्चाई की दावत दी, लेकिन उसने नहीं मानी — आज वह मोमिन जन्नत में है और उसका दोस्त जहन्नुम में। यह हमारे लिए सबसे बड़ी नसीहत है कि हम अपने दोस्तों, रिश्तेदारों और जाननेवालों को अच्छी बात की दावत दें, और खुद भी उस पर अमल करें। अल्लाह तआला हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें जन्नत की नेअमतों से नवाज़े। आमीन।



📜 आयत 52-56 — अस-साफ्फात

52يَقُولُ أَإِنَّكَ لَمِنَ الْمُصَدِّقِينَ
और (मुझसे) कहा करता था कि क्या तुम भी क़यामत की तसदीक़ करने वालों में हो
53أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَدِينُونَ
(भला जब हम मर जाएँगे) और (सड़ गल कर) मिट्टी और हव्ी (होकर) रह जाएँगे तो क्या हमको दोबारा ज़िन्दा करके हमारे (आमाल का) बदला दिया जाएगा
54قَالَ هَلْ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ
(फिर अपने बेहश्त के साथियों से कहेगा)
55فَاطَّلَعَ فَرَآهُ فِي سَوَاءِ الْجَحِيمِ
तो क्या तुम लोग भी (मेरे साथ उसे झांक कर देखोगे) ग़रज़ झाँका तो उसे बीच जहन्नुम में (पड़ा हुआ) देखा
56قَالَ تَاللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ
(ये देख कर बेसाख्ता) बोल उठेगा कि खुदा की क़सम तुम तो मुझे भी तबाह करने ही को थे
अस-साफ्फातकुरान सूची
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अनुवाद — अस-साफ्फात 54

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Tuesday, August 18, 2026

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