अस-साफ्फात · 66/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَإِنَّهُمْ لَآكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِئُونَ مِنْهَا الْبُطُونَ ۝٦٦
Fa innahum la aakiloona minhaa famaali`oona minhal butoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर ये (जहन्नुमी लोग) यक़ीनन उसमें से खाएँगे फिर उसी से अपने पेट भरेंगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَآكِلُونَ: अवश्य खाने वाले होंगे।
  • فَمَالِئُونَ: फिर भरने वाले होंगे।
  • الْبُطُونَ: पेट (बहुवचन)।

तफ़सीर:

यह आयत उस भयानक पेड़ (ज़क्कूम) का हाल बयान कर रही है जो जहन्नम की तह में उगता है। इसका फल इतना कुरूप और घिनौना है कि उसे शैतानों के सिरों जैसा बताया गया है। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि ये मुशरिकीन (काफ़िर) उस पेड़ के फल को खाने पर मजबूर होंगे, चाहे वह कितना ही बुरा और कड़वा क्यों न हो। उनकी भूख इतनी सख्त होगी कि वे उस घिनौने फल को भी खाएँगे और अपने पेट उसी से भर लेंगे, यहाँ तक कि उनका पेट और अधिक ग्रहण न कर सकेगा।

यह उन लोगों का अंजाम है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की नेमतों की कद्र नहीं की और उनके शुक्र के बजाय कुफ़्र और नाफ़रमानी की राह अपनाई। वे आज दुनिया में पेट भर खाते हैं और अल्लाह की दी हुई रिज़्क़ को भूल जाते हैं, लेकिन आख़िरत में उन्हें ऐसा खाना मिलेगा जो उनके लिए अज़ाब का ज़रिया बनेगा।

यह आयत हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की दी हुई नेमतों पर शुक्र करें और उसकी नाफ़रमानी से बचें। जो लोग दुनिया में अल्लाह की राह से भटक जाते हैं और अपनी ख्वाहिशों की पैरवी करते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाह हमें सीधी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें जहन्नम के अज़ाब से महफ़ूज़ रखे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 64-68 — अस-साफ्फात

64إِنَّهَا شَجَرَةٌ تَخْرُجُ فِي أَصْلِ الْجَحِيمِ
ये वह दरख्त हैं जो जहन्नुम की तह में उगता है
65طَلْعُهَا كَأَنَّهُ رُءُوسُ الشَّيَاطِينِ
उसके फल ऐसे (बदनुमा) हैं गोया (हू बहू) साँप के फन जिसे छूते दिल डरे
66فَإِنَّهُمْ لَآكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِئُونَ مِنْهَا الْبُطُونَ
फिर ये (जहन्नुमी लोग) यक़ीनन उसमें से खाएँगे फिर उसी से अपने पेट भरेंगे
67ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًا مِّنْ حَمِيمٍ
फिर उसके ऊपर से उन को खूब खौलता हुआ पानी (पीप वग़ैरह में) मिला मिलाकर पीने को दिया जाएगा
68ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى الْجَحِيمِ
फिर (खा पीकर) उनको जहन्नुम की तरफ यक़ीनन लौट जाना होगा
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अनुवाद — अस-साफ्फात 66

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Tuesday, August 18, 2026

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