अस-साफ्फात · 67/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًا مِّنْ حَمِيمٍ ۝٦٧
Summa inna lahum `alaihaa lashawbam min hameem
📖 हिंदी अर्थ
फिर उसके ऊपर से उन को खूब खौलता हुआ पानी (पीप वग़ैरह में) मिला मिलाकर पीने को दिया जाएगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • شَوْبًا: मिलावट, मिश्रण (यानी किसी चीज़ में मिलाया गया दूसरा पदार्थ)।
  • حَمِيمٍ: अत्यधिक गर्म पानी जो अपनी गर्मी की अंतिम हद तक पहुँच चुका हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन काफ़िरों और मुशरिकों की सज़ा का एक और भयानक पहलू बयान कर रहे हैं, जिन्होंने दुनिया में अल्लाह के साथ कुफ़्र किया और उसके रसूलों को झुठलाया। पिछली आयतों में बताया गया कि वे जहन्नम के पेड़ "ज़क़्क़ूम" से खाएँगे और उससे अपने पेट भरेंगे। अब इस आयत में फ़रमाया जा रहा है कि उस खाने के बाद उनके लिए एक और अज़ाब है—उन्हें पीने के लिए ऐसा पेय दिया जाएगा जो अत्यधिक गर्म पानी में मिलाया गया हो, जो उनके पेट में जाकर ज़क़्क़ूम के साथ मिलकर एक भयानक मिश्रण बन जाएगा। यह पानी अपनी गर्मी में किसी भी चीज़ से कम नहीं होगा, और जब वे इसे पीएँगे तो यह उनके अंदरूनी हिस्सों को जला देगा। यह वही चीज़ है जो क़ुरआन में कई जगह बताई गई है कि जहन्नम के लोगों को "हमीम" (खौलता हुआ पानी) पिलाया जाएगा।

यह अज़ाब उनके लिए इसलिए है क्योंकि उन्होंने दुनिया में अल्लाह की नेमतों का इनकार किया और उसके हुक्मों की अवहेलना की। वे दुनिया में शराब और आराम की चीज़ों में मग्न रहे, और आख़िरत में उन्हें यह बदला मिलेगा। यह अल्लाह का न्याय है जो बिल्कुल सटीक और हक़ पर है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और उसकी नेमतों का शुक्र करने की तरग़ीब देती है। अल्लाह ने दुनिया में हमें ठंडा पानी, साफ़ पेय और अच्छी चीज़ें दी हैं, जिनका हम आराम से इस्तेमाल करते हैं। हमें चाहिए कि इन नेमतों के लिए अल्लाह का शुक्र अदा करें और उसकी नाफ़रमानी से बचें। यह आयत हमें याद दिलाती है कि आख़िरत का अज़ाब बहुत सख्त है, और अगर हम दुनिया में अल्लाह की राह पर नहीं चलेंगे तो वहाँ पछताने के अलावा कुछ हासिल नहीं होगा। अल्लाह तआला रहम करने वाला है, उसने हमें मौका दिया है कि हम तौबा करें और अपने कर्म सुधारें। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत में गुज़ारना चाहिए, ताकि उस दिन हम इस भयानक अज़ाब से बच सकें और जन्नत की नेमतें पा सकें।

🎧 सुनें

📜 आयत 65-69 — अस-साफ्फात

65طَلْعُهَا كَأَنَّهُ رُءُوسُ الشَّيَاطِينِ
उसके फल ऐसे (बदनुमा) हैं गोया (हू बहू) साँप के फन जिसे छूते दिल डरे
66فَإِنَّهُمْ لَآكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِئُونَ مِنْهَا الْبُطُونَ
फिर ये (जहन्नुमी लोग) यक़ीनन उसमें से खाएँगे फिर उसी से अपने पेट भरेंगे
67ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًا مِّنْ حَمِيمٍ
फिर उसके ऊपर से उन को खूब खौलता हुआ पानी (पीप वग़ैरह में) मिला मिलाकर पीने को दिया जाएगा
68ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى الْجَحِيمِ
फिर (खा पीकर) उनको जहन्नुम की तरफ यक़ीनन लौट जाना होगा
69إِنَّهُمْ أَلْفَوْا آبَاءَهُمْ ضَالِّينَ
उन लोगों ने अपन बाप दादा को गुमराह पाया था
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अनुवाद — अस-साफ्फात 67

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Tuesday, August 18, 2026

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