अन-निसा · 126/176
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-निसा
وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ مُّحِيطًا ۝١٢٦
Wa lillaahi maa fis samaawaati wa maa fil ard; wa kaanal laahu bikulli shai`im muheetaa
📖 हिंदी अर्थ
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है और ख़ुदा ही सब चीज़ को (अपनी) कुदरत से घेरे हुए है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُحِيطًا (मुहीतन): घेरने वाला, अपने ज्ञान, शक्ति और नियंत्रण से हर चीज़ को अपने दायरे में लेने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत (महानता) और उसकी हुकूमत (प्रभुत्व) का एहसास कराती है। अल्लाह ही इस पूरे ब्रह्मांड का मालिक है — आसमानों में जो कुछ भी है और ज़मीन में जो कुछ भी है, सब कुछ उसी की मिल्कियत (स्वामित्व) में है। न कोई चीज़ उसकी हुकूमत से बाहर है, न कोई ज़र्रा उसके इख्तियार से आज़ाद है। हर चीज़ उसी की पैदा की हुई है, उसी की मिल्कियत में है, और उसी के इशारे पर चल रही है।

अल्लाह ने फ़रमाया कि वह हर चीज़ को "मुहीत" है — यानी उसका इल्म (ज्ञान), उसकी क़ुदरत (शक्ति) और उसका इंतज़ाम हर चीज़ को घेरे हुए है। उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है, न ज़मीन की गहराइयों में, न आसमान की बुलंदियों में, न दिलों के राज़ में, न ख़यालों की परतों में। उसकी क़ुदरत हर चीज़ पर हावी है, और उसका हुक्म हर चीज़ पर जारी है।

यह आयत मोमिन के दिल में यक़ीन की जड़ें मज़बूत करती है कि जब अल्लाह हर चीज़ का मालिक है और हर चीज़ पर उसकी पकड़ है, तो फिर उसके सिवा किसी और से डरने की क्या ज़रूरत? और उसके सिवा किसी और से उम्मीद रखने की क्या हाजत? जो इंसान यह समझ ले कि अल्लाह हर चीज़ पर मुहीत है, उसका दिल तमाम परेशानियों में भी सुकून पाता है, क्योंकि वह जानता है कि उसका रब हर चीज़ पर क़ाबू रखता है।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हम अपनी ज़िंदगी के हर मामले में अल्लाह की मर्ज़ी के ताबे रहें, क्योंकि हमारा मालिक वही है। जब हम यह मान लेंगे कि हमारा सब कुछ अल्लाह का है, तो हमारे अंदर इख़लास (निष्ठा) पैदा होगी, हमारे अमल दुरुस्त होंगे, और हमारी नीयतें पाक होंगी। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रज़ा (प्रसन्नता) तक पहुँचाता है और दुनिया व आख़िरत की कामयाबी की ओर ले जाता है।

तो ऐ इंसान! अपने दिल को इस हक़ीक़त पर जमा ले कि अल्लाह ही सब कुछ है, और उसके सिवा सब कुछ फ़ानी (नाशवान) है। उसी की तरफ़ रुजू कर, उसी पर भरोसा कर, और उसी की इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ार — क्योंकि वही तेरा मालिक है, और वही तेरी हर ज़रूरत को जानता है और उस पर क़ादिर है।



📜 आयत 124-128 — सूरा अन-निसा

124وَمَن يَعْمَلْ مِنَ الصَّالِحَاتِ مِن ذَكَرٍ أَوْ أُنثَىٰ وَهُوَ مُؤْمِنٌ فَأُولَٰئِكَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ وَلَا يُظْلَمُونَ نَقِيرًا
और जो शख्स अच्छे अच्छे काम करेगा (ख्वाह) मर्द हो या औरत और ईमानदार (भी) हो तो ऐसे लोग बेहिश्त में (बेखटके) जा पहुंचेंगे और उनपर तिल भी ज़ुल्म न किया जाएगा
125وَمَنْ أَحْسَنُ دِينًا مِّمَّنْ أَسْلَمَ وَجْهَهُ لِلَّهِ وَهُوَ مُحْسِنٌ وَاتَّبَعَ مِلَّةَ إِبْرَاهِيمَ حَنِيفًا ۗ وَاتَّخَذَ اللَّهُ إِبْرَاهِيمَ خَلِيلًا
और उस शख्स से दीन में बेहतर कौन होगा जिसने ख़ुदा के सामने अपना सरे तसलीम झुका दिया और नेको कार भी है और इबराहीम के तरीके पर चलता है जो बातिल से कतरा कर चलते थे और ख़ुदा ने इब्राहिम को तो अपना ख़लिस दोस्त बना लिया
126وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۚ وَكَانَ اللَّهُ بِكُلِّ شَيْءٍ مُّحِيطًا
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है और ख़ुदा ही सब चीज़ को (अपनी) कुदरत से घेरे हुए है
127وَيَسْتَفْتُونَكَ فِي النِّسَاءِ ۖ قُلِ اللَّهُ يُفْتِيكُمْ فِيهِنَّ وَمَا يُتْلَىٰ عَلَيْكُمْ فِي الْكِتَابِ فِي يَتَامَى النِّسَاءِ اللَّاتِي لَا تُؤْتُونَهُنَّ مَا كُتِبَ لَهُنَّ وَتَرْغَبُونَ أَن تَنكِحُوهُنَّ وَالْمُسْتَضْعَفِينَ مِنَ الْوِلْدَانِ وَأَن تَقُومُوا لِلْيَتَامَىٰ بِالْقِسْطِ ۚ وَمَا تَفْعَلُوا مِنْ خَيْرٍ فَإِنَّ اللَّهَ كَانَ بِهِ عَلِيمًا
(ऐ रसूल) ये लोग तुमसे (यतीम लड़कियों) से निकाह के बारे में फ़तवा तलब करते हैं तुम उनसे कह दो कि ख़ुदा तुम्हें उनसे (निकाह करने) की इजाज़त देता है और जो हुक्म मनाही का कुरान में तुम्हें (पहले) सुनाया जा चुका है वह हक़ीक़तन उन यतीम लड़कियों के वास्ते था जिन्हें तुम उनका मुअय्यन किया हुआ हक़ नहीं देते और चाहते हो (कि यूं ही) उनसे निकाह कर लो और उन कमज़ोर नातवॉ (कमजोर) बच्चों के बारे में हुक्म फ़रमाता है और (वो) ये है कि तुम यतीमों के हुक़ूक़ के बारे में इन्साफ पर क़ायम रहो और (यक़ीन रखो कि) जो कुछ तुम नेकी करोगे तो ख़ुदा ज़रूर वाक़िफ़कार है
128وَإِنِ امْرَأَةٌ خَافَتْ مِن بَعْلِهَا نُشُوزًا أَوْ إِعْرَاضًا فَلَا جُنَاحَ عَلَيْهِمَا أَن يُصْلِحَا بَيْنَهُمَا صُلْحًا ۚ وَالصُّلْحُ خَيْرٌ ۗ وَأُحْضِرَتِ الْأَنفُسُ الشُّحَّ ۚ وَإِن تُحْسِنُوا وَتَتَّقُوا فَإِنَّ اللَّهَ كَانَ بِمَا تَعْمَلُونَ خَبِيرًا
और अगर कोई औरत अपने शौहर की ज्यादती व बेतवज्जोही से (तलाक़ का) ख़ौफ़ रखती हो तो मियॉ बीवी के बाहम किसी तरह मिलाप कर लेने में दोनों (में से किसी पर) कुछ गुनाह नहीं है और सुलह तो (बहरहाल) बेहतर है और बुख्ल से तो क़रीब क़रीब हर तबियत के हम पहलू है और अगर तुम नेकी करो और परहेजदारी करो तो ख़ुदा तुम्हारे हर काम से ख़बरदार है (वही तुमको अज्र देगा)
अन-निसाकुरान सूची
176आयत
मदनीअवतरण स्थान
126आयत

अनुवाद — अन-निसा 126

सूरा अन-निसा आयत 126 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन…

सूरा आयत 126/176 — सूरा अन-निसा النساء (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-निसा सुनें, सूरा अन-निसा अनुवाद, सूरा अन-निसा mp3, सूरा अन-निसा pdf. आयत 124–128. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए