Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَقَرَّبَهُ: उसे (भुना हुआ बछड़ा) उनके सामने पेश किया।
- أَلَا تَأْكُلُونَ: क्या तुम खाते नहीं? (यह विनम्रता और प्रेम के साथ आमंत्रित करने का अंदाज़ है)।
तफ़सीर:
जब हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपने मेहमानों (फ़रिश्तों) को देखा कि वे खाना नहीं खा रहे हैं, तो वे चुपचाप अपने घरवालों के पास गए और एक मोटा-ताज़ा बछड़ा लेकर आए। उसे ज़बह किया, भूनकर अच्छी तरह पकाया और फिर उसे उनके सामने रख दिया। उन्होंने बड़े ही नर्म लहजे और मुहब्बत के साथ उन्हें खाने की दावत दी और कहा: "क्या आप खाना नहीं खाएँगे?"
यह हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की सुन्नत और अदब था कि वे मेहमानों के सामने खाना पेश करते थे और खुद उनके साथ खाना शुरू नहीं करते थे, बल्कि पहले मेहमानों को तक़द्दुम (आगे बढ़कर) खाने की तरग़ीब देते थे। उनका यह अंदाज़ बताता है कि मेहमाननवाज़ी में नर्मी, मुहब्बत और इज़्ज़त का लिहाज़ रखना चाहिए।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि जब हम किसी को खाना खिलाएँ या कोई अच्छा काम करें, तो उसे अच्छे अंदाज़ में, बिना किसी ज़ोर-ज़बरदस्ती के, पेश करें। इस्लाम में मेहमाननवाज़ी को बहुत अहमियत दी गई है और यह ईमान की निशानी बताई गई है।
यहाँ हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम का यह वाक़या हमें सिखाता है कि नेक काम करते समय अल्लाह पर भरोसा रखें और अपने मेहमानों की खातिरदारी में कोई कसर न छोड़ें। अल्लाह तआला ऐसे लोगों से मुहब्बत करता है जो दूसरों की भलाई के लिए कोशिश करते हैं।
जब मेहमानों ने खाना नहीं खाया, तो हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को उनसे थोड़ा अंदेशा हुआ, लेकिन फिर उन्होंने अल्लाह पर भरोसा रखा। यह हमारे लिए भी सबक है कि हर हाल में अल्लाह पर तवक्कुल रखें और उसकी रहमत से नाउम्मीद न हों।
यह क़िस्सा हमें मेहमाननवाज़ी, नर्मी, और अल्लाह पर भरोसे की तालीम देता है। आइए, हम भी अपनी ज़िंदगी में इन खूबियों को अपनाएँ और दूसरों के साथ अच्छा सुलूक करें, ताकि अल्लाह की रहमत और मुहब्बत हम पर भी हो।
📜 आयत 25-29 — सूरा अज़-ज़ारियात
अनुवाद — अज़-ज़ारियात 27
सूरा अज़-ज़ारियात आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसे उनके आगे रख दिया (फिर) कहने लगे आप…सूरा आयत 27/60 — सूरा अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ारियात सुनें, सूरा अज़-ज़ारियात अनुवाद, सूरा अज़-ज़ारियात mp3, सूरा अज़-ज़ारियात pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ारियात
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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