अन-नज्म · 20/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
وَمَنَاةَ الثَّالِثَةَ الْأُخْرَىٰ ۝٢٠
Wa manaatas saalisatal ukhraa
📖 हिंदी अर्थ
(भला ये ख़ुदा हो सकते हैं)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मनात — यह हुज़ैल और ख़ुज़ाआ क़बीलों का एक प्रसिद्ध बुत (मूर्ति) था।
  • तिसरी — यह लात और उज़्ज़ा के बाद तीसरा बुत था।
  • दूसरी (उख़रा) — यहाँ यह शब्द नीचता और तुच्छता दर्शाने के लिए आया है, यानी कमज़ोर और हक़ीर।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में मुशरिकीन से सवाल कर रहा है कि तुमने लात, उज़्ज़ा और मनात — इन तीनों बुतों को पूजने के लिए चुन रखा है। ये तीनों तुम्हारे बनाए हुए नाम हैं, जिनकी कोई हक़ीक़त नहीं। ज़रा ग़ौर करो — क्या इनमें से कोई भी मूर्ति तुम्हें कोई नुक़्सान या फ़ायदा पहुँचाने की ताक़त रखती है? क्या ये तुम्हारी कोई मुश्किल हल कर सकती हैं? क्या ये तुम्हें रिज़्क़ दे सकती हैं या तुम्हारी दुआएँ सुन सकती हैं?

यह आयत उन लोगों की नादानी पर नक़्ता लगाती है जो पत्थरों और मूर्तियों को अल्लाह का शरीक बनाते हैं। अल्लाह तो वह है जिसने आसमान और ज़मीन पैदा किए, जो ज़िंदगी और मौत देता है, जो सब कुछ सुनता और जानता है। फिर इन बेजान बुतों को उसका शरीक कैसे बनाया जा सकता है?

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि तौहीद (अल्लाह की एकता) ही असली सच्चाई है। अल्लाह के सिवा कोई मददगार नहीं, कोई पनाह देने वाला नहीं। जो लोग अल्लाह के सिवा किसी और से उम्मीदें बाँधते हैं, वे उस मकड़ी की तरह हैं जो अपना घर बुनती है, और सबसे कमज़ोर घर मकड़ी का ही होता है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम अपनी सारी इबादत, अपनी सारी दुआएँ और अपनी सारी उम्मीदें सिर्फ़ और सिर्फ़ अल्लाह ही से जोड़ें। वही सुनने वाला है, वही जवाब देने वाला है। जब हम सीधे अल्लाह से जुड़ते हैं, तो हमारा दिल सुकून पाता है और हमारी ज़िंदगी में बरकत आती है। अल्लाह हमें सच्चे दिल से उसकी इबादत करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 18-22 — सूरा अन-नज्म

18لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ آيَاتِ رَبِّهِ الْكُبْرَىٰ
और उन्होने यक़ीनन अपने परवरदिगार (की क़ुदरत) की बड़ी बड़ी निशानियाँ देखीं
19أَفَرَأَيْتُمُ اللَّاتَ وَالْعُزَّىٰ
तो भला तुम लोगों ने लात व उज्ज़ा और तीसरे पिछले मनात को देखा
20وَمَنَاةَ الثَّالِثَةَ الْأُخْرَىٰ
(भला ये ख़ुदा हो सकते हैं)
21أَلَكُمُ الذَّكَرُ وَلَهُ الْأُنثَىٰ
क्या तुम्हारे तो बेटे हैं और उसके लिए बेटियाँ
22تِلْكَ إِذًا قِسْمَةٌ ضِيزَىٰ
ये तो बहुत बेइन्साफ़ी की तक़सीम है
अन-नज्मकुरान सूची
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20आयत

अनुवाद — अन-नज्म 20

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Thursday, October 1, 2026

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