अन-नज्म · 21/62
अनुवाद उच्चारण — अन-नज्म
أَلَكُمُ الذَّكَرُ وَلَهُ الْأُنثَىٰ ۝٢١
A-lakumuz zakaru wa lahul unsaa
📖 हिंदी अर्थ
क्या तुम्हारे तो बेटे हैं और उसके लिए बेटियाँ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الذَّكَر: बेटा (पुरुष संतान)
  • الْأُنْثَى: बेटी (स्त्री संतान)

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मुशरिकीन (बहुदेववादियों) की निंदा कर रही है जो अल्लाह के बारे में बड़ी बेशर्मी की बातें कहते थे। वे कहते थे कि फ़रिश्ते अल्लाह की बेटियाँ हैं, और वे अपनी मूर्तियों को भी अल्लाह की बेटियाँ कहते थे। अल्लाह तआला इस आयत में उनसे पूछ रहे हैं: "क्या तुम्हारे लिए बेटे हैं और अल्लाह के लिए बेटियाँ?"

यानी जब तुम खुद बेटियों को अपने लिए पसंद नहीं करते — बल्कि अरब के लोग बेटी की पैदाइश पर शर्मिंदा होते थे और कुछ तो बेटी को ज़िंदा दफ़्न कर देते थे — तो फिर तुमने अल्लाह के लिए बेटियाँ कैसे मान लीं? यह कैसा बंटवारा है कि तुम अपने लिए सबसे अच्छा चुनते हो (बेटे) और अल्लाह के लिए वह चीज़ तय करते हो जिसे तुम खुद बुरा समझते हो (बेटियाँ)!

यह आयत उनके इस बेतुके और बेहूदा तर्क को खारिज करती है। अल्लाह तआला इंसानी सोच और उनकी पसंद-नापसंद से बिल्कुल पाक और बेनियाज़ है। वह किसी की औलाद से नहीं, न वह किसी का बाप है और न किसी का बेटा। वह हर कमी और हर उस चीज़ से पाक है जो ये लोग उसके बारे में कहते हैं।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह के बारे में हमें वही कहना चाहिए जो उसने खुद अपने बारे में बताया है। हमें अपनी सोच, अपनी पसंद या अपनी कल्पना से अल्लाह के बारे में कोई बात नहीं बनानी चाहिए। अल्लाह हर उस चीज़ से पाक है जो लोग उसके बारे में ग़लत कहते हैं।

यह आयत हमें अल्लाह की पाकी और उसकी बुज़ुर्गी का एहसास दिलाती है। जब हम यह समझ जाते हैं कि अल्लाह कितना महान और बेनियाज़ है, तो हमारा दिल उसकी इबादत में झुक जाता है और हम उसकी तारीफ़ करते हैं कि वह हर ऐब से पाक है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के बारे में सिर्फ़ वही बातें कहें जो कुरआन और सुन्नत में आई हैं, और उसकी पाकी को अपने दिलों में बिठाएँ।



📜 आयत 19-23 — अन-नज्म

19أَفَرَأَيْتُمُ اللَّاتَ وَالْعُزَّىٰ
तो भला तुम लोगों ने लात व उज्ज़ा और तीसरे पिछले मनात को देखा
20وَمَنَاةَ الثَّالِثَةَ الْأُخْرَىٰ
(भला ये ख़ुदा हो सकते हैं)
21أَلَكُمُ الذَّكَرُ وَلَهُ الْأُنثَىٰ
क्या तुम्हारे तो बेटे हैं और उसके लिए बेटियाँ
22تِلْكَ إِذًا قِسْمَةٌ ضِيزَىٰ
ये तो बहुत बेइन्साफ़ी की तक़सीम है
23إِنْ هِيَ إِلَّا أَسْمَاءٌ سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا أَنزَلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَمَا تَهْوَى الْأَنفُسُ ۖ وَلَقَدْ جَاءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ الْهُدَىٰ
ये तो बस सिर्फ नाम ही नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिए हैं, ख़ुदा ने तो इसकी कोई सनद नाज़िल नहीं की ये लोग तो बस अटकल और अपनी नफ़सानी ख्वाहिश के पीछे चल रहे हैं हालॉकि उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ से हिदायत भी आ चुकी है
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Tuesday, August 18, 2026

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