अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِنْ هِيَ إِلَّا أَسْمَاءٌ – ये (मूर्तियाँ) केवल नाम हैं, कोई वास्तविकता नहीं रखतीं।
- سَمَّيْتُمُوهَا – तुमने उन्हें (देवता) के नाम दिए हैं।
- سُلْطَانٍ – कोई प्रमाण या आधिकारिक साक्ष्य।
- الظَّنَّ – केवल अटकल और भ्रम।
- مَا تَهْوَى الْأَنفُسُ – वह जो मन की इच्छाएँ (बिना सोचे-समझे) चाहती हैं।
- الْهُدَى – सीधा मार्ग, सत्य का ज्ञान।
विस्तृत तफसीर:
यह आयत उन लोगों के भ्रम को तोड़ती है जो मूर्तियों को पूजते हैं और उन्हें देवता का दर्जा देते हैं। अल्लाह तआला फरमाता है कि ये मूर्तियाँ और ये देवता जिन्हें तुम पुकारते हो, वे केवल नाम हैं — खाली नाम, जिनके पीछे कोई हकीकत नहीं। न उनमें कोई शक्ति है, न वे किसी को नुकसान या फायदा पहुँचा सकते हैं। ये नाम तुमने और तुम्हारे बाप-दादाओं ने अपनी मनमानी से रख लिए थे, बिना किसी सच्चे आधार के। अल्लाह ने इनके लिए कोई प्रमाण या हुज्जत नाज़िल नहीं की।
फिर अल्लाह तआला उनके अनुसरण के बारे में बताता है कि ये लोग किसी सच्चाई या ज्ञान पर नहीं चल रहे, बल्कि केवल अटकल (गुमान) और अपनी नफ्स की इच्छाओं का पीछा कर रहे हैं। शैतान ने उनके दिलों में इन मूर्तियों की महिमा को सजाकर पेश किया, और उन्होंने बिना सोचे-समझे उसे मान लिया। यह उनकी फितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) से विचलन है, क्योंकि इंसान की पाक फितरत उसे सिर्फ अल्लाह की इबादत की ओर बुलाती है।
आयत के अंत में अल्लाह तआला अपनी बड़ी रहमत का जिक्र करता है — उसने इन लोगों के पास अपने नबी ﷺ के माध्यम से हिदायत (मार्गदर्शन) भेजा, जो उन्हें अंधकार से निकालकर प्रकाश की ओर लाने वाला था। कुरआन और सुन्नत में वह सब कुछ मौजूद है जो उन्हें सत्य तक पहुँचा सकता था, लेकिन उन्होंने उसे ठुकरा दिया और अपनी जिद पर अड़े रहे।
दावती पहलू (आमंत्रण का दृष्टिकोण):
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई को कभी अटकल और इच्छाओं पर नहीं बनाया जा सकता। इंसान को चाहिए कि वह अपने जीवन में हर मामले में अल्लाह की भेजी हुई हिदायत को ही अपनाए। आज भी बहुत से लोग अपने पूर्वजों की रीतियों और अपनी इच्छाओं को पकड़े हुए हैं, जबकि अल्लाह ने हमें कुरआन और सुन्नत के रूप में सबसे स्पष्ट मार्गदर्शन दिया है। यह आयत हमें बुलाती है कि हम अपनी नफ्स की इच्छाओं और अंधी परंपराओं को छोड़कर उस सच्चाई को अपनाएँ जो अल्लाह ने अपने नबी ﷺ के द्वारा भेजी है। यही हमारी कामयाबी और सच्ची भलाई का रास्ता है। जो व्यक्ति इस हिदायत को पकड़ लेता है, वह दुनिया और आखिरत दोनों में सफल होता है।
📜 आयत 21-25 — अन-नज्म
अनुवाद — अन-नज्म 23
सूरा अन-नज्म आयत 23 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये तो बस सिर्फ नाम ही नाम है जो तुमने…सूरा आयत 23/62 — अन-नज्म النجم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नज्म सुनें, अन-नज्म अनुवाद, अन-नज्म mp3, अन-नज्म pdf. आयत 21–25. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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