अन-नज्म · 24/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
أَمْ لِلْإِنسَانِ مَا تَمَنَّىٰ ۝٢٤
Am lil insaani maa taman naa
📖 हिंदी अर्थ
क्या जिस चीज़ की इन्सान तमन्ना करे वह उसे ज़रूर मिलती है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَمْ – क्या (प्रश्नवाचक, इन्कार के अर्थ में)
  • لِلْإِنْسَانِ – इंसान के लिए
  • مَا تَمَنَّى – जो वह चाहता है / जिसकी वह कामना करता है

तफ़सीर:

यह आयत उन लोगों के बारे में है जो मूर्तियों और झूठे देवताओं की शिफ़ाअत (सिफ़ारिश) की उम्मीद रखते हैं। वे सोचते हैं कि ये मूर्तियाँ उन्हें अल्लाह के पास पहुँचा देंगी और उनकी सिफ़ारिश कर देंगी, जिससे उनकी सारी इच्छाएँ पूरी हो जाएँगी। अल्लाह तआला इस आयत में उनकी इस ग़लतफ़हमी को चुनौती देते हुए फ़रमाते हैं: क्या इंसान के लिए वह सब कुछ है जो वह चाहता है? क्या उसकी हर कामना पूरी होती है? हरगिज़ नहीं!

यह आयत एक बड़ी हक़ीक़त की तरफ़ इशारा करती है — इंसान अक्सर अपनी ख़्वाहिशों को पूरा करने के लिए झूठे सहारे ढूँढता है। वह सोचता है कि अगर वह किसी मूर्ति, किसी संत, या किसी और चीज़ को अपना वसीला बना ले, तो उसकी मन्नतें पूरी हो जाएँगी। लेकिन अल्लाह साफ़ फ़रमाता है कि दुनिया और आख़िरत का मामला सिर्फ़ अल्लाह के हाथ में है। न कोई मूर्ति सिफ़ारिश कर सकती है, न कोई इंसान अपनी मर्ज़ी से किसी को फ़ायदा पहुँचा सकता है। सारा इख़्तियार सिर्फ़ अल्लाह के पास है।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हम अपनी ज़िंदगी में जो भी चाहते हैं, उसे सिर्फ़ अल्लाह से माँगें। वही सब कुछ कर सकता है। मूर्तियाँ, बुत, या कोई और चीज़ — ये सब बेबस हैं। अल्लाह के सिवा कोई मददगार नहीं, कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं, जब तक अल्लाह ख़ुद इजाज़त न दे।

और यह भी याद रखें — अल्लाह की रहमत और क़ुदरत असीम है। वह चाहे तो हमारी हर जायज़ ख़्वाहिश पूरी कर सकता है, लेकिन शर्त यह है कि हम सिर्फ़ उसी की तरफ़ रुजू करें, सिर्फ़ उसी से उम्मीद रखें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी बताई हुई राह पर चलाएँ। यही सच्ची कामयाबी है — कि हम अपनी तमन्नाओं को अल्लाह के सुपुर्द कर दें और उसकी मर्ज़ी पर राज़ी रहें। जो इंसान अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसे कभी निराश नहीं करता।



📜 आयत 22-26 — सूरा अन-नज्म

22تِلْكَ إِذًا قِسْمَةٌ ضِيزَىٰ
ये तो बहुत बेइन्साफ़ी की तक़सीम है
23إِنْ هِيَ إِلَّا أَسْمَاءٌ سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا أَنزَلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَمَا تَهْوَى الْأَنفُسُ ۖ وَلَقَدْ جَاءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ الْهُدَىٰ
ये तो बस सिर्फ नाम ही नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिए हैं, ख़ुदा ने तो इसकी कोई सनद नाज़िल नहीं की ये लोग तो बस अटकल और अपनी नफ़सानी ख्वाहिश के पीछे चल रहे हैं हालॉकि उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ से हिदायत भी आ चुकी है
24أَمْ لِلْإِنسَانِ مَا تَمَنَّىٰ
क्या जिस चीज़ की इन्सान तमन्ना करे वह उसे ज़रूर मिलती है
25فَلِلَّهِ الْآخِرَةُ وَالْأُولَىٰ
आख़ेरत और दुनिया तो ख़ास ख़ुदा ही के एख्तेयार में हैं
26۞ وَكَم مِّن مَّلَكٍ فِي السَّمَاوَاتِ لَا تُغْنِي شَفَاعَتُهُمْ شَيْئًا إِلَّا مِن بَعْدِ أَن يَأْذَنَ اللَّهُ لِمَن يَشَاءُ وَيَرْضَىٰ
और आसमानों में बहुत से फरिश्ते हैं जिनकी सिफ़ारिश कुछ भी काम न आती, मगर ख़ुदा जिसके लिए चाहे इजाज़त दे दे और पसन्द करे उसके बाद (सिफ़ारिश कर सकते हैं)
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीअवतरण स्थान
24आयत

अनुवाद — अन-नज्म 24

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Thursday, October 1, 2026

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