अन-नज्म · 22/62
अनुवाद उच्चारण — अन-नज्म
تِلْكَ إِذًا قِسْمَةٌ ضِيزَىٰ ۝٢٢
Tilka izan qismatun deezaa
📖 हिंदी अर्थ
ये तो बहुत बेइन्साफ़ी की तक़सीम है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ضِيزَىٰ (दीज़ा): अर्थात टेढ़ी, अन्यायपूर्ण और बेइंसाफ़ी वाली विभाजन।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मुशरिकीन (बहुदेववादियों) की निंदा कर रही है जो अल्लाह के लिए बेटियाँ मानते थे, जबकि अपने लिए बेटों को पसंद करते थे। वे स्वयं बेटियों को अपमानजनक समझते थे, यहाँ तक कि बेटी के जन्म पर उनका चेहरा काला पड़ जाता था, लेकिन फिर भी वे अल्लाह के लिए बेटियाँ मानते थे। अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि यह तो बड़ा ही अन्यायपूर्ण और टेढ़ा विभाजन है—अपने लिए जो अच्छा है उसे रखना और अल्लाह के लिए वह चीज़ मान लेना जिसे तुम स्वयं अपने लिए पसंद नहीं करते। यह कैसी बेइंसाफ़ी है!

यह आयत उन लोगों की मानसिकता को उजागर करती है जो अपनी मनमानी से अल्लाह के बारे में झूठी बातें गढ़ते हैं। वे अपनी इच्छाओं और अहम (अहंकार) की पूर्ति के लिए अल्लाह पर आरोप लगाते हैं, जबकि अल्लाह तो हर उस चीज़ से पाक और बराअत (मुक्त) है जो वे उसके बारे में कहते हैं।

इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अल्लाह के बारे में केवल वही बात करनी चाहिए जो उसने स्वयं अपनी किताब और अपने नबी ﷺ के माध्यम से बताई है। अल्लाह की शान के बारे में अपनी मनगढ़ंत बातें बनाना सबसे बड़ा अन्याय है। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बड़ा मेहरबान और कृपालु है, उसने हमें सही रास्ता दिखाने के लिए अपने नबी भेजे और किताबें उतारीं, ताकि हम अंधेरों से निकलकर रोशनी की ओर आएँ। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की इबादत उसी तरह करें जैसा उसने हमें सिखाया है, और उसकी पाक ज़ात के बारे में किसी भी प्रकार की झूठी बात से बचें। यही सच्ची भलाई और सफलता का रास्ता है।



📜 आयत 20-24 — अन-नज्म

20وَمَنَاةَ الثَّالِثَةَ الْأُخْرَىٰ
(भला ये ख़ुदा हो सकते हैं)
21أَلَكُمُ الذَّكَرُ وَلَهُ الْأُنثَىٰ
क्या तुम्हारे तो बेटे हैं और उसके लिए बेटियाँ
22تِلْكَ إِذًا قِسْمَةٌ ضِيزَىٰ
ये तो बहुत बेइन्साफ़ी की तक़सीम है
23إِنْ هِيَ إِلَّا أَسْمَاءٌ سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا أَنزَلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَمَا تَهْوَى الْأَنفُسُ ۖ وَلَقَدْ جَاءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ الْهُدَىٰ
ये तो बस सिर्फ नाम ही नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिए हैं, ख़ुदा ने तो इसकी कोई सनद नाज़िल नहीं की ये लोग तो बस अटकल और अपनी नफ़सानी ख्वाहिश के पीछे चल रहे हैं हालॉकि उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ से हिदायत भी आ चुकी है
24أَمْ لِلْإِنسَانِ مَا تَمَنَّىٰ
क्या जिस चीज़ की इन्सान तमन्ना करे वह उसे ज़रूर मिलती है
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अनुवाद — अन-नज्म 22

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Tuesday, August 18, 2026

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