अन-नज्म · 25/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
فَلِلَّهِ الْآخِرَةُ وَالْأُولَىٰ ۝٢٥
Falillaahil aakhiratu wal oolaa
📖 हिंदी अर्थ
आख़ेरत और दुनिया तो ख़ास ख़ुदा ही के एख्तेयार में हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْآخِرَةُ (आख़िरत): परलोक, अंतिम जीवन
  • الْأُولَىٰ (उला): दुनिया, पहला जीवन

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के भ्रम को दूर करती है जो सोचते हैं कि वे अपनी इच्छा और चाहत से कुछ पा सकते हैं, या कि उनके झूठे देवता और मूर्तियाँ उन्हें कुछ दे सकती हैं। अल्लाह तआला स्पष्ट कर रहे हैं कि दुनिया और आख़िरत — दोनों का मालिक केवल अल्लाह ही है। वही तय करता है कि किसे देना है और किसे नहीं देना है, किसे सफलता देनी है और किसे नाकामी। किसी बंदे की सिर्फ़ तमन्ना कर लेने से कुछ नहीं होता, जब तक कि अल्लाह की मर्ज़ी न हो।

याद रखिए! दुनिया और आख़िरत — दोनों अल्लाह के हाथ में हैं। वह जिसे चाहे दुनिया दे, जिसे चाहे आख़िरत दे, और जिसे चाहे दोनों दे। इसलिए बुद्धिमान वही है जो अपनी तमन्नाओं को अल्लाह की रज़ा के ताबे कर ले, और उससे माँगे जो उसके लिए बेहतर हो। अल्लाह से सीधे जुड़िए, उसी से उम्मीद रखिए — क्योंकि वही सब कुछ का मालिक है। जो व्यक्ति अल्लाह पर भरोसा करता है, अल्लाह उसे वह रास्ता दिखाता है जो दुनिया और आख़िरत दोनों में भलाई का हो।



📜 आयत 23-27 — सूरा अन-नज्म

23إِنْ هِيَ إِلَّا أَسْمَاءٌ سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا أَنزَلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَمَا تَهْوَى الْأَنفُسُ ۖ وَلَقَدْ جَاءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ الْهُدَىٰ
ये तो बस सिर्फ नाम ही नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिए हैं, ख़ुदा ने तो इसकी कोई सनद नाज़िल नहीं की ये लोग तो बस अटकल और अपनी नफ़सानी ख्वाहिश के पीछे चल रहे हैं हालॉकि उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ से हिदायत भी आ चुकी है
24أَمْ لِلْإِنسَانِ مَا تَمَنَّىٰ
क्या जिस चीज़ की इन्सान तमन्ना करे वह उसे ज़रूर मिलती है
25فَلِلَّهِ الْآخِرَةُ وَالْأُولَىٰ
आख़ेरत और दुनिया तो ख़ास ख़ुदा ही के एख्तेयार में हैं
26۞ وَكَم مِّن مَّلَكٍ فِي السَّمَاوَاتِ لَا تُغْنِي شَفَاعَتُهُمْ شَيْئًا إِلَّا مِن بَعْدِ أَن يَأْذَنَ اللَّهُ لِمَن يَشَاءُ وَيَرْضَىٰ
और आसमानों में बहुत से फरिश्ते हैं जिनकी सिफ़ारिश कुछ भी काम न आती, मगर ख़ुदा जिसके लिए चाहे इजाज़त दे दे और पसन्द करे उसके बाद (सिफ़ारिश कर सकते हैं)
27إِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ لَيُسَمُّونَ الْمَلَائِكَةَ تَسْمِيَةَ الْأُنثَىٰ
जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते वह फ़रिश्तों के नाम रखते हैं औरतों के से नाम हालॉकि उन्हें इसकी कुछ ख़बर नहीं
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीअवतरण स्थान
25आयत

अनुवाद — अन-नज्म 25

सूरा अन-नज्म आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : आख़ेरत और दुनिया तो ख़ास ख़ुदा ही के एख्तेयार में…

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Thursday, October 1, 2026

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