अन-नज्म · 37/62
अनुवाद उच्चारण — अन-नज्म
وَإِبْرَاهِيمَ الَّذِي وَفَّىٰ ۝٣٧
Wa Ibraaheemal lazee waffaaa
📖 हिंदी अर्थ
और इबराहीम के (सहीफ़ों में)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَإِبْرَاهِيمَ: और इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र।
  • الَّذِي وَفَّى: जिसने (अपने कर्तव्यों को) पूरा किया, अर्थात् जो कुछ भी अल्लाह ने उसे आदेश दिया, उसे उसने पूर्ण रूप से अदा किया और अल्लाह के संदेशों को उसके बंदों तक पहुँचाया।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की उस महान शख्सियत का ज़िक्र कर रहे हैं, जिन्होंने अल्लाह के हर हुक्म को बखूबी निभाया। उन्होंने अल्लाह के सभी आदेशों को पूरा किया, चाहे वह अकेले अल्लाह की इबादत हो, या उन्हें सौंपे गए पैग़ाम को लोगों तक पहुँचाना हो। उन्होंने अपनी ज़िंदगी के हर पहलू में अल्लाह की रज़ा को मुक़द्दम रखा और अपने रब के हर फ़रमान को बजा लाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

यह ज़िक्र इसलिए किया जा रहा है ताकि लोग समझें कि अल्लाह के पैग़ाम को समझने और उस पर अमल करने की राह हमेशा से एक ही रही है। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) ने अपने जीवन में जो सच्चाई और वफ़ादारी दिखाई, वह हर उस इंसान के लिए एक आदर्श है जो अल्लाह की रहमत और मग़फिरत का तलबगार है। उन्होंने अपने रब के हुक्मों को पूरा किया और अपनी उम्मत के लिए एक बेहतरीन नमूना छोड़ा।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि अल्लाह के दीन की सच्चाई को समझने के लिए हमें उन पैग़म्बरों के नक्शे-क़दम पर चलना चाहिए जिन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों को पूरा करने में बिता दी। हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की यह सिफ़त — "वफ़ा" यानी अपने वादे और कर्तव्य को पूरा करना — हमें सिखाती है कि हमें भी अपने रब के साथ अपने रिश्ते में सच्चे और पक्के होने चाहिए। जब हम अल्लाह के हुक्मों को पूरा करेंगे और उसके दीन को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँगे, तो अल्लाह हमें भी उन्हीं की तरह अपनी रहमत से नवाज़ेगा और हमें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी अता करेगा।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह का पैग़ाम कोई नया नहीं है, बल्कि यह वही रास्ता है जो हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) और उनसे पहले के नबियों ने अपनाया था। इसलिए हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रज़ा और जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला हम सबको हज़रत इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की सीख पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 35-39 — अन-नज्म

35أَعِندَهُ عِلْمُ الْغَيْبِ فَهُوَ يَرَىٰ
क्या उसके पास इल्मे ग़ैब है कि वह देख रहा है
36أَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِي صُحُفِ مُوسَىٰ
क्या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची जो मूसा के सहीफ़ों में है
37وَإِبْرَاهِيمَ الَّذِي وَفَّىٰ
और इबराहीम के (सहीफ़ों में)
38أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ
जिन्होने (अपना हक़) (पूरा अदा) किया इन सहीफ़ों में ये है, कि कोई शख़्श दूसरे (के गुनाह) का बोझ नहीं उठाएगा
39وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَانِ إِلَّا مَا سَعَىٰ
और ये कि इन्सान को वही मिलता है जिसकी वह कोशिश करता है
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीRevelation
37आयत

अनुवाद — अन-नज्म 37

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Tuesday, August 18, 2026

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