अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَمْ: क्या (प्रश्नवाचक)
- لَمْ يُنَبَّأْ: क्या उसे खबर नहीं दी गई
- صُحُفِ مُوسَىٰ: मूसा (अलैहिस्सलाम) के पवित्र पन्ने/ग्रंथ (तौरात)
तफसीर:
यह आयत उन लोगों को संबोधित कर रही है जो रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर आरोप लगाते थे कि वे झूठ बोलते हैं या अपनी तरफ से बातें गढ़ते हैं। अल्लाह तआला फरमाते हैं: क्या उस इंसान को वह बातें नहीं बताई गईं जो मूसा (अलैहिस्सलाम) के सहीफों (पवित्र ग्रंथों) में मौजूद हैं?
यानी, क्या उसे यह खबर नहीं पहुंची कि मूसा (अलैहिस्सलाम) की तौरात में और उन पहले के ग्रंथों में भी यही बातें मौजूद हैं जो इस कुरान में बताई गई हैं? क्या उसे मालूम नहीं कि ये सारी बातें पहले की किताबों में भी मौजूद थीं?
यह आयत उन लोगों को जवाब दे रही है जो सोचते थे कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कोई नई बात लेकर आए हैं। अल्लाह तआला फरमाते हैं कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह वही सच्चाई है जो पहले के नबियों पर उतारी गई थी। मूसा (अलैहिस्सलाम) की तौरात में भी यही बातें थीं, इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के सहीफों में भी यही बातें थीं।
इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम कोई नया धर्म नहीं है, बल्कि यह वही दीन है जो अल्लाह ने आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक सभी नबियों पर उतारा है। सभी नबियों का पैगाम एक ही था - अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा का पालन।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि कुरान की तालीमात कोई अजनबी चीज़ नहीं हैं, बल्कि यह वही सच्चाई है जो अल्लाह ने हर ज़माने में अपने नबियों के जरिए भेजी। जो लोग कुरान पर शक करते हैं, वह दरअसल उस सच्चाई से अनजान हैं जो पहले की किताबों में मौजूद थी। हमें चाहिए कि हम कुरान की तालीमात पर अमल करें और उस रोशनी में अपनी जिंदगी गुज़ारें, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुंचाता है।
📜 आयत 34-38 — अन-नज्म
अनुवाद — अन-नज्म 36
सूरा अन-नज्म आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची जो मूसा…सूरा आयत 36/62 — अन-नज्म النجم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नज्म सुनें, अन-नज्म अनुवाद, अन-नज्म mp3, अन-नज्म pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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