अन-नज्म · 36/62
अनुवाद उच्चारण — अन-नज्म
أَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِي صُحُفِ مُوسَىٰ ۝٣٦
Am lam yunabbaa bimaa fee suhuhfi Moosa
📖 हिंदी अर्थ
क्या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची जो मूसा के सहीफ़ों में है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَمْ: क्या (प्रश्नवाचक)
  • لَمْ يُنَبَّأْ: क्या उसे खबर नहीं दी गई
  • صُحُفِ مُوسَىٰ: मूसा (अलैहिस्सलाम) के पवित्र पन्ने/ग्रंथ (तौरात)

तफसीर:

यह आयत उन लोगों को संबोधित कर रही है जो रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर आरोप लगाते थे कि वे झूठ बोलते हैं या अपनी तरफ से बातें गढ़ते हैं। अल्लाह तआला फरमाते हैं: क्या उस इंसान को वह बातें नहीं बताई गईं जो मूसा (अलैहिस्सलाम) के सहीफों (पवित्र ग्रंथों) में मौजूद हैं?

यानी, क्या उसे यह खबर नहीं पहुंची कि मूसा (अलैहिस्सलाम) की तौरात में और उन पहले के ग्रंथों में भी यही बातें मौजूद हैं जो इस कुरान में बताई गई हैं? क्या उसे मालूम नहीं कि ये सारी बातें पहले की किताबों में भी मौजूद थीं?

यह आयत उन लोगों को जवाब दे रही है जो सोचते थे कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) कोई नई बात लेकर आए हैं। अल्लाह तआला फरमाते हैं कि यह कोई नई बात नहीं है, बल्कि यह वही सच्चाई है जो पहले के नबियों पर उतारी गई थी। मूसा (अलैहिस्सलाम) की तौरात में भी यही बातें थीं, इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) के सहीफों में भी यही बातें थीं।

इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि इस्लाम कोई नया धर्म नहीं है, बल्कि यह वही दीन है जो अल्लाह ने आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक सभी नबियों पर उतारा है। सभी नबियों का पैगाम एक ही था - अल्लाह की इबादत और उसकी आज्ञा का पालन।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि कुरान की तालीमात कोई अजनबी चीज़ नहीं हैं, बल्कि यह वही सच्चाई है जो अल्लाह ने हर ज़माने में अपने नबियों के जरिए भेजी। जो लोग कुरान पर शक करते हैं, वह दरअसल उस सच्चाई से अनजान हैं जो पहले की किताबों में मौजूद थी। हमें चाहिए कि हम कुरान की तालीमात पर अमल करें और उस रोशनी में अपनी जिंदगी गुज़ारें, क्योंकि यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की रहमत और जन्नत तक पहुंचाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 34-38 — अन-नज्म

34وَأَعْطَىٰ قَلِيلًا وَأَكْدَىٰ
और थोड़ा सा (ख़ुदा की राह में) दिया और फिर बन्द कर दिया
35أَعِندَهُ عِلْمُ الْغَيْبِ فَهُوَ يَرَىٰ
क्या उसके पास इल्मे ग़ैब है कि वह देख रहा है
36أَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِي صُحُفِ مُوسَىٰ
क्या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची जो मूसा के सहीफ़ों में है
37وَإِبْرَاهِيمَ الَّذِي وَفَّىٰ
और इबराहीम के (सहीफ़ों में)
38أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ
जिन्होने (अपना हक़) (पूरा अदा) किया इन सहीफ़ों में ये है, कि कोई शख़्श दूसरे (के गुनाह) का बोझ नहीं उठाएगा
अन-नज्मकुरान सूची
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अनुवाद — अन-नज्म 36

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Tuesday, August 18, 2026

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