अन-नज्म · 39/62
अनुवाद उच्चारण — अन-नज्म
وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَانِ إِلَّا مَا سَعَىٰ ۝٣٩
Wa al laisa lil insaani illaa maa sa`aa
📖 हिंदी अर्थ
और ये कि इन्सान को वही मिलता है जिसकी वह कोशिश करता है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَيْسَ لِلْإِنسَانِ إِلَّا مَا سَعَىٰ: इंसान के लिए कुछ नहीं है सिवाय उसके जो उसने कमाया (अर्थात, उसके प्रयास और कर्म का फल)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला ने एक बुनियादी सिद्धांत बयान किया है कि इंसान के लिए उसके अच्छे या बुरे कर्मों का फल उसी तक सीमित है। जैसे कोई व्यक्ति किसी दूसरे के गुनाह का बोझ नहीं उठा सकता, उसी तरह कोई व्यक्ति किसी दूसरे के नेक कर्मों का सवाब भी हासिल नहीं कर सकता। हर इंसान को उसके अपने प्रयास, उसकी मेहनत और उसकी नीयत के अनुसार ही बदला मिलेगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में ज़िम्मेदारी और जवाबदेही पूरी तरह व्यक्तिगत है। कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे के लिए सिफ़ारिश या वसीला बनकर उसे नेकी का सवाब नहीं दिला सकता, जब तक कि वह खुद उस नेकी को अंजाम न दे। अल्लाह तआला ने यह भी स्पष्ट किया है कि इंसान को उसके कर्मों का फल उसी के अनुपात में मिलेगा जो उसने किया और जिसकी उसने नीयत की।

यह आयत हमें मेहनत और परिश्रम की प्रेरणा देती है। यह बताती है कि सफलता और आख़िरत की भलाई किसी और के किए पर निर्भर नहीं, बल्कि हमारे अपने अमल पर है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में नेक कर्मों को अपनाएँ, अच्छे कामों में जुटे रहें, और अपनी नीयत को सही रखें। अल्लाह तआला किसी की मेहनत को बेकार नहीं करता, बल्कि उसे पूरा-पूरा बदला देता है।

यह भी याद रखें कि इस आयत का मतलब यह नहीं है कि हम दूसरों की मदद न करें या दूसरों के लिए दुआ न करें। बल्कि इसका मतलब यह है कि हर इंसान का अपना हिस्सा उसके अपने कर्मों पर निर्भर है। हमें अपने लिए भी नेकियाँ कमानी चाहिए और दूसरों को भी नेकी की तरफ बुलाना चाहिए, क्योंकि जो दूसरों को नेकी की तरफ बुलाता है, उसे भी उसका सवाब मिलता है, बिना उसके अमल में कमी किए।

यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने जीवन में आलस्य और लापरवाही से बचना चाहिए। हर पल हमारे पास अमल करने का मौका है, और हमें इस मौके को ग़नीमत समझकर नेक कर्मों में लगे रहना चाहिए। अल्लाह तआला ने अपने रहमत और कृपा से हमें यह रास्ता दिखाया है, तो आओ हम इस रास्ते पर चलें और अपने रब की रज़ा और जन्नत को हासिल करें।

🎧 सुनें

📜 आयत 37-41 — अन-नज्म

37وَإِبْرَاهِيمَ الَّذِي وَفَّىٰ
और इबराहीम के (सहीफ़ों में)
38أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ
जिन्होने (अपना हक़) (पूरा अदा) किया इन सहीफ़ों में ये है, कि कोई शख़्श दूसरे (के गुनाह) का बोझ नहीं उठाएगा
39وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَانِ إِلَّا مَا سَعَىٰ
और ये कि इन्सान को वही मिलता है जिसकी वह कोशिश करता है
40وَأَنَّ سَعْيَهُ سَوْفَ يُرَىٰ
और ये कि उनकी कोशिश अनक़रीेब ही (क़यामत में) देखी जाएगी
41ثُمَّ يُجْزَاهُ الْجَزَاءَ الْأَوْفَىٰ
फिर उसका पूरा पूरा बदला दिया जाएगा
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अनुवाद — अन-नज्म 39

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Tuesday, August 18, 2026

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