अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَمَاتَ (अमात): मृत्यु देना, मारना।
- وَأَحْيَا (व अह्या): जीवन देना, जीवित करना।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी एक बहुत बड़ी क़ुदरत का ज़िक्र किया है, जो सिर्फ़ उसी के इख़्तियार में है। वह यह कि मौत और ज़िंदगी देना पूरी तरह अल्लाह के हाथ में है। वही है जो जिसे चाहता है मौत देता है और जिसे चाहता है ज़िंदगी देता है। यह कोई और नहीं कर सकता, न कोई फ़रिश्ता, न कोई नबी, न कोई इंसान, न कोई जिन्न।
यह आयत हमें सिखाती है कि जिसने हमें ज़िंदगी दी, वही हमें मौत भी देगा, और फिर क़यामत के दिन वही हमें दोबारा ज़िंदा करेगा। जिस तरह उसने पहली बार पैदा किया, उसी तरह दूसरी बार भी ज़िंदा करना उसके लिए बिल्कुल आसान है।
इस आयत में एक और बड़ी सीख है — जब हम यह समझ लें कि ज़िंदगी और मौत अल्लाह के हाथ में है, तो हमारा दिल सिर्फ़ अल्लाह से जुड़ता है। हम किसी इंसान से नहीं डरते, क्योंकि मौत तो अल्लाह के हाथ में है। और हम किसी इंसान से उम्मीद भी नहीं रखते, क्योंकि ज़िंदगी और रिज़्क़ भी अल्लाह ही देता है।
यह आयत हमें आख़िरत (अंतिम जीवन) पर ईमान लाने की तरफ़ भी ले जाती है। जो लोग यह सोचते हैं कि मौत के बाद कुछ नहीं, वे भूल जाते हैं कि जिस अल्लाह ने पहली बार पैदा किया, वह दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।
इसलिए ऐ इंसान! अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत में बिता, क्योंकि यह ज़िंदगी एक इम्तिहान है। मौत के बाद तू अपने रब के सामने हाज़िर होगा, और फिर उस दिन तेरा अंजाम या तो जन्नत होगी या जहन्नम। अल्लाह से डर, उसकी रहमत की उम्मीद रख, और याद रख — मौत और ज़िंदगी सिर्फ़ उसी के हाथ में है।
📜 आयत 42-46 — अन-नज्म
अनुवाद — अन-नज्म 44
सूरा अन-नज्म आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये कि वही मारता और जिलाता हैसूरा आयत 44/62 — अन-नज्म النجم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नज्म सुनें, अन-नज्म अनुवाद, अन-नज्म mp3, अन-नज्म pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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